Monday, December 31, 2012

स्टेटस-2012

टैगिंग फ़ेसबुक में विचरते लोगों में सुरक्षा का एहसास देती है।(02-01-12)

टैगिंग से लोगों को सामूहिकता का एहसास होता है। लगता है इत्ते लोग हैं साथ में। सूचना सुरक्षित रहेगी।  (02-01-12)

टैग करने वाले बेचारे सोचते हैं कि अगर कई लोगों को फ़ेसबुक पर टैग करके जुलूस न बनाया तो सूचना अकेली पड़ जायेगी।  (02-01-12)

फ़ेसबुक की टैगिंग भी न हमको ऐसी लगती है जैसी किसी लचर सी घटना में पूरे गांव को किसी मुकदमें में नामजद कर दिया गया हो।  (02-01-12)

दो रुपये मतलब चार अखिलभारतीय हैप्पी न्यू ईयर। लोकल करते तो दस पैसे और लगाकर सात दोस्तियां निभ जातीं।(02-01-12)

देश के सब लोग सचिन के फ़ालोवर हो गये। ऐन टाइम पर क्लिक नहीं करते। (02-01-12)


शायद बीस-पचीस साल बाद कोई जौहरी कहे- ये हीरा देखिये।एक ही बचा है। थोड़ा मंहगा है क्योंकि इसमें पेट्रोल की पालिस की गयी है। (31-05-2012)

ट्विटर/फ़ेसबुक की दुनिया का रोलमाडल चंड़ीगढ़ का रॉकगार्डन है। कूड़ा अभिव्यक्ति को सलीके से पेश किया जाना इसकी ताकत है।(31-05-2012)

फ़ेसबुक/ट्विटर पर आपके मित्रों की संख्या आपकी किसी भी सीधी बात को टेड़े ढंग से कह सकने की काबिलियत के समानुपाती होती है। (31-05-2012)

समझदार व्यक्ति अपनी बेवकूफ़ी के साथ वैसा ही व्यवहार करता है जैसा पुराने जमाने के रईस अपनी अवैध सन्तान से करते थे। (31-05-2012)

” जाने-अनजाने कहीं कोई बेवकूफ़ी न हो जाये” का असुरक्षा भाव हर होशियार व्यक्ति का पीछा वोडाफ़ोन वाले कुत्ते की तरह करता रहता है। (31-05-2012)

किसी भी बात पर फ़ट से सहमत हो जाना समझदार होने का साइनबोर्ड है। (31-05-2012)

दुनिया में बेवकूफ़ी न होती तो अकलवाले के हाल कौड़ी के तीन होते। दुनिया का सारा कारोबार लोगों की बेवकूफ़ी के सहारे चल रहा है।  (31-05-2012)

शुद्ध बेवकूफ़ कभी अपने को ज्ञानी कहलाने के फ़ेर में नहीं पड़ता। शुद्ध बेवकूफ़ पवित्रात्मा होता है। निर्मल। निडर। बेखौफ़।

ट्विटर और फ़ेसबुक की दुनिया बड़ी तेज चलती है। जरा सा चूके नहीं कि अगला आपकी सोच से बड़ी चिरकुटई की बात कहकर चला जाता है। (29-05-12)

सोचते हैं कोई बहुत बड़ी बेवकूफ़ी की बात कह डालें लेकिन फ़िर आलस्य हावी हो जाता है। इस चक्कर में दूसरे बाजी मार ले जाते हैं।  (29-05-12)

कवि ने कविता की पहली पंक्ति का बिम्ब उठाकर दूसरी में धर दिया! पहली पंक्ति ने भागकर कवि के खिलाफ़ हेरा-फ़ेरी और उठाईगिरी की रिपोर्ट लिखा दी। (29-05-12)

वो कवि जो कह रहा था कि महाकाव्य लिखेगा
एक मुक्तक की वाह-वाह में,वो पूरा बहक गया। (29-05-12)

कविता हमारी समझ सके, ये जमाने में दम नहीं ,
बड़े पेचो खम हैं इसमें, किसी की जुल्फ़ों से कम नहीं।(29-05-12)

एक लाइन से इधर से आये
एक लाइन उधर से आये
कालजयी कविता रच जाये!(29-05-12)

रात एक स्टेटस दिमाग में आया। हमने कहा अब ट्विट करेंगे। वो अब दिख नहीं रहा है कहीं दिमाग में। लगता है रूठ कर कहीं छिप गया। नटखट स्टेटस! (22-06-12)

हिंदी ब्लॉगिंग की सबसे मासूम अदाओं में से एक है-"सबसे पहला होने की ललक"। लोग किसी न किस कोण से सबसे पहला होने की मोहर लगाये घूमते रहते हैं। (20-06-12)

भारत में रहने का यह फ़ायदा हुआ कि कम से कम कोई पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद के लिये नाम तो नहीं उछालेगा कोई।  (20-06-12)

पाकिस्तान भारत का सच्चा अनुयायी है। यहां अगला राष्ट्रपति कौन बनेगा की तर्ज पर वहां सवाल उठ गया - अगला प्रधानमंत्री कौन? (19-06-12)

कविता के बिम्ब बड़े नखरेबाज होते हैं। हरजाई टाइप। एकदम निर्दलीय विधायक की तरह होते हैं बिम्ब – जहां सत्ता दिखी उससे संबंद्ध हो जाते हैं। (19-06-12)

कवि: कविता लिखता तो मैं हर रस में हूं श्रंगार, वीर रस, वात्सल्य रस आदि लेकिन सब दोस्त उनको हास्य रस की ही तरह पढ़ते हैं।(19-06-12)

कवि - बेटी उपमा! जमाना बड़ा खराब है। अकेले इधर-उधर मत जाया करो! सत्यमेव जयते देखने भर से लोगों की नीयत ठीक नहीं हो जाती। (19-06-12)

कवि की सबसे बड़ी दौलत उसके बिम्ब होते हैं। कवि बिम्बों को अपने सीने से चिपकाकर रखता है जैसे मां अपने बच्चे को संभालती है। (19-06-12)

हमने गर्मी पर कविता लिखने के तमाम बिम्ब संजोये थे। कल अचानक हुई बरसात में सारे बिम्बों पर पानी फ़िर गया। (19-06-12)

सुबह से देखते-देखते समय न जाने कहां गायब हो गया बिना बताये। दिख नहीं रहा ! मिले तो हुलिया टाइट करते हैं समय का!  (15-06-12)

हमारा ट्विटर खाता हैक होने के चलते हमारे अकाउंट से अंग्रेजी फ़ूट पड़ी। ट्विटर खाता अपहरण का साइड इफ़ेक्ट है यह।  (15-06-12)

अभी सूचना मिली कि हमारा ट्विटर खाता हैक हो गया। क्या इसमें भी कोई फ़िरौती-विरौती मांगने का चलन है? लेकिन ये तो चालू है!(15-06-12)

मन तो करता है कि देश के बारे में खूब सारी चिंतायें करूं लेकिन क्या करूं दफ़्तर का काम बीच में आ जाता है। देश छोड़ दफ़्तर देखना पड़ता है। (24-07-12)

मामला कोई हो, मुद्दा कैसा भी हो , भले ही आपने मेरे मन की ही बात कही हो लेकिन हम मिशनरी आलोचक हैं! आपकी आलोचना करना हमारी मजबूरी है।  (24-07-12)

किसी देश, समाज और संस्कृति का उत्थान और पतन क्या महज सांस्कृतिक ऊर्जा (स्थितिज/गतिज ऊर्जा) का रूपान्तरण है?(24-07-12)

सुबह हो गयी। दू ठो चाय भी पी लिये । अब सोचते हैं देश-काल पर चिंतन शुरु किया जाये। देखते हैं आज कौन समस्या ’टाप’ पर है, उसी को फ़रियायेंगे। (20-07-12)

सुबह भी क्या अजब है। रोज हो जाती है! दफ़्तर जाना होगा अब तो! (19-07-12)

कुछ लोग फ़ेसबुक पर अपने दोस्तों के स्टेटस इतनी तेजी से ’लाइक’ करते हैं मानों बिजली वाले रैकेट से पटापट मच्छर मार रहे हों।  (11-07-12)

अगर फ़ेसबुक न होता तो तमाम लोग अपने निठल्लेपन के चलते निपट गये होते। (08-07-12)

"कविता रचना मेरे लिये प्रसव पीड़ा से गुजरने जैसा है" -एक कवि!
"आपने परिवार नियोजन अपनाया होता तो हम दोनों इतना पीड़ित न होते"- एक पाठक! (08-07-12)

एक कार्टून की प्रसिद्धि से जलकर दूसरे कार्टून ने उसको कोसा- भगवान करे ये विवादास्पद हो जाये। (08-07-12)

घर से निकलने वाले हैं। सोच रहे हैं स्टेटस में घर स्टेशन जाते हुये आटो का फोटो सटायें कि स्टेशन पर रेलगाड़ी का। बताइये संतजन!(11-08-12)

भारतीय हॉकी टीम ने ओलंपिक में पसीना बहाकर अपनी स्थिति नींव की ईंट सरीखी बनाई है। अब उसे वहां से कोई माई का लाल हिला नहीं सकता।(11-08-12)

कल अपन तो दोस्तों को बिना गुडनाइट कहे सो गये। दोस्त क्या सोचते होंगे। खुश ही होंगे कि एक स्टेटस कम हुआ। लाइक करने से बचे।(13-08-12)

आंदोलनों और क्रांतियों का समय प्रबंधन अच्छा होना चाहिये। कुछ ऐसा कि हर वीकेंड में एक क्रांति की जा सके। साल में बावन क्रांतियां।(13-08-12)

जब गीता तक में कहा गया है कि हम कुछ साथ लेकर नहीं आते न कुछ साथ लेकर जाते हैं फ़िर लोग बिना बात के कुछ करोड़ इधर-उधर करने की बात को लेकर हल्ला किसलिये मचाते हैं?- एक जनप्रतिनिधि   (17-10-12)

अभय कुमार दुबे जी ने एन.डी.टी.वी. प्राइम टाइम में कहा- राजनेताओं को बिजनेस और राजनीति को अलग-अलग रखना चाहिये। कोई राजनेताजी सुनेंगे तो यही कहेंगे- ये तो मछली और पानी को अलग-अलग रखने जैसी बात हुई।(17-10-12)

केजरीवाल जी और राजनीतिक पार्टियों में भाषाई मतभेद दिखते हैं। जिसको केजरीवालजी ’ राजनीतिक पार्टियों की मिलीभगत ’ मानते हैं उसे राजनीतिक पार्टियां शायद ’शान्तिपूर्ण सहअस्तित्व’ मानती हैं।(17-10-12)

केजरीवाल जी के काम करने के तरीके से पता चलता है कि वे पुराने नौकरशाह हैं। जैसे नौकरशाह रोज फ़ाइलें निपटाते हैं वैसे ही वे रोज एक नया घपला निपटा देते हैं।(17-10-12)

अपने देश के जनप्रतिनिधियों को मीडिया की लप्पेबाजी और माननीय अदालतों की गति पर अखंड आस्था है इसीलिये जिस किसी पर भी कोई आरोप लगता है वह तड़ से बयान जारी कर देता है- आरोप साबित होने पर राजनीति छोड़ दूंगा।(15-10-12)

कल पता चला कि एक एन.जी.ओ. को 71 लाख मिले। उसने 77 लाख बांटे। उसके बाद ही मुझे एहसास हुआ कि एन.जी.ओ. वाले हमेशा क्यों झल्लाये रहते हैं। घाटा किसी को भी चिड़चिड़ा बना सकता है।  (15-10-12)

सिर्फ़ स्त्रियां जानती हैं कि किसी जीव को जन्म या पुनर्जन्म कैसे दिया जाता है? -- उदयप्रकाश (13-10-12)

बड़ी आपदाओं से सामना होने पर स्त्रियां सदैव पुरुषों से बहादुर साबित होती हैं।- मो.यान.  (13-10-12)

आजकल देश में घपले-घोटाले फ़ेसबुक स्टेटस की तरह फ़टाफ़ट अपडेट होने लगे हैं। (09-10-12)

सुना है तुम्हारी बेटी ’अभिव्यक्ति’ को फ़िर किसी ने छेड़ा।
हां बहन, हर तरफ़ लफ़ंगे भरे पड़े हैं। सोचती हूं किसी गुंड़े को सिक्योरिटी के लिये किराये पर रख लूं! (25-11-12)

अबे, तुमको हुजूर माईबाप, माफ़ करें, जय हो, जिन्दाबाद, आप देवता हो, राजा हो बोलने की पूरी छूट है- और कित्ती बोलने की आजादी चाहिये तुमको? (21-11-12)

इन दोनों लौंडों को लॉक अप में डाल दो। दरोगा जी बोले थे उठाकर लाने को। उनके पास किसी नेता का फोन आया था। दफ़ा-वफ़ा मुंशी जी आकर बतायेंगे। (21-11-12)

हर गाड़ी के साथ एक पोर्टेबल ओवरब्रिज होना चाहिये। जहां जाम में फ़ंसे गाड़ी उप्पर से निकाल ली।- जाम में फ़ंसे एक आम आदमी का बयान। (19-11-12)

Auto vaale ko hadkane ke liye varta shuru . Ek ne pan masala thooka. Ham usase disccuss karane lage ki peek se parabola bana ya eclips.  (19-11-12)

abhi abhi ek auto vale ne left se overtake kiya hai. Sochate hain usako hadkane ke pahale isko tweet kar den.(19-11-12)

कभी-कभी अनजाने में बड़ी चूक हो जाती है। आज सुबह बिस्तर पर बैठकर आधा घंटा फ़ेसबुकियाने के बाद सोफ़े पर आकर सर्फ़ियाने में इत्ता मशगूल हो गये कि अपने स्टेटस में इस घटना का जिक्र करना भूल गये। क्या किया जाये अब जो हुआ सो हुआ।  (10-11-12)

आज मेरा मन सहमत होने का हो रहा है। कोई कुछ कहे इससे पहले आपै कुछ कह डालिये ताकि हम फ़टाक से सहमत हो सकें -बवाल कटे।(21-12-12)

कल भारतीय क्रिकेटरों का खेल देखकर लगा कि अगर ये अपनी पर उतर आयें तो मैच ड्रा तक करा सकते हैं।(16-12-12)

पिछले आठ साल में भारत की क्रिकेट टीम भारत में किसी विदेशी टीम से नहीं हार पाई तो इसमें भारत की टीम का क्या दोष? हमने किसी को हराने को मना किया था क्या? दूसरे की कमजोरी के लिये अपनी टीम को दोष देने की आदत ठीक नहीं।(13-12-12)

जिस तेजी नामचीन साहित्यकारों पर नकल के आरोप लग रहे हैं उससे हमें तो डर लगने लगा है कि कहीं हम चंद मौलिक लेखकों में न गिने जाने लगें। मेरा डर तब और बढ़ गया जब हमारे एक मित्र ने कहा कि वज्र मूर्ख ही नितांत मौलिक होता है।  (09-12-12)

काटजू जी ने कल कहीं कहा कि नब्बे प्रतिशत भारतीय मूर्ख होते हैं। उससे लोग भन्नाये हुये हैं। मुझे लगता है कि काटजू जी की हिंदी उत्ती मजबूत नहीं है। वे नब्बे प्रतिशत भारतीयों को भोला-भाला कहते तो लोग उनकी बात का समर्थन करते। बेवकूफ़ को अगर भोला कहा जाये तो वो खुश रहता है।(09-12-12)

बीसीसीआई को पैसे की कमी तो है नहीं। उसको अगर सच में जीतनी की ललक है तो टींम में खिलाड़ी भले यही रखें लेकिन खेलने का काम कुछ खेलने वालों को आउटसोर्स कर देना चाहिये।  (09-12-12)

भारत की क्रिकेट टींम सिर्फ़ खेलने के लिये के खेलती है। देश के लोग न जाने क्यों उसके हार जाने पर इत्ता परेशान होते हैं। आखिर खेलभावना भी तो कोई चीज होती है।(09-12-12)

वैसे तो भारत की क्रिकेट टीम इंग्लैंड को आराम से हरा देती लेकिन जब उसको पता चला कि आस्ट्रेलिया ने भारत को हाकी में हरा दिया तो भारतीय क्रिकेट टीम हाकी टीम के समर्थन में हार गयी। ये है आपस में एकजुटता का भाव।(09-12-12)

अंग्रेज बड़े बेमंटे हैं। मीडिया की मांग पर भारत की टीम अंग्रेजों की टीम की पुंगी बजा रही थी । इस बीच अंग्रेजों ने खेल शुरु कर दिया। धोखे में खूब रन बना डाले। भारत को हरा दिया। बताओ कहीं ऐसा करना चहिये उनको खेल में। चीटर कहीं के ।  (09-12-12)

भारत की क्रिकेट टीम इंगलैंड की टीम से बहुत अच्छी है। लेकिन क्या हुआ कि मीडिया के बहकावे में आकर भारत की टीम इंगलैंड की टीम की पुंगी बजाने में बिजी हो गयी इसबीच इंगलैंड ने भारत को काफ़ी रन से हरा दिया।  (09-12-12)

देश में विकास की इत्ती योजनायें चल रही हैं कि आम आदमी की नींद उड़ गयी है। बेचारा डरा हुआ कि कहीं नींद में ही उसका विकास न हो जाये। पता चला सुबह उठा तो विकसित हो गया है और कोई उसको पहचान नहीं पा रहा है।(09-12-12)

दुनिया भर की सरकारें गरीबों का भला करने को जित्ता बेताब दिखती हैं उससे लगता है कि आने वाले समय में लोग प्रार्थना न करने लगें कि हे भगवान अगले जन्म में मुझे किसी गरीब के ही घर में जन्म देना ताकि सरकार के किसी काम आ सकूं।(04-12-12)

कभी-कभी सोचते हैं कि देश के बारे में चिंता करें कि देश किधर जा रहा है। लेकिन फ़िर सोचते हैं कि देश कहीं बुरा न मान जाये उसकी प्राइवेसी में दखल दे रहे हैं हम। इसलिये मटिया देते हैं।(02-12-12)

भ्रष्टाचार समाज में ऐसे घुल-मिल गया है जैसे भारत में बांगलादेशी। अलग करना मुश्किल हो गया है।(02-12-12)

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Friday, December 21, 2012

ठेले पर कयामत

http://web.archive.org/web/20140420082419/http://hindini.com/fursatiya/archives/3782

ठेले पर कयामत

केयामत लेल्लो जी केयामत। रंग-बिरंगी केयामत। ताजी रसभरी केयामत्त। लेल्लो जरा बची है। कल का भरोसा नहीं। आज ले ल्लो केयामत।
हर तरफ़ कयामत सजी थी। तरह-तरह की कयामत। कयामत के अलावा और कुछ नहीं दिख रहा था। एक ठेले वाले से पूछा कि भाई कयामत के अलावा कुछ और नहीं है क्या आज? वो बोला- आज की थीम तो कयामत की ही है। आज सिर्फ़ कयामत बिकेगी। कयामत के सिवा और कुच्छ नहीं। देख लीजिये इत्ते तरह की कयामत फ़िर नहीं मिलेगी दोबारा। सच अ हैवी डिस्काउंट यू विल नेवर फ़ाइंड अगेन।
ठेले वाले की अंग्रेजी के प्रभावित होकर हम उसके ठेले में सजी तरह-तरह की कयामतों को उलट-पुलट के देखने लगे। उससे पूछने लगे कि कुछ बताओ कौन सी कयामत बेहतर है तो उसने कहा हमारे पास आज कहां टाइम? लेकिन यहां वाई-फ़ाई लगा है। अपने मोबाइल को नेट से कनेक्ट करके गूगल पर मनचाही कयामत खोज लो। हमने कनेक्ट किया तो तरह-तरह की कयामतें दिखीं। आज भी जरा देख लीजिये कैसी-कैसी कयामतें सजी हैं उधर:

  1. कयामत-कयामत: यह थीम कयामत है। इसमें बताया गया है कि दुनिया में आप कुछ भी करें अंतत: कयामत होकर रहेगी। सिक्के के दूसरे पहलू की तरह यह भी दिखाया गया था कि जो मन में आये करते रहो कोई कयामत थोड़ी होने वाली है।
  2. डिस्काऊंट कयामत: यह वालमार्ट के बाद आने वाली कयामत का सीन है। जो चीज आपको चाहिये उसको छोड़कर हरेक चीज पर भयंकर डिस्काउंट है। आपको मंजन चाहिये तो पता चला कि साबुन पर हैवी डिस्काउंट है। बिस्कुट चाहिये तो वहां हाजमोला डिस्काउंट पर है। पानी चाहिये तो दारू पर भयंकर छूट है। डिस्काउंट का आतंक इतना है कि लोग सारे पैसे डिस्काउंट वाली चीज की खरीद में खपा रहे हैं। बाकी के लिये लोन ले रहे हैं। एक ने तो पचीस शर्टें डिस्काउंट पर खरीद डाली लेकिन पैंट पर डिस्काउंट के इंतजार में उनको पहन नहीं पा रहा है। लोग इस बात पर अवसाद के शिकार हो रहे हैं कि चीजें सामान्य दाम पर खरीदने के तुरंत बाद हैवी डिस्काउंट पर चली जाती हैं। वे भागकर बाकी बचे पैसे से फ़िर वही खरीदते हैं। वाल मार्ट के बाहर ही ज्योतिषियों के खोमचे खुल गये हैं जो आपकी जन्मपत्री देखकर बताते हैं कि कौन सी चीज कब डिस्काउंट पर जाने वाली है। कुल मिलाकर बताया गया है कि दुनिया जब कभी खतम होगी तो उसका कारण डिस्काउंट ही होगा।
  3. कविता कयामत: इस ठेले पर हर तरह कवितायें ही कवितायें सजी हुयी हैं। हर तरह की कवितायें। ताजी, गर्म, नर्म, सड़ी, गली, भली, बहुत भली, शरीफ़, बदमाश कवितायें। देशभक्ति की कवितायें तो एकदम भाले की तरह तनी हैं। पढ़ते ही फ़टाक से कयामत का सीन बन जाता है। कुछ प्रेम की कवितायें तो इत्ती कोमल हैं कि उनको देखने भर से वे मुर्झा गयीं। दुकान वाले ने हर्जाना धरा लिया कविताओं के बराबर। भावुक कवितायें जहां सजी थीं वहां तौलिये की दुकान खूब चल रही थी। लोग आंसू पोंछते हुये कवितायें बांच रहे थे। भ्रष्टाचार विरोधी कविताओं का स्टॉक खतम हो गया था। नयी खेप के लिये एडवांस बुकिंग चालू थी। लल्बो-लुआब यह है कि एक दिन ऐसा आयेगा कविता सुनाने/बचने के चक्कर में मारपीट करते हुये मारें जायेंगे। दुनिया की कयामत की जड़ में कविता होगी।
  4. देशभक्ति कयामत: हर तरफ़ लोग देशभक्ति के काम में जुटे हैं। जिसे देखो वो अपने हिस्से के देश का भला करे डाल रहा है। अपने हिस्से का भला करने के बाद लोग दूसरे के हिस्से को नोचकर उसकी भी भलाई कर के डाल दे रहे हैं। कई-कई बार भलाई कर रहे हैं। देश से निपटकर विदेश निपटा रहे हैं। विदेश निपटाने के बाद फ़िर स्वदेशी हो रहे हैं। इस चक्कर में उनके पास पैसा, पावर जमा हो गया है। उसको लोग इधर-उधर खपाकर फ़िर भलाई में जुटे जा रहे हैं। इस हिस्से के इतिहासकार अपनी किताबों में लिखकर धर लिये हैं- दुनिया का भला करने में प्रतिस्पर्धा ही कयामत का कारण बनी।
  5. तकनीकी कयामत: दुनिया का खातमा दुनिया वालों के ही हाथों होगा। दिन प्रतिदिन घातक हथियार बनाने के क्रम हम कोई ऐसा हथियार बनायेंगे जिससे सारी दुनिया निपट सके। कोई सिरफ़िरा उसका ट्रायल करते हुये दुनिया निपटा देगा। या दुनिया इत्ती तरक्की कर डालेगी कि सब लोग पिकनिक मनाने दूसरे ग्रह में जायेंगे। पूरी पृथ्वी के लोग किसी दिन दूसरे ग्रह पर गये होंगे। लौटते समय धरती से कनेक्शन दूट जायेगा। तमाम कोशिशों के बावजूद आई.आर.टी.सी. की साइट की तरह धरती से तार जुड़ेंगे नहीं और हम सारी उन्नत सभ्यता अपने वायुयान में समेटे डम्प्लाट ब्रह्मांड में भटकते फ़िरेंगे। यह तकनीकी कयामत होगी।

  6. करप्शन कयामत: दुनिया भर में करप्शन का नामोनिशान मिट गया है। हथियारों के दलाल खतम हो गये हैं। चुनाव में टिकट बिना पैसे लिये मिलने लगे हैं।मिलावट खत्म है। दंगे नहीं हो रहे हैं। कोई प्रधानमंत्री बनने के लिये लालायित नहीं दिखता। न कोई राष्ट्रपति बनने के लिये उचकता है। सब अपनी-अपनी खटिया में बैठे आराम फ़र्माते दिख रहे हैं। तबादले बन्द हो गये हैं। ठेकेदारी खतम हो गयी है। ट्रेन में टी.टी. खतम हो गये हैं। अपराध खतम हो गये हैं। पुलिस विभाग बंद हो गया है। फ़ौंजे पहले बैरकों में लौटीं फ़िर घरों में और फ़िर कहीं और। दुनिया की सारी प्रगति ठप्प हो गयी है। दुनिया एकदम ठहर गयी है। भ्रष्टाचार के अभाव में दुनिया का सारा कार्य व्यापार ठप्प हो गया है।कयामत आ गयी है।
  7. प्राकृतिक कयामत: कुछ नहीं बस दुनिया ऐसे ही चलती रहेगी। जीवन के सब साधन बिकाऊ होते जायेंगे। पानी, हवा सब खराब हो जायेगा। अकाल, महामारी, भुखमरी में अनगिनत लोग निपट जायेंगे। फ़िर जित्ते बचेंगे उत्ते लोग अकल की बात के साथ हरकतें भी करेंगे। बचे हुये लोग कयामत के किस्से सुनायेंगे। उनकी आगे वाली पीढी के लोग उनसे कहेंगे क्या गप्पाष्टक है।
  8. इसी तरह की तमाम कयामतों को देखते हुये एक राप्चिक टाइप कयामत की तरफ़ इशारा करते जब पूछा गया कि ये वाली कयामत किस ठेले पर मिलेगी तो उस ठेले वाले ने पूछा कि अरे भाई जो ये आप देख रहे हैं वो कयामत नहीं फ़ुरसतिया पर छपी ताजी पोस्ट है। अब जब देख ही लिये हैं तो टिपिया भी लीजिये। न जाने कब कयामत आ जाये।

18 responses to “ठेले पर कयामत”

  1. jatdevta SANDEEP
    दुनिया खत्म हो जाती तो अच्छा रहता, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
    jatdevta SANDEEP की हालिया प्रविष्टी..गीता – सार GEETA SUMMARY
  2. jatdevta SANDEEP
    वैसे कुदरत समय-समय पर अपना असर दिखाती रहती है।
  3. sanjay jha
    इस कयामत के आगे और क्या क़यामत हो सकती है भला ………
    क़यामत पोस्ट……….
    प्रणाम.
  4. संतोष त्रिवेदी
    …क़यामत के आइडिये हैं :-)
  5. Kajal Kumar
    क़यामत के छप्‍पन भोग :)
    Kajal Kumar की हालिया प्रविष्टी..कार्टून :- सन 2052 का भारतीय क्रि‍केट
  6. mahendra mishra
    क़यामत से कमायत तक … ये भी किसी क़यामत/आफत से कम नहीं हैं ….
  7. प्रवीण पाण्डेय
    रात बाहर निकल गये थे निरीक्षण पर, यह जानने कि बाहर भी बिक रही है क़यामत कि टीवी में ही। सब सुकून से सो रहे थे।
    प्रवीण पाण्डेय की हालिया प्रविष्टी..टिप्पणियाँ भी साहित्य हैं
  8. shikha varshney
    हमने तो भारत वासियों से उनके रात १२ बजे पूछा कि क़यामत आई या नहीं , क्योंकि हमारे यहाँ तो आती भी तो साड़े पांच घाटे देरी से आती. उन्होंने कहा नहीं आई तो हम चादर तान के सो गए.
  9. ताऊ लठ्ठवाले
    बच गये प्रभो…जय हो!
    रामराम.
    ताऊ लठ्ठवाले की हालिया प्रविष्टी..अपनी बीबी के नाम से दे दे सेठ…दो दिन से कुछ मुर्गा…अंगूरी नही चखी है सेठ…
  10. Alpana
    क़यामत के टाईप वो भी इतने सारे !यह आईडिया आप को ही सूझ सकता है .
    एक नए नज़रिए से सामयिक समस्याओं को देखता हुआ यह लेख अच्छा कटाक्ष है .इतनी तरह की क़यामतें हैं जो अक्सर आती रहती हैं और ये दुनिया फिर भी टिकी है वाकई बड़ा आश्चर्य है.
    Alpana की हालिया प्रविष्टी..आप कहाँ हैं ?यूँ मौन क्यूँ हैं?
  11. विज्ञानशंकर
    सृष्टि=यह दिखाई दे रही प्रकृति की रचना अपने में विकृति है | आपने ठीक फरमाया भ्रष्टाचार =विकृति का पर्याय, नहीं रहेगा तो क़यामत सामने है | करप्शन क़यामत – बहुत ही सुन्दर और अत्यंत मौलिक विवेचना |
  12. ajit gupta
    ब्‍लागिंग की कयामत भी आने की सम्‍भावना है। असांजे ने प्रलय के दिन ही घोषणा की है कि दस लाख केस ऑपन करूंगा। अब फेसबुकिए टाइप की कयामत होगी। इसमें सारे ही लीडर टाइप के लोग सावधान हो जाएंगे और जनता ही मांग करने के चक्‍कर में कयामत का शिकार हो जाएगी। बहुत ही बढिया व्‍यंग्‍य है, एकदम पुरस्‍कार योग्‍य। बस मेरे पास ही पुरस्‍कार देने को नहीं है, नहीं तो मैं दे ही देती।
    ajit gupta की हालिया प्रविष्टी..पुरुषों की स्‍वतंत्रता
  13. देवेन्द्र पाण्डेय
    पोस्ट है या कयामत है!
  14. संजय @ मो सम कौन
    अब तक तो बासी हो ली होगी कयामत भी..
    संजय @ मो सम कौन की हालिया प्रविष्टी..ये आना भी कोई आना है फ़त्तू?….
  15. Virendra Kumar Bhatnagar
    एक और कयामत अपने देश में चुपके-चुपके बढ़ी चली आ रही है जिसे रोकना तो दूर कोई उसके बारे में बात तक नहीं करना चाहता, वह है जनसंख्या विस्फोट।
  16. arvind mishra
    बाप रे क़यामत ही क़यामत -ब्लॉग जगत की क़यामत कौन ? :-)
    arvind mishra की हालिया प्रविष्टी..वे उधार लेने वाले :-(
  17. प्रवीण शाह
    .
    .
    .
    कैसी कयामत पोस्ट है यह… तमाम कयामतों को एक साथ ही निबटा दिया है…
    केयामत लेल्लो जी केयामत। रंग-बिरंगी केयामत। ताजी रसभरी केयामत्त।… हाँ लिये जा रहे हैं साथ… एक दो को निपटाना जो है… :)
  18. फ़ुरसतिया-पुराने लेख
    [...] ठेले पर कयामत [...]

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Thursday, December 20, 2012

किसी के जैसा होना मुझे पसंद नहीं- शिखा वार्ष्णेय

http://web.archive.org/web/20140331070206/http://hindini.com/fursatiya/archives/3754

किसी के जैसा होना मुझे पसंद नहीं- शिखा वार्ष्णेय

शिखा वार्ष्णेय के बारे में कुछ लिखते हुये सोच रहे हैं कि उनको जानी-पहचानी (लम्बी नाक वाली) ब्लॉगर लेखिका कहें या कि लोकप्रिय चिट्ठाकार या फ़िर फ़्री लांसर पत्रकार। इंटरप्रेटर या फ़िर अनुवादक। यह सोचना झमेले का काम है। आप अपना हिसाब आप तय करो हम तो उनके बारे में अपनी कही बात दोहरा देते हैं:
शिखा जी से अपना परिचय एक ब्लॉगर के नाते ही है। हमारे देखते-देखते उन्होंने उन्होंने अपने रूस प्रवास के संस्मरण लिखने शुरु किये। वे अपन को बेइंतहा पसंद आये। किताब में शामिल लगभग सभी लेख पहले ही बांच भी रखे थे पोस्ट में। खूब तारीफ़ भी उन पोस्टों की। क्या करते अगला संस्मरण पढ़ने का लालच जो था। :)
खुदा झूठ न बुलाये इसी झांसे में उनकी तमाम कवितायें भी बांच गये। न केवल बांची बल्कि उम्दा/बेहतरीन/बहुत अच्छा भी कह गये उनके बारे में – यह सोचते हुये कि ये निकल जायेंगी तो फ़िर संस्मरण/लेख भी आयेंगे। :)
शिखाजी से बात करना बहुत दिन से उधार था। फ़िर एक दिन दोपहर के बाद जब लंदन में बहुत दिन बाद धूप निकली थी और वहां का मौसम सा रे गा मा टाइप हो रहा था और शिखा जी दोपहर को चावल खाने के बाद आने वाली नींद में अलसाई हुयी थी उनसे बात हुई।
लंदनवासी शिखाजी की बेटी नवीं में और बेटा सातवें में पढ़ता है। पति साफ़्टवेयर इंजीनियर हैं। शुरुआत में भारत में पढ़ी-लिखी शिखाजी को लंदन की पढ़ाई बहुत अच्छी लगती है क्योंकि वह ’प्रैक्टिकल’ और कायदे की होती है। बच्चों पर बेवजह दबाब नहीं होता। वहां कैरियर के बारे में बात करते हुये उन्होंने बताया – “कैरियर की जहां तक बात है तो सातवीं के बाद बच्चे की अभिरुचि किस विषय में है उससे शुरुआत की जाती है। फ़िर उसकी पूरी जानकारी बच्चे को दी जाती है। स्कूल से ही सभी सुविधायें और गाइडेंस दी जाती हैं। बच्चा उसी मुताबिक अपना कैरियर तय करता है।“
उनकी पहली किताब स्मृतियों में रूस काफ़ी चर्चा में रही। तीन वर्ष की ब्लॉगिंग के दौरान शिखाजी को तमाम नये-नये पाठक/दोस्त मिले तो ऐसे प्यारे दोस्त भी मिले जिन्होंने उन पर खुश होकर उनके बारे में कहानियां भी लिखीं- थोड़ा मेक अप के साथ , जन्मदिन के मौके पर चेहरे पर केक पोतने के रिवाज की तरह! :)
जब तक उनसे बातचीत नहीं हुई थी तब तक बातचीत करना उधार था। जब बातचीत हो गयी तो पोस्ट करना उधार हो गया। करीब चार महीने पहले हुई बातचीत पोस्ट करना टलता जा रहा था। आज याद आया कि आज के दिन शिखा जी का जन्मदिन पड़ता है तो सारे आलस्य को धता बताकर उनके साथ हुई बातचीत को आपके सामने पेश कर रहा हूं। बातचीत मूलत: ब्लॉगिंग के इर्द-गिर्द सीमित रही। इधर-उधर, दोस्तों सहेलियों के बारे में पूछने पर शिखाजी ने मामला एकदम गोल-मोल कर दिया। इसलिये गोल-मोल बातचीत को हमने भी छांट दिया।
शिखाजी को उनके जन्मदिन के मौके पर शुभकामनाये देते हुये उनसे हुई बातचीत पेश है।
सवाल: ब्लाग के चक्कर में कैसे पड़ी ?
जबाब: ब्लॉग मेरे लिये चक्कर नहीं है जी!
मेरा ब्लॉग मेरा सबसे अच्छा मित्र है। जिससे मैं अपने भाव बांटती हूं।
सवाल: धनचक्कर है?
जबाब: अपना तो जीना है यह। मेरा ब्लॉग मेरा सबसे अच्छा मित्र है। जिससे मैं अपने भाव बांटती हूं।
सवाल: सबसे पहले ब्लाग के बारे में कैसे पता चला?
जबाब: ऑरकुट के साइट बार में कुश की कलम के लिंक से।
सवाल: जब ब्लाग लिखना शुरु किया था तब ज्यादातर कवितायें लिखी थीं आपने- छुटकी-छुटकी!
जबाब: हां उसे मैंने एक इलेक्ट्रानिक डायरी समझा था। इसलिये अपने पेपर वाली डायरी सब वहां ट्रांसफ़र कर दिया था।
सवाल: फ़िर गध्य गद्य लेखन में कैसे आयीं? लेख लिखना कैसे शुरु किया?
जबाब: फ़िर जैसे-जैसे थोड़ा इधर-उधर ब्लॉगस में घूमना शुरु किया तो देखा कि लोग हर विधा में ब्लॉग लिखते है तो मैंने भी लिखना शुरु कर दिया।
मौलिक अभिव्यक्ति, बिना बनावट के, सहज भाषा ब्लॉगिंग की सबसे अच्छी चीज है।
सवाल: रूस वाले संस्मरण लिखने का विचार कैसे आया?
जबाब: यह पूछिये कि संस्मरण लिखने का विचार कैसे आया? रूस के संस्मरण तो बहुत बाद में आये। लोग ब्लॉग पर संस्मरण लिखते थे पर मुझे लगता था कि किसी के व्यक्तिगत संस्मरण में पाठक की क्या रुचि हो सकती है। फ़िर एक मित्र ने कहा कि लिखा करो। मैंने फ़िर भी टाल दिया। फ़िर कुछ और मित्र कहने लगे कि अगर संस्मरण में जानकारी हो तो बहुत पठनीय होते हैं इसलिये कोशिश करो तो बस एक्सपेरेमेंट के तौर पर शुरु किया जो बाद में रूस के संस्मरण तक पहुंचा।

सवाल हमने पढ़े हैं आपके संस्मरण पठनीय हैं- एक बार में पढ़ जाने लायक।

जबाब: जी! मुझे रूस के संस्मरण लगातार लिखने के लिये उकसाने में आपके कमेंट का भी हाथ है।
सवाल: आपका एक तकिया कलाम ’यार’ है और दूसरा ’जी’ । दोनों में बहुत दूरी है :)
जबाब: हम्म! क्या फ़र्क पड़ता है! एक दोस्ताना है। दूसरा इज्जतदार। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं!
सवाल: ब्लाग की शुरु की दुनिया कैसी लगती थी?
जबाब: बहुत अच्छी। एक कैम्पस सा लगता था।
सवाल: हां वही बताया जाये।सवाल: उसके मुकाबले अब कैसी लगती है ब्लाग की दुनिया?
जबाब: अब भी ठीक ही है ….हां काफ़ी लिखने वाले कम हुये हैं? यूं अपने काम से काम रखने वालों के लिये तब और अब एक सा ही है।
सवाल: शुरु में कौन कौन से ब्लाग अच्छे लगते थे!
जबाब: बिल्कुल शुरु में तो अब याद नहीं पर किशोर चौधरी और अनिल कांत की कहानियां काफ़ी पढ़ीं। कविता के भी कुछ ब्लॉग अच्छे थे। अभी नाम याद नहीं आ रहे। शेफ़ाली पाण्डेय को भी काफ़ी समय से पढ़ती रही हूं।
रस्मी टाइप की टिप्पणियां जो करते हैं वो उनका स्वभाव हो सकता है। बाकी छोटी टिप्पणियों में मुझे कोई बुराई नहीं लगती।
सवाल: आप अपने को अपने काम से काम रखने वाला ब्लागर समझती हैं?
जबाब: जी हां –काफ़ी हद तक।
सवाल: एक कैम्पस सी दुनिया में भी अपने काम से काम रखने वाला कैसे भाई?
जबाब: क्यों नहीं ?
सवाल: रूस के ब्लाग पढ़ती हैं कभी? वहां की समस्यायें लोग लिखते होंगे न ब्लाग में!
जबाब: नहीं ! कभी कोई मित्र लिंक दे देता है तो वैसे नहीं। समस्यायें लिखते होंगे … कभी सोचा नहीं।
सवाल: आजकल कैसे ब्लाग पढ़ती हैं?
जबाब: आजकल तो बहुत ब्लॉगस पढ़ती हूं।
सवाल: कौन कौन से ज्यादातर! कविता के या कहानी के ?
जबाब: सब सिवाय उनके जो विवाद या झगड़ा कराने के लिये या साम्प्रदायिकता फ़ैलाने के लिये लिखे गये हों।
सवाल: ब्लॉग जगत के झगड़े वाले ब्लाग कौन से मानती हैं?
जबाब: ऐसे कोई बंधे हुये ब्लॉग नहीं हैं।

सवाल: कुछ पसंदीदा ब्लाग जो अभी अचानक याद रहे हैं?

जबाब: हथकढ़, बिखरे मोती, घुमंतू। और भी बहुत हैं- ऐसे अचानक नाम याद नहीं आते।
सवाल: ब्लागिंग की सबसे अच्छी चीज क्या लगती है?
जबाब: मौलिक अभिव्यक्ति, बिना बनावट के, सहज भाषा।
सवाल: सबसे खराब?
जबाब: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर उसका दुरुपयोग।
सवाल: अपने लेखन की सबसे अच्छी बात क्या लगती है?
जबाब: कुछ भी नहीं। मुझे आज भी कुछ लिखती हूं तो पहली बार में कभी अच्छा नहीं लगता।
सवाल: वाह! अपना सब खराब लेखन हम लोगों को पढ़वाती रहती हैं? दूसरी बार पढ़ने में अच्छा लगता है?
जबाब: हा हा हा। फ़िर लगता कि इतना भी बुरा नहीं!
सवाल: लोगों की तारीफ़ से गलतफ़हमी हो जाती है?
जबाब: जी नहीं ऐसी बात नहीं। तारीफ़ में फ़र्क करना आता है मुझे। फ़िर आप जैसे लोग इतनी भी झूठी तारीफ़ नहीं करेंगे।
सवाल: हम तो खिंचाई करते रहते हैं खासकर कविताओं की!
जबाब: चलिये यही सही! खींच-खींचकर ही अच्छी हो जायेंगी!
सवाल: बहुत लोगों की तारीफ़ के बीच खिचाई वाली टिप्पणी कैसी लगती है ?
जबाब: खाने में थोड़ी मिर्ची सी! स्वाद बढ़ जाता है।
सवाल: आपकी टिप्पणियों के साइज हमेशा छोटा परिवार सुखी परिवार टाइप रहते हैं! कभी -कभी रस्मी टाइप की! सही में ऐसा है कि मुझे ही लगता है?
जबाब: देखिये रस्मी टाइप की टिप्पणियां जो करते हैं वो उनका स्वभाव हो सकता है। बाकी छोटी टिप्पणियों में मुझे कोई बुराई नहीं लगती।
सवाल:गागर में सागर टाइप होती हैं आपकी टिप्पणियां ?
जबाब: हां कह सकते हैं। जरूरी नहीं कि किसी चीज को आधे पेज का लिखा जाये तो ही वह अर्थपूर्ण हो।
मेरा स्वभाव वैसे भी टु द प्वाइंट लिखने वाला है। इसलिये पोस्ट पढ़कर जो मुझे लगता है कम शब्दों में कह देती हूं।
सवाल: मतलब अपने काम से काम रखने वाली टिप्पणियां?
जबाब: नहीं मेरा स्वभाव वैसे भी टु द प्वाइंट लिखने वाला है। इसलिये पोस्ट पढ़कर जो मुझे लगता है कम शब्दों में कह देती हूं।
सवाल: आपके पापा वाली पोस्ट मुझे याद आ रही है बहुत आत्मीय पोस्ट थी! अपने पापा के व्यतित्व के किस पहलू के नजदीक अपने को पाती हैं?
जबाब: पाजिटिव , टु द प्वाइंट थिंकिग मुझे शायद उनसे ही मिली है।
सवाल: जहां तक मुझे याद है कि पापा के बारे में आपने लिखते हुये लिखा था कि वे बेहद स्वाभिमानी थे! ये ऊंची नाक वाला स्वभाव के पीछे का कारण भी यही है!
जबाब: हां शायद!
सवाल: कभी -कभी इसे अकड़ भी समझा जा सकता है!
जबाब: बिल्कुल समझा जा सकता है। किसी की समझ पर कोई पहरा नहीं है पर मेरा मानना है कि जो मुझे जानते हैं वो मुझे समझते हैं। और जो मुझे जाने बिना मेरे बारे में राय बनाते हैं उनसे मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। वे जो चाहें सोचने के लिये स्वतंत्र हैं।

जो मुझे जानते हैं वो मुझे समझते हैं। और जो मुझे जाने बिना मेरे बारे में राय बनाते हैं उनसे मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता।
सवाल: मतलब आपके बारे में सही समझ न रखने वालों के लिये मामला ’हू केयर्स’ टाइप का है आपकी तरफ़ से?
जबाब: जी! बिल्कुल।
सवाल: किताब में फ़ाइनल डिग्री पाने का किस्सा बताया आपने उसमें अपनी मेहनत पर भरोसा करने वाली लेखिका टीचर को उपहार देने को तैयार हो जाती है। यह क्या विरोधाभास नहीं है व्यक्तित्व का ?
जबाब: जी बिल्कुल नहीं! वो मेहनत के बिना फ़ल पाने का तरीका नहीं था। बल्कि अपनी मेहनत का हक लेना था।
सवाल:उपहार देकर?
जबाब: अगर आप जो ’डिजर्व’ करते हैं उसे देने की शर्त वही है तो वह भी सही। वैसे वो एक अपरिपक्व उमर का रिएकशन था।
सवाल: ये तो बड़ा परिपक्व जबाब हो गया भाई! वैसे आप अपने जीवन से कितना सम्तुष्ट हैं?
जबाब: जितना एक इंसान हो सकता। भगवान का दिया सब कुछ है जिसपर कोई भी रंज कर सकता है।
सवाल: इन्सान तो असंतुष्ट ही रहते हैं ज्यादातर! ये नहीं वो नहीं ये नहीं कर पाये वो नहीं कर पाये, अपनी काबिलियत के हिसाब से काम नहीं मिला, योग्यता का उपयोग नहीं हुआ! आपके साथ भी ऐसा है ?
जबाब: यानी बहुत निकले मेरे अरमान फ़िर भी कम निकले!  ये तो हमेशा सबके ही साथ होता होगा। शुरु-शुरु में जब जॉब छोड़ी थी तब कभी-कभी लगता था लेकिन अब लगता है कि जिस काम के लिये जॉब छोड़ी थी वो भी महत्वपूर्ण है।

सवाल: अच्छा ये बताओ वर्तनी की इत्ती गलतियां क्यों करती हैं आप?

जबाब: उसके बहुत से कारण हैं। सबसे पहला कि बहुत जल्दबाज हूं। जल्दी-जल्दी लिख जाती हूं फ़िर उसके बाद जल्दी-जल्दी पढ़ भी जाती हूं तो नजर से बच जाती हैं अशुद्धियां। दूसरा टाइपिंग मिस्टेक होती हैं। मुझे अभी हिंदी टाइपिंग नहीं आती।

सवाल: कैसे करती हैं टाइपिग?

जबाब: गूगल टूल से । रोमन से हिंदी 
मैं किसी आदर्श में विश्वास कम रखती हूं। किसी के जैसा होना मुझे पसंद नहीं।
सवाल: जिन्दगी के कोई अरमान जो पूरे होने बाकी हों?
जबाब: अब तो बस बच्चे अच्छे काबिल निकल जायें :)
सवाल: किताब छपने पर कैसा लगा?
जबाब:कैसा लगना चाहिये?
सवाल: आप बताओ जी। लेखक हैं आप।
जबाब: जाहिर है अच्छा ही लगा।

सवाल: खाने में क्या पसंद है?

जबाब: चाट, गोलगप्पे।
सवाल: पहनने में ड्रेस क्या पसंदीदा है?
जबाब: वेस्टर्न में इवनिंग ड्रेसेस और भारतीय पहनावे में साड़ी। पर ज्यादातर जींस पहनती हूं।

सवाल: फ़ेवरिट फ़िल्म?

जबाब: अभी हाल में कहानी और पान सिंह तोमर अच्छी लगी। पहली में कभी-कभी बहुत पसन्द थी। थ्री इडियेट भी अच्छी लगी।
सवाल: फ़ेवरिट गाना।
जबाब: जगजीत सिंह का गीत- होंठो से छू लो तुम।
सवाल: गाती हैं कभी?
जबाब: नहीं।

सवाल: गुनगुनाती तो होंगी- कौन सा गुनगुनाती हैं?

जबाब: सभी। जो भी मन में आ जाये। पर न सुर है न ताल न आवाज- हा हा हा!
सवाल: सही है! हीरो/हीरोइन कौन पसंद हैं?
जबाब: कोई नहीं! मतलब जो फ़िल्म अच्छी लगे उसमें जो हो वही पसन्द हो जाती है।

सवाल: अच्छा! नेताओ प्रसिद्ध व्यक्तियों में आदर्श कौन हैं?

जबाब: बाप रे! नेता भी आदर्श हो सकते हैं? मैं किसी आदर्श में विश्वास कम रखती हूं। किसी के जैसा होना मुझे पसंद नहीं।

सवाल: आपके पति आपका ब्लॉग पढ़ते हैं?

जबाब: नहीं! कभी-कभी कोई लेख ही पढ़ते हैं जो मैं जबरदस्ती पढ़ने को कहूं।

सवाल: बड़े समझदार हैं! ब्लागर साथियों के लिये कुछ कहना चाहेंगी ? संदेश टाइप?

जबाब: हम किसी को कहने वाले कौन होते हैं? सब समझदार हैं यहां! :)
सवाल: नये ब्लॉगरों के लिये कुछ सुझाव?
जबाब: नई पीढ़ी तो और ज्यादा समझदार है। :)

सवाल: आप बहुत समझदार हैं जी! गोलमोल जबाब देने में उस्ताद!

जबाब: जी नहीं एकदम सीधे जबाब दिये हैं। आपको सीधे जबाब भी टेढ़ा लगे तो हम क्या करें- हा हा हा।
अब यह आप ही तय कीजिये कि शिखाजी जबाब कैसे हैं सीधे या गोल-मोल।
शिखाजी को एक बार फ़िर से जन्मदिन की मंगलकामनायें।

32 responses to “किसी के जैसा होना मुझे पसंद नहीं- शिखा वार्ष्णेय”

  1. संतोष त्रिवेदी
    शिखा जी से लखनऊ में और फुरसतिया पर मिलना अच्छा लगा !
    .
    .
    .जन्मदिन की अशेष शुभकामनाएं :-)
  2. विवेक रस्तोगी
    आपके सवाल ज्यादा लंबे थे और शिखाजी के जबाब थोड़े शब्दों में.. पर हाँ कुछ चीजें अपने काम की निकल आईं, लेखन की विधा के लिये.. बड़े फ़ुरसतिया हो जी आप.. तभी इतना समय दे पाये.. वरना तो हम भी कभी बहुत फ़ुरसतिया थे.. ;-)
    विवेक रस्तोगी की हालिया प्रविष्टी..आज के अखबार से .. गुजरात सुरक्षित और हमें अब “श्री” न कहो..
  3. amit srivastava
    किसी के जैसी हैं भी नहीं | इंटरव्यू लेने वाला अत्यंत चतुर प्रतीत हो रहा है | अपने मन वांछित उत्तर की प्रत्याशा में सारे प्रश्न पूछे गए हैं परन्तु उत्तर देने वाला भी कम चतुर न निकला |
    उनकी और उनके ब्लॉग की नाक यूं ही लम्बी बनी रही , ऐसी शुभकामना है ,उनके जन्म दिन पर |
    amit srivastava की हालिया प्रविष्टी.." कल हो न हो……….."
  4. ashish rai
    अच्छा रहा ये वार्तालाप . आपके चुभते चौपदे जैसे सवाल और शिखा जी का गागर में सागर जैसे जबाब . एकदम फुरसतिया टाइप .
  5. देवेन्द्र पाण्डेय
    कभी-कभी आप बड़ा अच्छा काम करते हैं। उनसे हुई बात चीत को मौके पर यहाँ छाप कर उनके बारे में जानने का और जन्म दिन की बधाई देने का अवसर प्रदान किया..आभार।
    बातचीत के बारे में ऐसा है कि आपने लाख प्रयास किया पर उन्होने काफी चतुराई से उत्तर दिया। आप मन टटोलने वाले पत्रकार और वे कुशल वक्ता साबित हुईं। :)
  6. केवल राम
    लाजबाब तोहफा …. हम सबके लिए ….आप सबको शुभकामनाएं …!
    केवल राम की हालिया प्रविष्टी..हो तुम
  7. ajit gupta
    आपकी मेहनत को सलाम।
    ajit gupta की हालिया प्रविष्टी..हे भगवान! मुझे दुनिया का सबकुछ दे दो
  8. प्रवीण पाण्डेय
    सब अपने जैसा ही बने रहें, शिखाजी को जन्मदिन को बहुत बहुत बधाइयाँ।
    प्रवीण पाण्डेय की हालिया प्रविष्टी..टिप्पणियाँ भी साहित्य हैं
  9. Alpana
    मेरी जानकारी में ब्लोगर्स का साक्षात्कार कुश ने शुरू किया था फिर ताऊ रामपुरिया जी ने जारी रखा था.
    आप के कुशल साक्षात्कार के द्वारा शिखा जी को जानने का मौका मिला.
    आभार .
    Alpana की हालिया प्रविष्टी..बरसे मेघ…अहा!
  10. Shivam Misra
    शिखा जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
    आपका गिफ्ट लाजवाब लगा … जय हो !
    सादर !
    Shivam Misra की हालिया प्रविष्टी..क्या सच मे किसी को फर्क पड़ता है !!??
  11. lalitya lalit
    AAP KE BAARE ME PAD KAR SUKHAD ANUBHAV HUA,BADHAI.
    आप के बारे में पद कर सुखद अनुभव हुआ.
  12. ranju
    बहुत बढ़िया लगे सवाल जवाब ..शिखा जी को जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई
    ranju की हालिया प्रविष्टी..टीस
  13. sangeeta swarup
    बढ़िया रहा साक्षात्कार ….. टू द पॉइंट जवाब …
  14. aradhana
    आपने तो अच्छा-ख़ासा इंटरव्यू ले डाला शिखा जी का. उन्होंने भी बहुत अच्छे जवाब दिए. एकदम सीधे-सादे, बिना शब्दजाल के झेमेले के. कुछ सवालों के जवाब उन्होंने गोलमोल ज़रूर कर दिए- आप ऐसे ही जवाब डिज़र्व करते हैं ;)
    मुझे पर्सनली शिखा जी पाजिटिव एनर्जी से भरपूर इंसान लगती हैं. उनकी भाषा भे एकदम सीधी-सादी होती है. यहाँ उनसे मिलकर अच्छा लगा.
    aradhana की हालिया प्रविष्टी..Musicians Find a Home on WordPress.com
  15. Aryaman Chetas Pandey
    अरे वाह! इंटरव्यू अच्छा है..लेकिन हमें तो पहले से ही पता है :P
    Happy b’day di.. :)
    Aryaman Chetas Pandey की हालिया प्रविष्टी..तासीर.. ! ?
  16. upendra nath
    is hajir jababi kya khoob kahne..janmdin mubarak ho.
  17. mukesh sinha
    किसी ने कहा क्या कवियत्री भी खुबसूरत होती है… मैंने शिखा की फोटो दिखा दी………:):डी
    फिर किसी ने कहा, क्या लेखिका दिमाग वाली होती है, फिर से मुझे शिखा याद आ गयी…:D
    mukesh sinha की हालिया प्रविष्टी..डी.टी.सी. के बस की सवारी
  18. arvind mishra
    शिखा जी को एक और बधाई यहाँ भी दे देते हैं …
    अब यह इंटरव्यू आपने जितना लंबा खीचना चाहा शिखा जी ने उतना ही शार्ट में निपटा दिया ..
    लगता तो यह है कि उन्हें आपका इंटरव्यू लेना चाहिए था ….ये कुछ उल्टा पुल्टा हो गया …
    गध्य को गद्य कर लें क्योकि सही शब्द गद्य है! अब एकाध मात्रात्मक गलतियां इस इंटरव्यू में लाजिमी भी था :-)
    arvind mishra की हालिया प्रविष्टी..वे उधार लेने वाले :-(
  19. shikha varshney
    वाह ..एकदम फुरसतिया टाइप का तोहफा रहा ..बहुत शुक्रिया आपका अनूप जी :)
    और आप सभी का शुभकामनाओं के लिए तहे दिल से आभार.
  20. संगीता पुरी
    अच्‍छी लगी शिखा जी की आपसे बात चीत ..
    शिखा जी को जन्‍म दिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं !!
    संगीता पुरी की हालिया प्रविष्टी..क्‍या करें क्‍या न करें 20 और 21 दिसंबर 2012 को ??(लग्‍न राशिफल)
  21. सलिल वर्मा
    चुनाव जीतने के बाद मोदी जी/वीरभद्र जी से भी इस अन्दाज़ में इंटरव्यू नहीं लिया गया होगा जैसा आपने लिया.. मुझे इनसे बात करने का अवसर सिर्फ एक बार ही मिला और संयोग से फोन इन्होंने ही किया था. ये आवाज़ नयी थी, मगर आत्मीय. शायद यही इनकी सबसे बड़ी विशेषता है. मुझसे बड़ी इनकी फैन मेरी बेटी है और शायद पूरे ब्लॉग जगत में मेरी बेटी किसी को पहचानती है तो वो शिखा जी ही हैं (सतीश सक्सेना जी को भी मेरी बिटिया याद कर लेती है)…
    एक वाक्य का अर्थ मेरी समझ में नहीं आया.. स्पष्टीकरण चाहूँगा..
    /
    “भगवान का दिया सब कुछ है जिसपर कोई भी रंज कर सकता है।”
    /
    अंत में मेरी ओर से भी शुभकामनाएँ, जन्म दिन की और आपको इस शानदार इंटरव्यू की!!
    सलिल वर्मा की हालिया प्रविष्टी..(कु)सभ्यता
    1. shikha varshney
      सलिल जी ! कृपया रंज को रश्क पढ़ें .सुबह मेरी भी नजर पढ़ी थी मैंने अनूप जी को मेसेज भी किया पर वह शायद सिस्टम पर आ नहीं पाए सुधारने अभी .
  22. abhi
    एकदम मस्त टाईप इंटरव्यू रहा….. :) :)
    abhi की हालिया प्रविष्टी..गुम हुई मेरी एक डायरी
  23. anu
    बढ़िया वार्तालाप…….
    प्रश्न करने वाले और जवाब देने वाले दोनों बड़े सयाने हैं :-)
    ढेर सारी शुभकामनाएँ शिखा को..
    अनूप जी आपने शिखा की आवाज़ का ज़िक्र नहीं किया जो बिलकुल बच्चों की तरह है….ज्यादा से ज्यादा टीनएजर लड़की जैसी :-)
    शुक्रिया..
    अनु
    anu की हालिया प्रविष्टी..एक सीली रात के बाद की सुबह……
  24. GGShaikh
    जन्म-दिन पर साक्षात्कार ! nice concept !
    बड़े ही straight forward और to the points
    से जवाब रहे शिखा जी के, जैसा कि उन्हों ने
    कहा अपने बारे में। और वे काफी democratic
    भी है …अपने काम से काम …एक तरह की
    सादगी भी हे उनमें जो पारदर्शी और टची है …
    बहुत आश्वस्त है वे अपने जीवन में …आज जैसी
    देखी जाए वैसी हिंसक महत्वाकांक्षा उन में नहीं …
    इन सारी बातों के अलावा उनका लेखन बिलकुल
    भी फ्लेट नहीं। सौंदर्य, गहराई और अपने समय की
    पहचान लिए होता है उनका लेखन जो पठनीय
    भी होता है।
    उन्हें जन्म-दिन की तहे दिल से बधाई और
    शुभकामनाएं …
    अनूप जी आपका भी धन्यवाद इस साक्षात्कार के
    लिए और इतने तुलनात्मक रूप से अच्छे प्रश्न तैयार
    करने के लिए भी।
  25. Himanshu
    देर से देख रहे हैं, फिर भी जन्मदिन की शिखा जी को बधाई!
    और सच में, जन्मदिन पर साक्षात्कार का आइडिया बढ़िया है।
    आप तो पूछने और घेर लेने के उस्ताद हैं। अगर शिखा जी आप से निकल गयीं तो…वाह!
  26. anju(anu)
    जानदार प्रस्तुति
  27. upendra nath
    aapki hajir jababi ke kahne…. Bahut khoob.
    upendra nath की हालिया प्रविष्टी..लेफ्टिनेंट सौरभ कालिया के लिए चंद पंक्तियाँ
  28. सतीश चन्द्र सत्यार्थी
    वाह.. ये तो बड़ा धाँसू इंटरव्यू रहा.. मजेदार..
    सतीश चन्द्र सत्यार्थी की हालिया प्रविष्टी..हाथी और जंजीरें
  29. : फ़ुरसतिया-पुराने लेख
    [...] [...]
  30. shefali
    बताओ …इत्ता समय निकल गया ..इस पोस्ट को देखा नहीं ….शिखा मेरी पोस्ट को पढ़ती है ….बहुत अच्छा लगा …मुझे शिखा बहुत पसंद है ..उससे दो बार मुलाक़ात का अवसर मिला है …वह बहुत ही प्यारी इंसान है ….
    shefali की हालिया प्रविष्टी..आओ गुडलक निकालें …….
  31. Yashwant Yash
    आदरणीया शिखा जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ!
    साक्षात्कार बहुत ही अच्छा और रोचक है।
    सादर

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