Tuesday, March 26, 2013

देवलोक में फ़ेसबुक

http://web.archive.org/web/20140404042305/http://hindini.com/fursatiya/archives/4127

देवलोक में फ़ेसबुक

इस बार संजय बेंगानी ने फ़िर हमसे होली के मौके पर लेख मांगा। हमने पुराने लेखों में से कोई देने की पेशकश की तो वे नाराज हो गये -बोले, क्या हमको किसी नेशनल डेली का संपादक समझ रखा है जो बासी माल अपने अखबार में छाप लेते हैं और उसको अपने फ़ेसबुक पर लगाकर आप मगन होते हो? हमें कोई नया लेख चाहिये। हमें अपनी होलीजीन में छापना है। उसके संपादक हम खुद हैं। इसलिये क्वालिटी लेख चाहिये- कूड़ा नहीं।
हमने सोचा कि जब कूड़ा नहीं चाहिये तो फ़िर हमसे क्यों मांग रहे हैं लेकिन फ़िर याद आया कि अभी संजय बेंगाणी संपादक के रोल में हैं। संपादक जो छापता है उसे उत्कृष्ट और बाकी को कूड़ा समझता है। पहले तो हमने सोचा कि मना कर दें कि भाई उत्कृष्ट लेखन अपन के बस की बात नहीं लेकिन फ़िर उनकी तमाम भावी प्रधानंमंत्रियों में से एक की नजदीकी का लिहाज करके रुक गये। फ़िर हमने कहा समय दो कुछ नया लिखने का तो उन्होंने कहा-ठीक है एकाध घंटे का टाइम दे देते हैं। उत्ती देर में टाइप करके भेजो। और टाइम देने से मना कर दिया।
अब संजय बेंगाणी खाली संपादक होते तो उनको मना किया जा सकता था लेकिन वे ब्लॉगिंग में चिरकुटों के अलम्बरदार भी हैं जिनका कि कहना है-फिकर नॉट, ब्लॉगिंग पर कब्जा रहेगा चिरकुटों का!
अब बताइये ऐसे को कैसे मना किया जाये सो उसके बाद मजबूरी में सब काम छोड़कर जो लिखा वह उन्होंने अपनी होलीजीन में छाप दिया। आज होलीजीन सब जगह अवतरित भी हो गयी। आप भी http://www.chhavi.in/holizine/ यहां जाकर पढिये चाहे आनलाइन चाहे डाउनलोड करके। हमारा जो लेख छापा संपादक साहब ने वह वहां जाकर पढिये क्योंकि वहां उन्होंने हमारी इस्मार्ट फ़ोटू भी लगायी है। अगर वहां जाने का मन न करे तो यहीं बांच लीजिये। शीर्षक है- देवलोक में फ़ेसबुक!

देवलोक में फ़ेसबुक

देवलोक में आजकल फ़ेसबुक की चर्चा है।
इस बार मृत्युलोक भ्रमण से लौटकर नारद जी देवलोक पहुंचे तो फ़ेसबुक की जानकारी दी। पुराने दोस्तों को खोजने में फ़ेसबुक की उपयोगिता। फ़टाफ़ट स्टेटस बनाने की क्षमता। फोटो, आवाज, वीडियो सटाने की उपयोगिता के बारे में प्रफ़ुल्लमन जानकारी दी तो सबसे साधु-साधु कहकर नारद जी की तारीफ़ की। नये देवताओं के मन फ़ेसबुक खाते बनाने के लिये मचल उठे। देवियां भी फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल बनाने के लिये पोज देकर फोटो खिंचवाने लगीं। सबसे ज्यादा खुशी मेनका, रंभा, उर्वशी आदि अप्सराओं को हुई। वे सोचने लगी चिरयुवा देवताओं की सेवा और बुढऊ श्रृषियों की तपस्या भंग करने में सौंदर्य बरबाद हुआ अब तक। इस बहाने कम से कम नये प्रशंसक मिलेंगे। नये देवी/देवता सोचने लगे कि उनके भी फ़ालोवर बढ़ें तो शायद उनके नाम के भी मंदिर-संदिर बनें। पहचान के संकट से जूझते देवगण फ़ेसबुक खाते खुलने की कल्पना से किलकने लगे। देवियां और प्रमुदित हो गयीं।
देवलोक में फ़ेसबुक की सुविधा शुरु करने पर निर्णय लेने हेतु आम सभा बुलायी गयी। धरती की तरह ही वहां भी प्रमुख बड़े पदों पर बूढे देवताओं का ही कब्जा था। वे सब फ़ेसबुक के खिलाफ़ थे। उनको लग रहा था कि फ़ेसबुक खाता खुलते ही उनको सर्वसुलभ हो जाना पड़ेगा। कोई भी भक्त उनका मित्र बन जायेगा। कोई भी पोक करके चला जायेगा। अभी तो भक्तों को झांसा देकर बच जाते हैं उनकी पुकार उनतक पहुंची नहीं इसलिये उनका कल्याण नहीं हुआ लेकिन जब भक्त फ़ेसबुक पर उनके खाते में खुलेआम अपनी वेदना पोस्ट करेगा तो कैसे उसको नकारेंगे।
नये देवताओं का मानना था कि एकबार जब हम देवता बने हैं तो देवतागिरी भी फ़ुल ईमानदारी से करनी चाहिये। जो भक्त बुलाये उसके कल्याण के लिये जाना चाहिये। दुष्टों का संहार करना चाहिये। धर्म की स्थापना करनी चाहिये। उनका यह भी मानना था कि फ़ेसबुक खाता खुलने से भक्त से सीधा संवाद हो सकेगा। चढ़ावा जो आता है वो सीधा हम तक पहुंचेगा। अभी तो सब पुजारी मार जाते हैं। सुना है अरबों-खरबों का चढ़ावा चढ़ता है, दूध वस्त्र फ़ल मेवा मिष्टान। लेकिन यहां तक केवल किस्से पहुंचते हैं। विष्णुजी तक युगों से एक ही पीताम्बर धारण किये हैं, शिव जी वही बाघांबर पहने हैं, सरस्वती, लक्ष्मी जी अपनी साड़ियां तक नहीं बदल पायी हैं। फ़ेसबुक से जुड़ेंगे तो भक्तों से सीधा संवाद हो सकेगा। उनके स्टेटस से पता चलता रहेगा कि कित्ते का प्रसाद चढ़ाया उन्होंने मंदिर में। हिसाब जमेगा तो चढ़ावे की सीधे अपने खाते में ट्रांसफ़र की सुविधा हासिल की जायेगी जैसी भारत सरकार गरीबों के लिये करने जा रही है।
भक्त के चढ़ावे की सीधी जानकारी से फ़ेसबुक की खिलाफ़त करने वाले सीनियर देवता भी उत्सुक हो गये कि कैसे फ़ेसबुक से यह पता चलेगा कि किसने कित्ता चढ़ावा दिया है मंदिर में। इस पर एक नये देवता ने ,जो कि देवता बनने के पहले साफ़्टवेयर इंजीनियर था, ने जानकारी दी कि मृत्युलोक में अपने किये का गाना गाने का चलन देवलोक की ही तरह है। जैसे देवता लोग भक्त पर एक एहसान करने युगों-युगों तक उससे प्रसाद वसूलते रहते हैं वैसे ही धरती पर भी लोग नेकी कर फ़ेसबुक पर डाल पंरंपरा का पालन करते हैं। इधर प्रसाद चढ़ायेंगे उधर फ़ेसबुक पर गायेंगे- आज बीस आने का प्रसाद चढ़ाया। अब तो बजरंगबली काम कर ही देंगे। भक्तों के चढ़ावे के स्टेटस से देवी/देवता लोग अपने-अपने हिस्से का हिसाब कर लेंगे।
देवलोक के लोग यह सोचकर खुश हुये कि उनको इससे फ़र्जी भक्तों से छुटकारा मिलेगा। सबसे ज्यादा पार्वती जी खुश हुईं कि इससे कम से कम शंकरजी की मेहनत तो कम होगी। अब तक ऐसा होता आया कि जिसने भी देवलोक की तरफ़ मुंह करके कुछ भी प्रार्थना की उसे शंकरजी अपना भक्त समझकर उसका कल्य़ाण कर देते हैं। बाद में पता चलता है कि वो तो किसी और देवता का भक्त है। न जाने कित्ता नुकसान होता है इससे उनका। अब कल्याण करने के बाद शिवजी से यह तो होता नहीं कि दूसरे देवताओं से हिसाब करें बैठ के कि उनके भक्त के कल्याण ये खर्चा आया। एकध बार किसी देवता से जिकर किया भी तो वह हें हें हें करते हुये कहने लगा- प्रभो मैं भी तो आपका ही भक्त हूं। हमारा भक्त भी आपका ही भक्त तो ठहरा। शिवजी बेचारे गरल की तरह नुकसान भी धारण कर गये। कुछ देवता इस बात से खुन्नस खाते हैं शिवजी दूसरे देवताओं के भक्तों का भी भला करके यह संदेश देना चाहते है कि भला करना सिर्फ़ शंकर जी के ही बूते की बात है।
देवलोक में सभी एकमत से फ़ेसबुक की स्थापना से सहमत हो गये लेकिन तभी एक काइयां देवता ने सवाल किया कि इस फ़ेसबुक की कुछ खराबियां भी होंगी। जरा उनके बारे में भी चर्चा हो जाये। इस पर लोगों ने उसको घूरते हुये चुप हो जाने का इशारा किया लेकिन तब तक सवाल चर्चा में आ गया था सो कमियां भी पता की गयीं। देवताओं को पता चला कि:
फ़ेसबुक में खाता खुलने पर लोग सीता और रावण को एक साथ टैग करेंगे, मेनका और रंभा को सरस्वती और लक्ष्मी से ज्यादा लाइक किया जायेगा। कुबेर के आगे शंकर जी को कोई पूछेगा नहीं। माता पार्वती को कोई लंपट सेक्सी और क्यूट बतलायेगा। देवता किसी महिला के फ़ेसबुक स्टेटस पर दयालु होकर उस स्टेटस धारिणी को पुत्रवती बना देंगे लेकिन उधर से साठ साला जवान के मां बनने की खबर आयेगी। इसी तरह की अनगिन समस्याओं से जूझना पड़ेगा। देवलोक की गोपनीयता भंग होगी। देवलोक में फ़ेसबुक की शुरुआत सूचना का अधिकार लागू करने से भी आत्मघाती होगी। देवताओं को भारत में चुनाव की बाद की जनता की तरह कोई पूछेगा तक नहीं।
फ़ेसबुक के इतने सारे पंगे सुनकर देवताओं के चेहरे चुनाव में हारे बुजुर्ग नेता के चेहरे की झुर्रियों सरीखे लटक गये हैं। फ़ेसबुक पर तुरंत अमल का प्रस्ताव फ़िलहाल स्थगित हो गया है। युवा देवताओं को देवलोक से मृत्युलोक भेजा गया कि वे वहां जाकर अपना फ़ेसबुक खाता बनायें और फ़ेसबुक के बारे में अपने अनुभव बतायें ताकि इस बारे में अंतिम निर्णय लिया जा सके।
देवलोक टाइम्स की यह खबर मैं पढ़ ही रहा था कि अभी-अभी हमारे फ़ेसबुक खाते में किसी देवता का मित्रता अनुरोध आया है। क्या आपके यहां भी आया है? देखिये जरा।

23 responses to “देवलोक में फ़ेसबुक”

  1. shikha varshney
    उनको लग रहा था कि फ़ेसबुक खाता खुलते ही उनको सर्वसुलभ हो जाना पड़ेगा। कोई भी भक्त उनका मित्र बन जायेगा। कोई भी पोक करके चला जायेगा
    हा हा हा …जबरदस्त. आखिर देवलोक भी कैसे बचे इस जंजाल से.
    हमारे पास अभी तक किसी देवता की फ्रेंड रिक्वेस्ट नहीं आई है, आएगी तो आपको बताएँगे आखिर उनकी भी चर्चा तो आप ही करेंगे न :).
  2. Swapna Manjusha
    होली में चिरकुटई के
    रंगों की बौछार है
    एक चिरकुटों के अलम्बरदार
    दूजे चिरकुटई सरदार हैं
    देवताओं की मजाल क्या
    जो फेसबुक बनायेंगे
    जब हर फेस को बुक किये
    रँगे हुए सियार हैं :):)
  3. देवांशु निगम
    ये हुई ना बात , आप इस आईडिया को इम्प्लीमेंट का आर्डर दे दीजिये , हमारी कई सारी रिक्वेस्ट भगवान जी के यहाँ क्यू में पडी हैं , उसका स्टेटस भी पता करना है !!!!!
    देवांशु निगम की हालिया प्रविष्टी..पं. पोंगादीन लप्पाचार्य से विस्फोटक बातचीत
  4. Dr. Monica Sharrma
    रोचक रहा देवलोक का फेसबुकिया किस्सा …..
  5. भारतीय नागरिक
    और फिर किसे किसे ब्लाक करना पड़ेगा… :)
    भारतीय नागरिक की हालिया प्रविष्टी..पड़ोसी के यहाँ आग लगे, हमें क्या!
  6. ashish rai
    बड़ा चौचक है ये किस्सा गोई , देवलोक से इंद्रा की सभा का विडिओ भी लगेगा . राम कसम बड़ा मज़ा आएगा .
  7. धीरेन्द्र पाण्डेय
    ये नही बतलाया कि इन्टरनेट किस कम्पनी का होगा ? और अगर किसी नि ब्लाक या अन्फ्रेंड कर दिया तो देवता का करिहें ?
  8. arvind mishra
    नारद की भूमिका को विधिवत चरितार्थ कर रहे हैं महराज -ईहाँ की बात उहाँ ले गए :-)
    लिखा जोरदार है व्यंग लेखक के रूप में अब आपकी पहचान बननी शुरू हुयी है -मोबाईल थरथराने लगे हैं :-)
    arvind mishra की हालिया प्रविष्टी..क्या खाली पीली होली ?
  9. Yashwant Mathur
    होली का पर्व आपको सपरिवार शुभ और मंगलमय हो!
    ————————————-

    कल दिनांक28/03/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!
  10. संजय बेंगाणी
    दीपावली के बाद देवता गण देव-दीवाली तक सो जाया करते थे. अब फैसबुक पर लीन रहते है. जिसे विश्वास न हो हमारी बला से देवलोक होकर (इसे स्वर्गवासी होना भी कहते है) देख ले.
    संजय बेंगाणी की हालिया प्रविष्टी..न्याय की जीत या भय की जीत?
  11. Vibha Rani Shrivastava
    देवलोक टाइम्स की यह खबर मैं पढ़ ही रहा था कि अभी-अभी हमारे फ़ेसबुक खाते में किसी देवता का मित्रता अनुरोध आया है। क्या आपके यहां भी आया है? देखिये जरा।
    :)
  12. हेमा दीक्षित
    होली पर जबरदस्त फेसबुकिया कथा-प्रसंग है इस चुटपुटिया को पढ़ कर होली सार्थक हुई … :)
  13. kavita rawat
    जैसे मोबलिया हिट वैसे फेसबुकिया भी हिट ..
    देवलोक में फ़ेसबुक पर गंभीर, रोचक प्रस्तुति पढना बहुत अच्छा लगा …होली की शुभकामनायें
  14. सुमन्त मिश्रा,कानपुर
    प्रभु देवलोक/स्वर्ग लोक से लौटे कब? अभी-अभी ट्वीटरी नाम्नी अप्सरा का ट्वीट. मिला वो आपके लिए विरह व्याकुल है………
  15. दिनेशराय द्विवेदी
    नारद जी ने देवताओं को इंटरनेट मं घुसपैठ के लिए उकसाया है। तभी दुनिया भर का इंटरनेट एक्सप्रेस से पैसेंजर हो चला है।
  16. सुरेश साहनी,कानपुर
    और इस तरह देवलोक का विशद वर्णन सम्पन्न हुआ ।आगे की कथा अगले दिन ।ओम फेसबुकाय नमः ,ट्वीटराय नमः ,अंतरजालाय नमः ।।
    सुरेश साहनी,कानपुर की हालिया प्रविष्टी..बेहतर है, आप की पत्नी आप से सिर्फ तलाक चाहती है।
  17. अमित तिवारी,कानपुर
    पढ़कर बहुत मज़ा आया । देवलोक की समस्या को सुलझाने का उपाय भी अच्छा सोचा है ।
  18. mahendra gupta
    अच्छा रोचक प्रसंग वर्णित किया आपने.देवता भी समय के साथ आधुनिक होते जा रहें हैं. अच्छी रचना के लिए बधाई व आभार.
  19. प्रवीण पाण्डेय
    सब के सब अपना देवत्व भुलाकर चिरकुटाई पर उतर आयेंगे, भोग लाइक के लगेंगे, वर्षा भी लाइक की होगी।
    प्रवीण पाण्डेय की हालिया प्रविष्टी..युक्तं मधुरं, मुक्तं मधुरं
  20. Ritesh Shrivastava
    बहुत खूब .. बड़ा ही रोच्किया रहा आपकादेवलोक प्रसंग
  21. : फ़ुरसतिया-पुराने लेख
    [...] देवलोक में फ़ेसबुक [...]
  22. Anonymous
    दैव दैव … कैसा हाहाकार मचाया है आपने ….बहुत रोचक , मनोरंजक …. ऐसे ही लिखते रहिये …
  23. shefali
    ऊपर वाला कमेंट मेरा है

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Wednesday, March 20, 2013

सुकून है किसी के कर्जदार नहीं



अरोराजी सन 47 में अपने पिताजी के साथ पाकिस्तान से भारत आये थे। पढ़ाई के साथ अपना काम शुरु किया। सन 91 में आय पचास हजार रुपया प्रतिदिन थी। फ़िर बिजनेस में घाटा हुआ। छह करोड़ चुकाने के लिये तीन मकान, एक गैराज, ट्रक और कई गाड़ियां बेचीं। इनके पिताजी ने कहा था कि अगर लोगों का पैसा नहीं चुकाओगे तो वे आत्महत्या कर लेंगे। पैसा चुकाने के तीन माह के बाद पिताजी 96 साल की उमर में गुजर गये। कभी सौ-सवा सौ लोगों को रोजगार देने वाले अरोरा जी आजकल दूसरों की टैक्सी चलाते हैं। हाल ही में रोहिणी में LIG मकान खरीदा है। पिताजी की बात मानने का अफ़सोस तो नहीं है जब मैंने यह पूछा तो उन्होंने कहा- नहीं, बल्कि सुकून है किसी के कर्जदार नहीं। हिम्मत और पैसा जुटाकर फ़िर से बिजनेस करने का प्लान है। यह फ़ोटो दिल्ली एयरपोर्ट पर। (जैसा अरोरा जी ने बताया)

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