फ़ुरसतिया

हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै

Friday, February 25, 2005

मेरा चमत्कारी अनुभव

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'क्या देह ही है सब कुछ' से शुरु हुई ' अनुगूंज यात्रा'बरास्ते 'भारतीय संस्कृति','आतंकवाद','बिहार' तथ...
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Wednesday, February 23, 2005

हरिशंकर परसाई के लेखन के उद्धरण

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हरिशंकर परसाई मेरे प्रिय लेखक हैं.व्यंग्य लेखन को साहित्य में प्रतिष्ठा दिलाने में परसाई जी का योगदान अमूल्य है.आजादी के बाद के भारतीय समाज...
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Wednesday, January 26, 2005

ये पीला वासन्तिया चांद,

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पिछली पोस्ट लिखते समय लगा कि अगली पोस्ट में तफसील से लिखेंगे.पर सब हवा हो गया .इसीलिये संतजन कहते हैं कि आज का काम कल पर नहीं छोडना चाहिये....
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Wednesday, January 12, 2005

प्रेमगली अति सांकरी

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किसी विषय पर लिखने के पहले उसकी परिभाषा देने का रिवाज है.हम लिखने जा रहे हैं -प्यार पर.कुछ लोग कहते हैं- प्यार एक सुखद अहसास है .पर यह ठीक ...
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Thursday, January 06, 2005

अलबर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है

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ठेलुहा नरेश ठेलुहों के बारे में कहते हैं:- एक ढूढ़ो हजार मिलते हैं, बच के निकलो टकरा के मिलते है. ऐसे ही अतुल टकरा गये एक पागल आदमी ...
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Thursday, December 30, 2004

साल के आखिरी माह का लेखाजोखा

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दक्षिण एशिया के समुद्रतटीय इलाकों में सुनामी (त्सुनामी) लहरों का तांडव हुआ.मृतकों,हताहतों की संख्या बढ़ती जा रही है.जैसा कि हर दुर्घटना के ...
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Saturday, December 18, 2004

भारत एक मीटिंग प्रधान देश है

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भारत एक मीटिंग प्रधान देश है .एक आवाज सहसा उछली. अनुगूंज फैल गयी दिगदिगान्तर में.दस आवाजें सहसा झपट पड़ीं.आप ऐसा कैसे कह सकते हैं? जवाबी आ...
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Tuesday, December 14, 2004

आतंक से मुख्यधारा की राह क्या हो?

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आतंक से मुख्यधारा की राह क्या हो?मतलब भूलभुलैया से राजपथ का रास्ता किधर को होकर जाये?मैं इस निर्णय प्रकिया के बारे में चूंकि कुछ नहीं जा...
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Monday, December 06, 2004

कृपया बांये थूकिये

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मैं स्कूटर पर हङबङाया सा चला जा रहा था .रोज के पन्द्रह-बीस मिनट के बजाय आज मैं करीब एक घन्टा लेट था.पर हङबङी का कारण देरी नहीं वरन् स्पीड थ...
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Sunday, November 28, 2004

मेरा पन्ना मतलब सबका पन्ना

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मैं काफी दिनों से विभिन्न चिट्ठाकारों के चिट्ठों के बारे में लिखने की सोच रहा था. ठेलुहा , हां भाई , रोजनामचा , मेरा पन्ना .पंकज की मोहनी स...
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Thursday, November 25, 2004

आत्मनिर्भरता की ओर

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लिखने के तमाम बहानों का इस बीच खुलासा हो चुका है.एक और कारण श्रीलाल शुक्ल जी ने अपने एक लेख(मैं लिखता हूं इसलिये कि...)में बताया है:- ...
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Thursday, November 18, 2004

कविता का जहाज और उसका कुतुबनुमा

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हम कल से अपराध बोध के शिकार हैं.अलका जी की कविता जहाज पर हमारी टिप्पणी के कारण पंकज भाई जैसा शरीफ इंसान चिट्ठा दर चिट्ठा टहल रहा है.कहीं मा...
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Sunday, November 14, 2004

`भारतीय संस्कृति क्या है

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जबसे पंकज ने पूंछा-भारतीय संस्कृति क्या है तबसे हम जुट गये पढने में.सभ्यता,संस्कृति क्या है .भारतीय संस्कृति और सभ्यता के बारे में जित...
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