फ़ुरसतिया

हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै

Tuesday, May 03, 2016

दीपा से मुलाकात

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दीपा अपने रिजल्ट कार्ड, घड़ी और प्यारी मुस्कान के साथ 30 अप्रैल को वाहन निर्माणी, जबलपुर से विदा हुए। विदाई समारोह हुए। सेक्सन में और स...
Sunday, May 01, 2016

टीटी को पैसा तभी दो जब वह बर्थ अलॉट कर दे

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ट्रेन कठारा रोड पर रुकी है। केवल एक घण्टा लेट है। सामने खेत में गेंहू के गट्ठर पड़े हैं। अकेले पड़े हैं गट्ठर। कोई आदमी नहीं दीखता। अचान...
Saturday, April 30, 2016

हीरोइन लग रही हो

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नयी-नयी फ्राक आई है दीपा की आज सुबह काफी दिन बाद साईकल स्टार्ट हुई। सुबह सात बजे। मेस के बाहर ही देखा एक महिला बगल में कुछ लकड़ियाँ ...
Friday, April 29, 2016

तितली के दिन,फूलों के दिन

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तितली के दिन, फूलों के दिन कल सुबह पैदल टहलते हुए चाय की दुकान तक गए। पुलिया पर कुंडा के मिसिर जी के साथी अकेले बैठे थे। बताया -...
Wednesday, April 27, 2016

नीरज बधवार को अट्टहास सम्मान

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कभी-कभी तकनीक भी आपको चिरकुटई के काम करने से रोकती है। हुआ यह कि आज सुबह पिछले हफ्ते लखनऊ में 'अट्टहास सम्मान समारोह' पर लोग...

शिकायत नहीं करेंगे

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आज भी सुबह उठ गये। रोज की तरह। लेकिन टहलने नहीं गये। कई दिन से यही क्रम चल रहा। एक बार सिलसिला टूट जाता है तो जोड़ना मुश्किल हो जाता है...
Sunday, April 24, 2016

’शिकारी का अधिकार’ की भूमिका

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कल लखनऊ में आरिफ़ा एविस के व्यंग्य संग्रह ’शिकारी का अधिकार’ का विमोचन हुआ। उस किताब की भूमिका अपन ने लिखी थी। बांचियेगा ? लीजिये पेश ह...
Saturday, April 23, 2016

पाठक तक गए बगैर कोई भी लेखन पूरा नहीं होता

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कल लखनऊ में अट्टहास सम्मान समारोह में शुरु हुआ। जाने की इच्छा के बावजूद जा नहीं पाया। वहां जाता तो तमाम लोगों से मिलता और समारोह की लाइव ...
Friday, April 22, 2016

अट्टहास सम्मान

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आज लखनऊ की अट्टहास गोष्ठी में जाना था। जा नहीं पाया। अफ़सोस है। अनूप जी माफ़ करेंगे। 'अट्टहास' हास्य-व्यंग्य पर केंद्रित पत्रिका...
Saturday, April 16, 2016

घोडा घोडा दौड़ा घोडा

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कल हम लखनऊ की एक सड़क पर कार से चले जा रहे थे। हमारे आगे कुछ वाहन थे, बाकी जो बचे वो पीछे थे। अगल-बगल भी इक्का-दुक्का वाहन गम्यमान थे। ...
Tuesday, April 12, 2016

इंसान कहे जाने वाले इंसान बहुत कम मिलते हैं

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सुबह निकले तो बायीं तरफ़ सूरज भाई आसमान से झांक रहे थे। भक्क लाल मुंह। अब कहने को कह सकते हैं कि बायीं तरफ़ से झांकेंगे तो लाल ही दिखे...
Sunday, April 10, 2016

पुराने ख्याल के लोग

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कल सुबह फैक्ट्री जा रहे थे तो पुलिया के पास एक महिला दिखी। सर पर टोकरी रखे दोनों हाथ हिलाती हई अपनी गगरी, मटकी बेचकर लौट रही थी। उसका फो...
Friday, April 08, 2016

ये सब बिल्डिंग हमारे सामने बना

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किर्बी पैलेस चौराहे पर पानी भरते दांत मांजते लोग मुख्य सड़क से सौ कदम अंदर जाते ही झुग्गी-झोपड़ियों का जंगल शुरु हो गया। यह तो रागदर...
Tuesday, April 05, 2016

बहुत दिन बाद दर्शन हुये

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क्रासिंग खुलने का इन्तजार है सुबह साइकिल स्टार्ट करने के पहले देखा कि सड़क पर जाता एक आदमी अपनी दोनों बाहें दोनों तरफ तेजी से फ़ैलाता चल...
Monday, April 04, 2016

लेकिन इन बच्चों के लिये सुबह कब होगी?

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मानो ठेला खुद चला जा रहा हो घड़े लिए आज जब निकले तो काम भर की सुबह हो चुकी थी। सूरज भाई अपनी ड्यूटी संभाल लिये थे। किरणों, रश्मियों ...
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अनूप शुक्ल
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