फ़ुरसतिया

हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै

Monday, May 01, 2017

कट्टा कानपुरी

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ठोंक दिया सरेआम, फिर गुदगुदा दिया अकेले में, बोले-तुम्हारे तो बड़े ऐश हैं, यार इस तबेले में। दुनिया के मजदूरों एक हो, एक साथ शोषण होगा, म...
Tuesday, April 25, 2017

लालबत्ती

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सुना तो बहुत था लेकिन लालबत्ती का जलवा हमने साल भर पहले ही महसूस किया। महसूस क्या ये समझिये कि फ़ील किया। फ़ील इसलिये कि फ़ील में जो फ़ीलिंग...
Friday, April 21, 2017

इस बार ये अंगूठा दिखायेंगे

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नेता माइक पर दहाड़ा -हम विकास करायेंगे। जनता ने समझ लिया, अब ये देश बेच खायेंगे। वो दांत भींचकर बोले, साम्प्रदायिकता मिटायेंगे। पब्लिक द...
Thursday, April 20, 2017

तुमने ये क्या जुल्म किया,क्या सितम किया

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तुमने तो मेरी बात पर पूरा यकीन कर किया, तुमने ये क्या जुल्म किया,क्या सितम किया। हमने तो सिर्फ़ मजाक में तुमको अच्छा कहा, अरे बाप रे! तुम...
Monday, April 17, 2017

चुनाव के बाद ईवीम

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चुनाव के बाद वोटिंग मशीने सुस्ता रहीं थी। आपस में अपने-अपने किस्से सुना रही थीं। लोगों ने कैसे उनका उपयोग किया। कैसे वोट डाला। कैसे दबाया।...
Sunday, April 16, 2017

शेर-वेर के बाद कुछ व्यंग्य-स्यंग्य जम जाय

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आठ बज गये सुबह के, आय गयी है चाय, जगा रहे स्टेटस को, बेटा अब तो उठि जाव। बैठ बिस्तरे पर मजे से, खटर-पटर हुई जाय, लिखें-पढ़ेगे बाद में, त...
Thursday, April 13, 2017

सेल्फ़ी

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फ़ोन से अपन का परिचय कब हुआ याद नहीं आता। लेकिन यह मान लेने में कोई हर्ज नहीं कि ग्राहम बेल के बाद ही हुआ होगा। ग्राहम बेल की बात इसलिये कह...
Tuesday, April 11, 2017

श्रीलाल जी का आखिरी समय जैसा बीता वैसा वे कतई नहीं चाहते थे

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Krishna Bihari   जी की पत्रिका निकट में छपा संस्मरण श्रीलाल शुक्ल जी से मेरा सबसे पहला परिचय ’राग दरबारी’ के जरिये हुआ। लग...
Sunday, April 09, 2017

फिर बिंदास ची ची ची की जाए

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आज सूरज भाई दिखे. शाम होने के बावजूद गरम थे. तैश में दिख रहे थे. पहले तो सोचा बोलें - कहाँ रहे इत्ते दिन दिखे न भाई जी. लेकिन उनके तेवर दे...
Friday, April 07, 2017

जो चीजें जबरियन भुलाई जाती हैं वो और तेज याद आती हैं

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आज सबेरे उठकर बाहर आये तो देखा सूरज भाई आसमान पर जलवा नशींन थे। हमको देखा तो मुस्कराने लगे। बोले -'ठीक है उठने के बाद बायोमेट्रिक अटें...
Thursday, April 06, 2017

धन्धे से धंधा जुड़ा होता है

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आज दो बार गंगापुल पार किये। नरेशा सक्सेना जी की कविता याद करते हुये: पुल पार करने से पुल पार होता है नदी पार नहीं होती नदी पार नहीं ...
Wednesday, April 05, 2017

ये हमारे घर वालों से पूछो

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'अरे औरतों ने छीन लिया कट्टा और अड़ा दिया मैनेजर के। बोली -धाँस देंगे गोली सीने में।' चाय की दुकान पर बैठा आदमी महिलाओं द्वार...
Tuesday, April 04, 2017

नये इलाके की पहली सुबह

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आर्मापुर से कैंट की तरफ़ आये कल। सुबह टहलने निकले। निकलते ही चाय की दुकान मिली। मन किया बैठ जायें बेंच पर। लेकिन आगे बढ गये। अधबने ओवर...
Saturday, April 01, 2017

लखनऊ में व्यंग्य पाठ

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मार्च का महीना सरकारी पैसे के कतल का महीना होता है। जो ग्रांट मिली उसको कत्ल कर डालो। जगह-जगह सरकारी ग्रांट के बूचड़खाने खुल जाते हैं। ...
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अनूप शुक्ल
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