फ़ुरसतिया

हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै

Tuesday, November 20, 2018

सपने में सांड

›
मुश्किल है। अब सपने में भी आदमी नहीं दिखते। हर तरफ आदमी का अकाल चल रहा है। दिखते ही नहीं। दो दिन पहले सपने में कुत्ता काट गया। अभी उससे ...
Saturday, November 17, 2018

शराफत का लालच

›
अठारह रुपये की चाय। बताओ भला। सबसे पहले बाहर की चाय पीना शुरु किये थे 1981 में। इलाहाबाद में। 30 पैसे की एक चाय। कल बनारसी टी स्टॉल वाल...
Monday, November 12, 2018

लेखन एक संजीवनी की तरह है

›
समय को पहचानिये। खराब समय को बदलिए। खराब हालत बहुत दिन तक हम पर हावी न हो सकें हमें यह देखना होगा। उसके लिये मेहनत करनी होगी। वक्त को नजरअ...
Wednesday, November 07, 2018

त्योहार बाजार की गोद में बैठकर आता है

›
अभी-अभी पैदा हुआ बच्चा झालर बनाने में लग गया। कूदते हुए कहीं चोट लग जाये तो कौन जिम्मेदार होगा। बालश्रम का सरासर उल्लंघन है यह कानून। ...
2 comments:
Sunday, November 04, 2018

मुश्ताक़ अहमद युसूफी

›
1.ऐसा लगता है मनुष्य में अपने आप पर हंसने का साहस नहीं रहा। दूसरों पर हंसने में उसे डर लगता है। 2. व्यंग्यकार को जो कुछ कहना होता है वो ...
Monday, October 22, 2018

नेहरू की राजनीतिक सूझ-बूझ सुभाष से अधिक परिपक्व तथा सही थी- परसाई

›
प्रश्न: पंडित सुभाष और नेहरू में क्या मतभेद थे? कटनी से सुभाष आहूजा देशबन्दु अखबार दिनांक १२.१०.१९८६ उत्तर: पंडित नेहरू और सुभाष बोस...

सुभाष चन्द्र बोस उग्र राष्ट्रवादी और समाजवादी थे-परसाई

›
प्रश्न: नेताजी सुभाष चन्द्र बोस महात्मा गांधी के साथ अन्य नेताओं की तरह मिलकर कार्य नहीं कर सके। ऐसा क्यों हुआ? बिलासपुर से रामकिशोर ताम...
2 comments:
Sunday, October 21, 2018

जिंदगी के स्कूल में पढाई की फ़ीस नहीं पडती

›
जिंदगी का स्कूल रोज खुल रहता है, कभी छुट्टी नहीं होती यहां सुबह सूरज भाई उगे। देखते-देखते जियो के मुफ़्तिया नेट कनेक्शन की तरह हर तरफ़ ...
1 comment:
Thursday, October 18, 2018

लगता है गंगा मैया नाराज हैं

›
पानी में भीगे कपड़ों संग खुद भी सूखती महिला। साथ में सवाल पूछते लोग। 'आज लागत है गंगा मैया नाराज हैं। तीन लोगन मां केहू के कुछ नहीं...
1 comment:
Tuesday, October 16, 2018

इंसानियत का रिश्ता

›
बाब-ए-सिकंदर बेगम भोपाल के ताल के सामने एक बड़ी इमारत दिखी। दिखी तो गए साल भी थी लेकिन तब केवल बाहर से देख लिए। इस बार मन किया अंदर से ...

कानपुर में सीधा कोई नहीं चलता

›
Add caption सबेरे उतरे स्टेशन पर। भोपाल में आधे घण्टे लेट चली पुष्पक कानपुर में बीस मिनट पहले पहुँच गयी। भागी होगी सरपट...
Monday, October 15, 2018

कानपुर से भोपाल

›
सूरज भाई ने भोपाल में लपक कर हाथ मिलाया कल सुबह भोपाल पहुंचे। ब्राह्ममूहुर्त और गजरदम से भी पहले। गाड़ी को नौ बजे पहुंचना था। लेकिन मुं...

नानी से मुलाकात

›
नानी के साथ कमलेश पाण्डेय, आलोक पुराणिक और अनूप शुक्ल  —  Kamlesh Pandey  के साथ. सबेरे कमरे से निकलते ही ओला खरीद लिए। ठहराव स्थल स...
‹
›
Home
View web version

योगदानकर्ता

My photo
अनूप शुक्ल
View my complete profile
Powered by Blogger.