फ़ुरसतिया
हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै
Monday, June 29, 2020
शराफत के बहाने ऑनलाइन के किस्से
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कल इतवार था। कई काम सोचे थे करने को। कुछ किताबें , कुछ लेख। सोचा था हम भी कुछ लिख लेंगे। फ़िल्म भी देखने की मंशा थी। कुछ नया सीखने का भी मन...
Tuesday, June 23, 2020
पागलखाना -बाजार की फ़ंतासी की दास्तान
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"हर क्रान्तिकारी विचार शुरु के अकेलेपन में पागलपन ही तो होता है।"- 'पागलखाना'से पिछले हफ़्ते ’पागलखाना’ किताब पूरी की। ब...
'पागलखाना' के पंच
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1. दुनिया बाजारवाद के कब्जे में आ गई थी। दुनिया बाजार में रहना और जीना सीख रही थी। पर कुछ लोगों ने बाजारवाद को पागलपन माना तथा बाजार को पा...
Wednesday, June 17, 2020
नर्म बिस्तर, ऊंची सोंचे, फिर उनींदापन
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आज सुबह ढाई बजे ही नींद खुल गयी। वैसे ऐसा कम ही होता है। नींद हमारी सुपरफास्ट ट्रेन की तरह है। रात के स्टेशन पर चढ़ी तो सुबह के जंक्शन पर ...
Saturday, June 06, 2020
क्रांतिकारी आइडिये अकडू होते हैं
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एक बहुत क्रांतिकारी टाइप का आइडिया हमारे दिमाग में घुसने की कोशिश कर रहा था। हमने घुसने नहीं दिया। साफ कह दिया -'कितने भी क्रांतिकारी ...
Wednesday, May 27, 2020
साहित्य जीवन की तरह है
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पिछले दिनों कुछ व्यंग्य बतकहियों से रुबरु हुआ। कुछ व्यंग्य पाठ। कुछ बातचीत। कुछ में व्यंग्य की चिंता। कुछ में व्यंग्य लेखन कैसे बढ़िया हो स...
Monday, May 25, 2020
शाहजहांपुर की सड़कों पर साइकिलबाजी
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सफेद घोड़ा काला सवार और अन्य तमाम रचनाओं के लेखक, कहानीकार हृदयेश जी का घर। सुबह साइकिल से निकले। लोग सड़क पर आ चुके थे। कुछ पार्क में जमे ह...
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