फ़ुरसतिया

हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै

Friday, December 29, 2017

झाड़े रहो कलट्टरगंज

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और अंतत: किताब तैयार ही हो गयी -झाड़े रहो कलट्टरगंज। इस साल की तीसरी किताब। कल छापाखाना में गई किताब। इसके पहले ’सूरज की मिस्ड कॉल’ और ’आ...
Thursday, December 28, 2017

ये दुनिया बड़ी तेज चलती है

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अंतरिक्ष बहुतों की तरह हमारे लिये भी जिज्ञासा का विषय रहा है। बचपन से अब तक इत्ती बातें पढ़ीं हैं कि बहुत कुछ तो गड्ड-मड्ड हो गयी हैं। कोई ...
Sunday, December 24, 2017

नानी की दुकान

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भोपाल की सुबह बड़े तालाब के किनारे टहलते हुए बीती। लौटते हुए नानी की दुकान पर चाय पी गयी। पोहा खाया गया। दो महीने हुए नानी को अपनी दु...

भोपाल में प्रवासी मजदूर

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सवेरे जब आगे चले से तो देखा एक भाई जी तालाब की मुंडेर पर बैठे दातुन कर रहे थे। पता किया तो मालूम हुआ कि भाई जी बैतूल के एक गांव के र...
Saturday, December 23, 2017

अपन सही तो सब सही

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भोपाल स्टेशन गाड़ी पहुंची डेढ़ बजे। मल्लब केवल 4 घण्टे लेट। स्टेशन पर ही चाय पी। घर के बाद की पहली ठीक चाय। इसके पहले कानपुर , झांसी...
Thursday, December 21, 2017

झाड़े रहो कलट्टरगंज - नया हास्य-व्यंग्य संग्रह

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पिछले इतवार को लैपटॉप लेकर बैठे तो पिछले चार-पांच साल में लिखे गये हास्य-व्यंग्य लेख उछल-उछलकर हल्ला मचाने लगे कि हमको किताब में कब जगह...
Tuesday, December 19, 2017

चुनाव के बाद वोटिंग मशीन

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1. गुंडा जब अपने दीन-धरम छोड़ देता है तो नेता हो जाता है। 2. जिन महिलाओं से छेड़छाड़ होती है उसके जिम्मे सफ़ाई देने का ही काम बचता है। 3. गु...
Friday, December 08, 2017

सड़क पर जाम, एक नया झाम

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समय के साथ तमाम परिभाषायें बदल जाती हैं। पहले दूरी का मात्रक मील/किलोमीटर हुआ करता था। फ़िर घंटे/दिन हुआ। किदवई नगर से स्टेशन आधा घंटा ...
Sunday, December 03, 2017

एक गुनगुनी सुबह

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गंगा स्नान करके लौटती महिला सुबह टहलने निकले। सुलभ शौचालय दिखा। कुछ लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। एक आदमी अखबार पढ़ रहा था। शायद ...
2 comments:
Tuesday, November 28, 2017

दुनिया बावजूद तमाम चिरकुटईयों के बहुत खूबसूरत है

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कल दफ़्तर के लिये निकले। तिराहे पर मिनी जाम लगा था। एक स्कूटर और ऑटो में टक्कर हुई थी। स्कूटर दोनो टायर करवटियाये सड़क पर लेटा था। ऑटो बगल ...
Thursday, November 23, 2017

हर व्यक्ति अपने में मठाधीश है

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कल मंडी हाउस में चाय पी गयी। पहुंचते ही एक सर्वेरत बालक ने पकड़ लिया। किसी कंपनी में काम करता है। कंपनी की तरफ़ से सर्वे का काम मिला है। व...
Wednesday, November 22, 2017

सूरज भाई के जलवे

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‌सुबह खिड़की खोली तो देखा सूरज पेड़ के ऊपर विराजमान थे। गुलदस्ते के फूल की तरह खिले हुए। सर्दियों की आमद से उनकी खूबसूरती बढ़ गयी थी। हमने ...
Tuesday, November 21, 2017

महाभारत काल में नोटबन्दी

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महाभारत के समय में पांडवों ने अपने पुरुषार्थ से खूब बड़े नोट जमा कर लिए थे। कुछ टैक्स भरते, ज्यादा बचा लेते। कौरवों को जब पता चला तो उन्ह...
1 comment:
Sunday, November 19, 2017

‌इतवार की गुनगुनी सुबह

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सुबह निकले । सड़क गुलजार थी। मूंगफली की दुकानें सज गयीं थीं। एक आदमी दुकान पर बैठा स्टील के ग्लास में चाय पी रहा था। बगल में सड़क पर बैठा द...
Friday, November 17, 2017

आये भैया कोई हीरो आये

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आये भैया कोई हीरो आये, हमारे देश को आगे ले जाये। हमें निठल्ले ही रहना है, हीरो देश का गर्व बढाये। उसको मेहनत करना होगा, भला-बुरा सब स...
Saturday, November 11, 2017

इंसान कुदरत का बेहया दुलरुआ है

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सबेरे घूमने निकले। सड़क किनारे की सब दुकानें साफ़। पप्पू की चाय की दुकान का टट्टर गायब, भट्टी लापता, बेंच तिरोहित। पता चला कैंट में किसी टू...
Saturday, November 04, 2017

मन कर रहा कि अब उठे

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मन कर रहा कि अब उठे , फ़ौरन नहा के आ जाएँ लेकिन सोचते हैं कि दौड़ के दूकान से दूध ले आएं। बाहर बगीचे में फूल खिला है अपने पूरे जलवे से मन ...
Friday, November 03, 2017

सवालों की सर्जिकल स्ट्राइक

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ये भाईजी आज टाटमिल चौराहे से घंटाघर की तरफ़ जाने वाले पुल पर मिले। पीठ पर तमाम तरह का सामान लादे, जिसमें शायद भारत में बनने वाली...
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अनूप शुक्ल
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