Friday, April 04, 2025

किसी भी समाज के लिए संतुलन आवश्यक है

 'किसी भी समाज के लिए संतुलन आवश्यक है। दुनिया में जिसके हाथ में सत्ता होती वह अपनी समझ के इसे चलाता है। हर जगह ऐसा होता है लेकिन नीति निर्धारण में और सत्ता में एक बड़ी आबादी का कोई प्रतिनिधित्व न होना समाज के संतुलन के लिए ठीक नहीं होता।’

ऊपर लिखी यह बात लगभग तीन साल पहले कश्मीर भ्रमण के दौरान एक बुजुर्ग ने कही थी (पोस्ट का लिंक टिप्पणी में)। कल वक़्फ़ बोर्ड बिल पर चली बहस को सुनते हुए याद आया। यह अपने आप में कितनी बड़ी बिडंबना है कि जिस समाज की भलाई के लिए बिल लाया गया उसको तैयार करने में उस समाज के लोगों की कोई नुमाइंदगी नहीं।
जिसकी समाज की भलाई के लिए बिल लाया जा रहा है उसको विश्वास में लिए बिना इसको पास कर देना और लागू करना किसी भी नज़र से ठीक नहीं।
मुस्लिम समाज अपने देश का सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समाज है। देश की आज़ादी, तरक़्क़ी और प्रगति में उसके लोगों का बराबर का योगदान रहा है। कोई भी क़ानून, चाहे उनके कितने ही भले के लिए क्यों न हो, बिना उनकी सहमति के लागू करना उनको नीचा दिखाने जैसा है। देश के लिए किसी भी तरह से यह ठीक नहीं है।

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