भूतपूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर जी के संसद में कुछ भाषण सुने आज। उनके सवालों के घेरे में उस समय की सरकार (एनडीए) और विपक्ष (कांग्रेस) दोनों रहते थे। दोनों के पास उनके सवालों के कोई जवाब नहीं थे। वे मानते थे कि अगर किसी पार्टी से कोई गलती हो गई हो तो उसे परंपरा नहीं बनाना चाहिये।
सुरक्षा मामलों में उनका मत था कि सुरक्षा गतिविधियों और योजनाओं की चर्चा सार्वजनिक रूप से कम से कम होनी चाहिए। इसके बदले सभी पार्टियों को जानकारी दे देनी चाहिए। उनका मानना था कि संसद का उपयोग देश के लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए होनी चाहिए।
चंद्रशेखर जी का एक भाषण टिप्पणी में। भाषण का अंत करते हुए वे कहते हैं -‘सत्ता हासिल करके सब कुछ हासिल नहीं किया जा सकता’
जिन हाथों में शक्ति भरी है राजतिलक देने की
उन हाथों में ही ताक़त है सर उतार लेने की।
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