परसों लखनऊ से आठ बजे सुबह उड़े। साढ़े नौ बजे गौहाटी उतर गए। करीब 1400 किलोमीटर की दूरी डेढ़ घंटे में तय हो गई। यह लिखते हुए याद आया कि एक दिन लखनऊ में लालबाग चौराहे पर जाम में फँस गए थे तो 14 मीटर भी नहीं सरक पाये थे। इससे यह सिद्ध हुआ कि इंसान हवा में तेज चलता है। इसीलिए आजकल लोग हवाबाजी ज्यादा करते हैं।
सुबह मौसम ख़ुशगवार था। धूप खिली थी। जाड़ा शायद लखनऊ में ही छूट गया था। टिकट नहीं लिया होगा हवाई जहाज का। लोग हाफ शर्ट में भी दिखे। लेकिन अपन स्वेटर, जैकेट डाँटे रहे।
एयरपोर्ट से बाहर निकल कर सड़क पर आने के बाद ऐसा कुछ लगा नहीं कि किसी नए शहर में आ गए हैं। लगा कि कानपुर , लखनऊ बढ़कर आसाम तक चला आया है। सड़क पर तसल्ली से चलता ट्रैफिक, नई पुरानी इमारतों का गठबंधन। कहीं-कहीं बहुत पुरानी इमारतें। जगह-जगह असमिया में लिखे नाम पट्ट। अंग्रेज़ी और हिंदी में भी दिखे साइन बोर्ड।
शहर के पास आने पर ब्रह्मपुत्र नदी के दर्शन हुए। नदी क्या नद कहना ठीक होगा। अपने देश में नदियों के खानदान में दो प्रमुख मर्द नदियाँ हैं। एक सोनभद्र और दूसरी ब्रह्मपुत्र। सोनभद्र का उद्गम अमरकंटक है। ब्रह्मपुत्र तिब्बत में चेमायुंगडुंग ग्लेशियर से निकलती है। पानी के मामले में ब्रह्मपुत्र देश की सबसे अमीर नदी है। सबसे ज्यादा पानी ले जाती है ब्रह्मपुत्र। ( कृपया अपडेट देखें )
देश की सबसे अधिक पानी वाली नदी ब्रह्मपुत्र का पाट कहीं-कहीं बीस किलोमीटर तक चौड़ा है। कहीं -कहीं नदी का दूसरा पाट नहीं दिखता। लेकिन गोहाटी में ब्रह्मपुत्र सबसे कम चौड़ी है। इसलिए गोहाटी वाले ब्रह्मपुत्र के हिस्से को 'ब्रह्मपुत्र की कमर' कहते हैं। मर्द नदी की कमर के किनारे बसा है गोहाटी।
शहर में जगह-जगह फ़्लाई ओवर बन रहे हैं। फ्लाई ओवर और दूसरे सरकारी निर्माणों से विकास और करप्शन के किस्से अन्तर्गुम्फित हैं। करप्शन हो रहा है लेकिन नया निर्माण भी जारी है। जगह-जगह ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे और ऊपर पुल टनल बनने के प्रोजेक्ट चल रहे हैं।
सड़कों में भीड़ है। जगह-जगह जाम भी दिखे। लेकिन सब कुछ आराम-आराम से चल रहा है। ख़रामा-ख़रामा। आसाम में सब कुछ आराम-आराम से चलता है। आराम -आराम से मतलब 'लाहे-लाहे।'
'लाहे-लाहे' चलना आसाम के जीवन का मूल मंत्र है। कोई हड़बड़ी नहीं। आसाम में स्थानीय लोग लगभग तीस प्रतिशत हैं। बाकी लोग देश के दूसरे हिस्सों आए हैं। कुछ बाहरी भी। बाहरी लोगों को रोज निकालने की कवायद होती हो। लेकिन जीविका के लिए घुस आए लोगों को निकालना आसान काम नहीं है। दस निकाले जाते हैं, सौ घुस आते हैं। भीतरी-बाहरी का क़िस्सा यहाँ की राजनीति का शाश्वत हिस्सा है। लगातार चलने वाला किस्सा है। चुनाव के समय यह और तेजी से उभरकर आता है।
असम में लंबे समय तक अहोम राजवंश का शासन रहा। अहोम राजवंश (1228-1826) लगभग 600 वर्षों तक ब्रह्मपुत्र घाटी पर शासन करने वाला एक शक्तिशाली ताई-मंगोल मूल का साम्राज्य था। इसकी स्थापना सुकफा (Chaolung Sukaphaa) ने की थी। अहोमों ने अपनी विशिष्ट संस्कृति, शासन प्रणाली (बुरंजी) और सैन्य शक्ति के दम पर असम की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान को आकार दिया। दुनिया में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले लोगों में अहोम राजवंश का प्रमुख नाम है।
ब्रह्मपुत्र नदी की कमर के किनारे बसे शहर में 'लाहे-लाहे' घूम रहे हैं। यहाँ बिना किसी प्लान के 'टहल' रहे हैं। गोहाटी के आसपास की जगहें देख रहे हैं। 'काजीरंगा' और शिलांग पास ही हैं। वहाँ भी जाएँगे घूमने। देखते हैं कितना घूम पाते हैं।
अपडेट: पोस्ट लिखने तक केवल दो पुरुष नदियाँ होने की जानकारी थी मुझे। बाद में दामोदर, सिंधु , अजय और रूप नारायन के भी पुरुष नदी होने की जानकारी हुई। हो सकता है आगे कुछ नाम और जुड़ें पुरुष नदियों में।
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