'इनका कोई भरोसा नहीं। बड़ी बात नहीं कल को टेस्टिंग के नाम पर खाने में जहर मिलाकर बांटने लगें।'
यह बात कल एक कैब ड्राइवर ने कही। बातचीत एथनॉल मिले पेट्रोल की हो रही थी। आजकल यह मुद्दा चर्चा में है। कई लोगों ने अपनी गाड़ियों के एवरेज कम होने की बात कही। हमको भी इसका एहसास तब हुआ जब पिछले हफ़्ते हमने अपनी गाड़ी का एवरेज चेक किया। लखनऊ से कानपुर जाने-आने में गाड़ी हुई पेट्रोल की खपत जबरदस्त थी। एवरेज धराशायी।
खबर यह भी आई कि सरकार ने अदालत में बयान दिया कि पेट्रोल में एथनॉल की टेस्टिंग कर रहे हैं। यह कैसी टेस्टिंग है भाई कि पूरे देश में एथनॉल मिला पेट्रोल बेचने लगे बिना उसका प्रभाव जाने।
दवाइयों या किसी और चीज की टेस्टिंग छोटे समूहों पर होती है। टेस्टिंग सफल होने पर उसको प्रयोग के लिए अनुमति दी जाती है। यह कैसी टेस्टिंग कि बिना परिणाम जाने उसको लागू कर दिया। देश की आम जनता मानो चूहा या गिनीपिग है जहाँ कोई भी टेस्टिंग करने लगें।
हालांकि सरकार की तरफ़ से कहा गया है कि पेट्रोल में एथनॉल मिलाने का निर्णय विशेषज्ञों से सलाह लेकर किया गया है। गाड़ियों की लाइफ़ में असर क्या होगा यह तो आने वाला समय बताएगा। लेकिन गाड़ियों का एवरेज कम कम होने की ख़बरें हर तरफ़ से आ रही हैं। आम जनता के मन में उनकी गाड़ियों के एवरेज कम होने से जो प्रतिक्रिया हो रही है उससे यह लगता है E20 के बहाने यह लूट है। मुझे नंदन जी की कविता का अंश याद आया :
लूटने में कोई उज्र नहीं आज लूट ले,
लेकिन उसूल कुछ तो होंगे लूटमार के।
क्या आपकी गाड़ी में भी एथनॉल मिले पेट्रोल से एवरेज कम हो रहा है?

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