फ़ुरसतिया
हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै
Friday, April 25, 2014
सूरज भाई की बेईज्जती ख़राब
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कल सूरज भाई की जो बेईज्जती ख़राब की जहाज वालों ने उससे सूरज भाई सुबह से ही भन्नाये हुए हैं। एयरपोर्ट पर जहाज के ऊपर पाँव धरकर चमक रहे ...
Thursday, April 24, 2014
रौशनी का टुकड़ा शराफत से बाहर
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कलकत्ता से दिल्ली के लिए हवाई जहाज के उड़ते ही तमाम यात्री समाधि मुद्रा में आ गए। आँखे मूंदकर इतने ध्यान से सांस ले रहे थे जिसे देखक...
Wednesday, April 23, 2014
आसमान अपने को शायद बड़ा पवित्र समझता है
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दिल्ली से कलकत्ता के लिए जैसे ही जहाज में बैठे तो देखा सूरज भाई बाहर चमक रहे थे। हमने कहा-बोले साथ चलेगे। हमने कहा अन्दर आ जाओ भ...
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