फ़ुरसतिया

हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै

Tuesday, January 19, 2016

रोजगार की भाषा सबसे तेजी से सीखते हैं लोग

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धूप स्नान वाले तख्त खाली हो गए थे शाम को कल शाम को क्लास खत्म होने के बाद हम लोग समुद्र तट पर घूमने निकले। जिन तख्तों पर दिन में लोग ...
Monday, January 18, 2016

हंसने के लिये किसी भाषा की दरकार नहीं होती

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सुबह अलार्म बजा तो जगे। घर फ़ोन करने के लिये नम्बर मिलाने की कोशिश किये तो पता चला नेटवर्क गोल। बाहर निकले। फ़ोन किया और टहलने निकल लिये। ...
Sunday, January 17, 2016

पुस्तक मेले से वापसी

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ज्ञान जी कमलेश पाण्डेय जी के साथ पुस्तक मेले में पहुंचते हुए हमको पांच बज गए थे। पहुंचते ही हम अंदर जाने के लिए लपके लेकिन पता चला कि ...

एक लेखक को हमेशा यही समझना चाहिए कि वह नया है

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ञान चतुर्वेदी जी आलोक पुराणिक के साथ किताबघर की स्टॉल पर ज्ञान जी ने पुरानी पीढ़ी के लेखकों परसाईजी, शरदजोशी जी, श्रीलाल शुक्ल जी आदि ...

'व्यंग्य विसंगतियों को कम से कम शब्दों में व्यक्त करने वाली विधा है

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मदन कश्यप ज्ञान जी के लेखन के बारे में बात करते हुये 'व्यंग्य विसंगतियों को कम से कम शब्दों में व्यक्त करने वाली ...
Friday, January 15, 2016

धीरेन्द्र से मुलाकात

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धीरेन्द्र केसरवानी कल मेस के बाहर ही मिल गए धीरेन्द्र केसरवानी। देखकर लगा मिनी वाल मार्ट मोपेड पर लादे चले जा रहे हों। गृहस्थी का हर ...
Wednesday, January 13, 2016

फ़ूलचन्द और मोहनकुमार से मुलाकात

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फूलचन्द और मोहनकुमार कल दोपहर दो लोग पुलिया पर बैठे बीड़ी का धुंआ खींच रहे। उनकी साइकिल सामने में खड़ी धूप खैंच रही थी। जिस तेजी से ध...

डॉक्टर हो तो ऐसा......

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Tuesday, January 12, 2016

ताकि और कोई न हो हादसे का शिकार

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Monday, January 11, 2016

हनुमान मंदिर के पास ही रहते हैं अंकलजी

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दोपहर लंच के बाद हम आफ़िस जा रहे थे। सामने से कुछ महिलायें अपने सर पर लकडियां लिये आती दिखीं। सबके सर पर कटी जंगली लकड़ी का गट्ठर था। लकड़ि...

गजब का हौसला है आमिर

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Sunday, January 10, 2016

पुलिया पर दुनिया एक प्रतिक्रिया

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अपनी किताब ’पुलिया पर दुनिया’ मैंने पहले ई-बुक के रूप में बनाई थी। फ़िर प्रिंट आन डिमान्ड के तरह रंगीन और ’ब्लैक एंड व्हाइट’ पेपर ब...

गहनों का सदुपयोग

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Saturday, January 09, 2016

पुस्तक मेला की शुरुआत

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रामफ़ल ’पुलिया पर दुनिया’ का विमोचन करते हुये आज से दिल्ली में विश्वपुस्तक मेला शुरु हो गया। तमाम कवि/लेखक/व्यंग्यकार अपनी नई किताब क...

वाह क्या बात है

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Friday, January 08, 2016

किताबें साथ हैं

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Thursday, January 07, 2016

नाना के संग हंसती बच्ची

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'बाबा हमारे बंगलौर से जबलपुर आये थे। फिर यहीं बस गए। जबलपुर ही हमारा घर हो गया।' --कल दोपहर को पुलिया पर अपनी नातिन गौरी के साथ...

व्यक्ति मूलत: स्त्री-पुरुष ही होते हैं

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'बाबा हमारे बंगलौर से जबलपुर आये थे। फिर यहीं बस गए। जबलपुर ही हमारा घर हो गया।' --कल दोपहर को पुलिया पर अपनी नातिन गौरी के साथ ...
Wednesday, January 06, 2016

स्वारथ लागि करहिं सब प्रीती

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  कल दोपहर लंच के बाद पुलिया पर हरिप्रसाद विश्वकर्मा से मुलाक़ात हुई। भेलुपुरा में रहते हैं हरिप्रसाद। टेलर का काम करते थे। तीन साल प...
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