फ़ुरसतिया

हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै

Thursday, January 12, 2017

मैं जरा जल्दी में हूँ-निर्मल गुप्त

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कवि को भले ही जल्दी रही हो लेकिन पाठक कतई हड़बड़ी में नहीँ था। कत्तई तसल्ली में रहता है पाठक। इसीलिये 9 फरवरी'16 को 'सस...

अनूप मणि त्रिपाठी से मुलाकात

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"अनूप, तुम अगर लड़की होते तो स्वेटर बहुत बढ़िया बुनते। " यह बात हमसे हिंदी व्यंग्य के बुजुर्गवार  Anup Srivastava  जी ने पिछले...
Monday, January 09, 2017

पुलिया की दुनिया का विमोचन

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कल से दिल्ली में विश्वपुस्तक मेला शुरु हो गया। तमाम कवि/लेखक/व्यंग्यकार अपनी नई किताब का विमोचन, नये संस्करण का पु्नर्विमोचन करवाने के ल...
Sunday, January 08, 2017

चुनाव और दंगल

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आजकल जाड़े का मौसम है। जाड़े के साथ जुगलबंदी करने के लिये चुनाव का मौसम भी आ गया है। चुनाव आयोग ने चुनावों की घोषणा कर दी है। जाड़े में रजा...
Thursday, January 05, 2017

जो भरा नहीं है भावों से

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आजकल कोहरे का जलवा है। चप्पे-चप्पे पर कब्जा किये रहता है। सड़क पर जाते हर राहगीर को ऐसे घेर लेता है जैसे वीआईपी लोगों को सुरक्षा सिपाही घ...
Sunday, January 01, 2017

नया साल, नये सवाल

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पिछले साल मतलब पिछली रात सोते ही ’सपन परियां’ आकर हमको स्वप्नलोक ले गयीं। जाड़े में घर और रजाई छोड़कर हमको कहीं जाना पसन्द नहीं। लेकिन वो ...
Sunday, December 25, 2016

कमलेश पांडेय और उनका आत्मालाप हमारी नजर में

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......और ये निपट गयी ’आत्मालाप’ भी। साल के शुरु में 16 जनवरी, 16 को दिल्ली के पुस्तक मेले से खरीदी थी किताब। लेखक कमलेश पाण्डेय संग थे ...

दिसंबर में देश

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दिसम्बर के महीने में कम्बल में बैठे-बैठे देश के हाल बयान करना ऐसा ही है जैसा दिल्ली में खड़े-खड़े कन्याकुमारी के सूर्योदय की रनिंग कमेंट्री...
Saturday, December 24, 2016

सड़क पर सांड़

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ये फोटो विजयनगर का है। सड़क के दोनों तरफ फल की दुकानें हैं। 'अतिक्रमण हटाओ' के चलने पर फुटपाथ दिखने लगती है। दुकाने हट जाती हैं। ...
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