फ़ुरसतिया

हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै

Monday, July 17, 2017

चूल्हे में जलती आग सबसे खूबसूरत लगती है

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कल गंगा दर्शन से वापस लौटते हुये कुछ चूल्हे जलते देखे। एक पतनासन्न इमारत की दीवार के पास ईंटो के चूल्हे पर खाना बना रहे थे लोग। तमाम तरह...
Sunday, July 16, 2017

इतवार को गंगा दर्शन

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इतवार की सुबह सुहानी होती है। लखनऊ जाते  Ashok  भाईसाहब की कार में लिफ़्ट शुक्लागंज पहुंचे। पांच रुपये बचाये। बचत के बाद पईयां-पईयां लौटे।...
Saturday, July 15, 2017

काम भर का भाईचारा है

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आज सबेरे बच्चे को स्टेशन छोड़ने गये। घर से निकलते ही पहले बंदर खौखियाये। बाद इसके कुत्ते दौड़ा लिये। लेकिन कार में होने के चलते ह...
Thursday, July 13, 2017

पेट्रोल पम्प पर फेसबुक, व्हाट्सऐप

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कल दोपहर दफ़्तर से लौटते हुए देखा कि गाड़ी में पेट्राल खत्म हो रहा था। पास ही पेट्रोल पम्प भी मिल गया। पहुंच गए। बोले डालो पेट्रोल। पेमेंट ...
Sunday, July 09, 2017

घपले-घोटाले बाजार की लीलायें हैं

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आजकल घपले-घोटालों के मजे हैं। जिस काम के लिए सरकारों के मुखिया करोड़ों-अरबों फूंकते हैं वह पब्लिसिटी उनको मुफ़्त में मिल जाती है। घपला मीड...
Saturday, July 08, 2017

जबाबी तुकबंदियां

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1. ज़िक्र है फ़िक्र है हादसा है, इश्क़ इसके सिवा और क्या है। और क्या चाहिए ज़िंदगी में, ख़्वाब हैं दोस्त हैं फलसफ़ा है। Sushil Siddharth वो ...
Wednesday, July 05, 2017

नय़ी-पुरानी पीढी के अन्तर्विरोध

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[ एम.एम. चन्द्रा  के संपादन में अट्टहास के जुलाई,17 के अंक में छपा लेख। जुलाई अंक व्यंग्य के अंतर्विरोध पर केन्द्रित है। ] लिखत-पढत की ...
Monday, July 03, 2017

विलेज में बदलते गांव

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[कादम्बिनी पत्रिका का जुलाई अंक गांव -शहर पर केन्द्रित है। ’वीरान गांव-बदहाल शहर’ थीम के अन्तर्गत लेख, कवितायें संकलित हैं इसमें।  Subha...
Sunday, July 02, 2017

बारिशों में पतंगे उड़ाया करो

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सबेरे निकले। साइकिल निकाली। ताला खुल ही नहीं रहा था। कुनमुनाता रहा। शायद कह रहा था -'अभी सुबह नहीं हुई। सोने दो जरा।' थोड़ी देर ...
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अनूप शुक्ल
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