फ़ुरसतिया
हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै
Monday, November 09, 2020
परसाई के पंच-99
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1. ’बिग पावर’ का यह कर्तव्य है कि वह कहीं शान्ति न रहने दे। सब डर के साये में जिन्दा रहें। 2. हर मिशन एक खूबसूरत धोखा होता है। 3. राजनीति ...
परसाई के पंच-98
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1. धर्म वह है, जिसका पालन धनी-गरीब सब कर सकें, जो बड़े और छोटे सबके लिये सुलभ हो। 2. विचार को निर्बाध गति से प्रकट होने देना चाहिये। विचार ...
Saturday, November 07, 2020
परसाई के पंच-97
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1. न्याय के दो रूप होते हैं – एक दूसरे के लिये;दूसरा अपने लिये। 2. एक झूठ होता है; एक सफ़ेद झूठ और एक अखबारी झूठ। हमारे तमाम अखबार समाज को ...
परसाई के पंच-96
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1. फ़ासिस्ट संगठन की विशेषता होती है कि दिमाग सिर्फ़ नेता के पास होता है, बाकी सब कार्यकर्ताओं के पास सिर्फ़ शरीर होता है। 2. किसी प्रधानमंत्...
Thursday, November 05, 2020
परसाई के पंच-95
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1. अब छात्र अपने गुरु की सारी कमजोरियां जानते हैं, इसलिये स्वाभाविक है कि जो अध्यापक जैसा होगा उसकी इज्जत वैसी ही होगी। 2. हर क्षेत्र में ...
Wednesday, November 04, 2020
परसाई के पंच-94
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1. पति पत्नी द्वारा प्रताड़ित होते हैं, तनखा को लेकर। कम तनखा लेने वाले पति पत्नी द्वारा जब-तब प्रताड़ित किये जाते हैं। जो पति वेतन के दिन क...
परसाई के पंच-93
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1. जो जाति जितनी प्राचीन होती है, उसके आदमखोरी संस्कार भी उतने ही गहरे होते हैं। 2. हम दुनिया के प्राचीन आदमखोर हैं। हमारे शिकारी बन्दूक ल...
Tuesday, November 03, 2020
तख्त-ए- हज्जाम और किराये पर साइकिल की दुकान
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इधर-उधर टहलते हुए स्टेशन की तरफ बढ़ गए। एक शटर बन्द दुकान के बाहर एक हज्जाम अपना सैलून सजा रहे थे। लकड़ी की कुर्सी। कटोरी में पानी। साबुन और...
Monday, November 02, 2020
मुंह छिपाता देश का भविष्य
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शाम टहलने निकले। सूरज भाई अपनी किरणों का शटर गिराकर आरामफ़रमा हो गए थे। बिजली के लट्टू जगह-जगह जल गए थे। हवा कुछ और ठंढा गयी थी। शाम के धुं...
परसाई के पंच-92
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1. सरकारी आदमी जहां प्रोबेशन पर होता है वहां अपन मकान बनवाना शुरु नहीं करता। 2. अलग-अलग रँडापा भोगते जब दस रँडुए इकट्ठे होते हैं तो वे सब ...
Sunday, November 01, 2020
परसाई के पंच-91
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1. असल में हमारी जाति मुर्दे को अरसे तक चिपकाये रहती है। रूढि को छोड़ने में बहुत समय लेती है और बरबाद होती है। 2. सबसे सुभीते की शादी तो अद...
परसाई के पंच-90
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1. ब्राह्मण ने समाज के एक बड़े हिस्से को शूद्र बनाकर, अछूत बनाकर, शिक्षा-संस्कृति से वंचित करके जो पाप किया, उसका फ़ल वह अभी भी भोग रहा है। ...
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