होटल लाया बीच से निकलकर हम लोग एक आयुर्वेदिक नर्सरी देखने गये। नर्सरी का भ्रमण स्पाइस गार्डन के नाम से तय था। स्पाइस गार्डन मतलब -मसाला बगीचा। नर्सरी में कई तरह के पेड़-पौधे लगे थे। कुछ के नाम हमको पता थे, कुछ नए थे। हर पौधे के सामने उसका नामपट्ट लगा था। जिन पौधों से हम परिचित थे उनके आगे नामपट्ट लगे देखकर गाना याद आया -"अजनबी तुम जाने-पहचाने से लगते हो।"
वहाँ मौजूद गाइड पेशे से डाक्टर थे। उन्होंने पूरी नर्सरी का भ्रमण कराया और पौधों के बारे में बताया। श्रीलंका का उद्गम रावण के समय से जोड़ते हुए वहाँ मौजूद पौधों और औषधियों के बारे में जानकारी दी।
उनके अनुसार रावण कवि, संगीतज्ञ, वेदज्ञ होने के साथ साथ ही वह आयुर्वेद का जानकार भी था।
श्रीलंका में रावण से जुड़ी कई इमारतें हैं। हमारे बड़े समाज का खलनायक है रावण। लगता है कि हालिया इतिहास के खलनायकों (औरंगज़ेब, बाबर) आदि से निपटने के बाद अपने यहाँ के वीर बाँकुरे तीर-कमान लेकर श्रीलंका की तरफ़ रुख़ करेंगे और रावण से जुड़ी सारी धरोहरों के साथ समुचित न्याय करेंगे। न होगा तो कम से कम उनके नाम तो बदल ही देंगे।
नाम बदलने से बहुत कुछ हो जाता है। मप्र में ही बेरोज़गारी का नाम नाम 'युवा आकांक्षी' रखते ही वहाँ की बेरोज़गारी मुँह छिपाकर तिड़ी-बिड़ी हो गयी। कहीं मुँह छिपाकर बैठी होगी बेचारी।
नर्सरी का भ्रमण करने के बाद हम लोग एक जगह बैठे। एक शेड के नीचे बरामदे जैसी जगह में काढ़ा जैसा कुछ पिलाया गया । उसकी ख़ासियत बताई गयी । वहाँ मौजूद कुछ पौधों की जड़ी-बूटियों से निकले तरह-तरह के तेल और उनके उपयोग के बारे में बताया। उनके चमत्कारिक फ़ायदे बताए। कुछ लोगों को वहाँ मौजूद आराम कुर्सी जैसी कुर्सी पर इस तरह लिटाकर जैसे दांतों के डाक्टर अपने क्लिनिक में लिटाकर दांत का इलाज करते हैं चेहरे पर लेप लगाया। लेप लगाते हुए उसकी ख़ासियत बताते गए। कुछ देर में लेप पोछने के बाद हुए फायदे को महसूस कराया गया। लोगों को अच्छा लगा।
वहाँ मौजूद औषधियों में से कुछ ख़रीदी भी गयीं। डायबिटीज़ में, घुटनों के दर्द में और सरदर्द में फ़ायदा करने वीली औषधि ली कुछ लोगों ने। डायबिटीज़ वाली दवा बहुत महंगी थी। जितनी बड़ी बीमारी, उतना मंहगा इलाज। अपने यहाँ बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार जैसी बड़ी बीमारियों के इलाज के लिए सरकारें न जाने कितनी रक़म फूंकती रहती हैं। लेकिन ये ऐसी बीमारियाँ इतनी आसानी से दूर कहाँ होती हैं। उस्ताद शायद दाग की पक्की शागिर्द होती हैं ये सब - हज़रत-ए-दाग जहाँ बैठ गए, वहाँ बैठ गये।
डायबिटीज़ के इलाज का लिए एक ख़ास तरह की लकड़ी का ग्लास जैसा बरतन था। बताया कि उसमें डालकर पानी पीने से डायबिटीज़ में फ़ायदा होता है। भारतीय रुपयों में क़रीब दस हज़ार रुपए का ग्लास। हमारे एक मित्र ने इसे ख़रीदा। लेकिन यहाँ आकर प्रयोग करने पर अभी तक तो कोई फ़ायदा नहीं हुआ है। शायद उपयोग का तरीक़ा कुछ अलग हो। लेकिन फ़िलहाल तो यही लग रहा कि पैसे बेकार गए।
दालचीनी का तेल जो घुटनों के दर्द के इलाज के लिए था वह भी असर नहीं किया। क्या पता भारत आते ही दाल और चीनी का गठबंधन टूट गया हो।
नर्सरी से वापस लौटते समय पानी पिलाने वाले के कर्मचारी से बात हुई। बुजुर्ग कर्मचारी ने बताया कि वह वहाँ दिन भर काम करता है। पानी पिलाना आदि का काम। पास के गाँव में रहता है वह। कुछ खेत और कुछ नारियल के पेड़ हैं उसके पास। नर्सरी में काम के बदले मिलने वाले पैसे के बारे में पूछने पर उसने बताया कि उसे 65 रुपए रोज के मिलते हैं। श्रीलंका के 65 रुपए मतलब भारत के लगभग 20 रुपए। श्रीलंका की न्यूनतम मज़दूरी 700 रुपए है। मुझे ताज्जुब लगा कि इतने कम पैसे में कैसे काम करता है कोई। शायद भाषायी समझ में अंतर होने के कारण मैंने कुछ ग़लत सुना हो इसलिए मैंने फिर से पूछा। लेकिन उसने अपनी मज़दूरी बढ़ाने से इंकार कर दिया।
बहरहाल, उसको पानी पिलाने के बदले कुछ टिप देकर हम लोग आगे चल दिए।

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