Friday, June 27, 2025

श्रीलंका में भक्त हनुमान मंदिर


 सीता जी की खोज के लिए हनुमान जी समुद्र लांघ कर श्रीलंका पहुँचे। श्रीलंका में वह जगह जहाँ माना जाता है कि वहाँ हनुमान जी समुद्र लांघकर उतरे थे वह जगह (गांव) रावण गोद (Ravana Goda) कहलाती है। इसी जगह के आसपास रावण से युद्ध के लिए रामसेना इकट्ठा हुई थी। तमिल में इस जगह को "Ramboda, Rampadai" कहते हैं। वहीं पास में ही Ramboda हनुमान मंदिर है।

रामकथा के अनुसार हनुमान जी ने लंका में पहुंचकर लंका राज्य का नुक़सान किया था, बाग उजाड़े थे, आग लगाई थी इसलिए वहाँ हनुमान जी उतने लोकप्रिय नहीं थे। लेकिन बाद में, पिछली सदी में, हिंदू संगठनों और स्थानीय तमिलों ने वहाँ हनुमान मंदिर बनाए और पूजा शूरू की।
इस लिहाज से देखा जाए तो एक समय श्रीलंका के लिए नुकसान पहुँचाने वाले रहे होंगे हनुमान जी। लेकिन अब उनके कई मंदिर बने हैं, उनमें पूजा होती है।
कोलम्बस को अमेरिका की खोज के लिए महान का दर्जा दिया जाता है। लेकिन हाल के वर्षों में अमेरिका पहुँचने पर कोलम्बस द्वारा किए गए अत्याचारों की कहानी सामने आने पर उसका भी पुनर्मूल्यांकन हुआ है। कोलम्बस की निंदा हुई है। अपने देश में भी आजकल गांधी जी की निंदा करने का और गोडसे को नायक बताने का चलन खुलेआम शुरू हुआ है। इससे साबित होता है कि समय के साथ समाज के नायकों, खलनायकों का पुनर्मूल्यांकन होता रहता है।
Raamboda में हनुमान मंदिर चिन्मय मिशन द्वारा बनवाया गया है। चिन्मय मिशन की स्थापना केरल में पैदा हुआ स्वामी चिन्मयानंद जी द्वारा 1953 में की गई थी। सन 1993 में स्वामी चिन्मयानंद जी के निधन के बाद उनके शिष्य स्वामी तेजोमयानंद के प्रयासों से यहाँ पर 1999 में 'भक्त हनुमान मंदिर' बनवाया गया।
यह जगह कोलंबो रास्ते में कोलंबो से क़रीब 150 किलोमीटर दूर है। हम लोग Damro चाय फैक्ट्री देखने के बाद दोपहर करीब 12 बजे 'भक्त हनुमान मंदिर' पहुँचे। पहाड़ी पर खूब खुली जगह पर मंदिर बना है। सामने हरियाली और पानी खूबसूरती का बखान कर रहे थे।
मंदिर की सीढ़ियाँ चढ़कर हम लोग ऊपर पहुँचे। दोपहर की धूप में सीढ़ियाँ और रेलिंग बहुत गरम हो गए थे। तप जैसे रहे थे। हम फटाफट सीढ़ियाँ चढ़ते हुए ऊपर मंदिर के प्रांगण में पहुँचे। मंदिर का अहाता पार करके मंदिर में पहुँचे। मंदिर में हनुमान जी की विशाल मूर्ति विराजमान है। यह मूर्ति श्रीलंका में हनुमान जी की सबसे ऊँची मूर्ति है।
मंदिर में दर्शन करके हम फटाफट नीचे आए। पास ही चिन्मय मिशन की किताबों की दुकान थी। वहाँ किताबों की दुकान में किताबें देखते हुए काफ़ी पी। श्रीलंका के सौ रुपए की एक कप काफ़ी। एक किताब ख़रीदी। जब तक साथ के लोग मंदिर दर्शन करके आयें अपन ने आसपास के नजारे को कायदे से देखा। सब लोगों के आने का बाद हम लोग आगे बढ़े।
दोपहर को एक जगह खाना खाने के पहले एक बड़ी दुकान में गए। वहाँ लकड़ी के सामान का अद्भुत कलेक्शन था। छोटे से छोटे लकड़ी के खिलौने, मूर्ति से लेकर विशालकाय लकड़ी के विभिन्न कलाकृतियाँ वहां मौजूद थीं। हम उनको देखकर ही चकित होते रहे। फोटो खींचते रहे। कुछ लोगों ने कुछ छुटकी टाइप कलाकृतियां याददाश्त के रूप में ख़रीदीं भी।
उस दुकान को ‘निपटाकर’ हम लोगों ने पास के एक फैमिली रेस्टोरेंट में खाना खाया। उस समय तक शाम के साढ़े चार बज गए थे। खाना खाकर हम लोग कोलंबो के लिए चले। कोलंबो वहाँ से क़रीब तीन घंटे की दूरी पर था। कोलंबो पहुँचकर हम लोग उसी होटल में रुके जहाँ शुरुआत में रुके थे। यह टूर के ज्यादातर लोगों के लिए प्रवास का आख़िरी दिन था। अगले दिन लोगों को भारत के लिए उड़ान पकड़नी थी।


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