आप मारवाड़ी हैं क्या? -टैक्सी ड्राइवर ने गाड़ी में बैठते ही पूछा।
हमने कहा नहीं। मैं मारवाड़ी नहीं हूँ। लखनऊ से आया हूँ।
टैक्सी मैंने गुवाहाटी के खानपारा मोड़ से पकड़ी। काजीरंगा नेशनल पार्क से गुवाहाटी आते हुए शहर से करीब दस किलोमीटर पहले पड़ता है खानपारा। खानपारा मोड़ के डिवाइडर पर एक महिला अनानास के फल को लाइन से सजाकर बेचने के लिए रख रही थी।
खानपारा मोड़ पर शिलांग जाने के लिए कई टैक्सियाँ खड़ी थीं। करीब 90 किलोमीटर दूर है खानपारा मोड़ से शिलांग। साझे की टैक्सी 500 रुपए की। अकेले जाने के लिए 2000 रुपए। साझे की टैक्सी के लिए बाकी सवारी आने में कितनी देर लगती इसका अंदाजा नहीं था। इसलिए अकेले ही चल दिए।
थोड़ी दूर जाने पर किसी का फ़ोन आया। ड्राइवर फ़ोन पर चिल्लाते हुए उसे डाँटने लगा। भाषा समझ में नहीं आयी लेकिन यह अंदाज़ लग गया कि वह सामने वाले को हड़का रहा था। हड़काने में तल्लीन ड्राइवर को देखकर मुझे लगा कि कहीं यह गाड़ी इधर-उधर न भिड़ा दे।
फ़ोन पर हड़काने के कार्यक्रम खत्म होने के बाद मैंने ड्राइवर से कहा कि हमे तो डर लग रहा था तुम्हारे चिल्लाने से। इस पर उसने हँसते हुए बताया जिसका फ़ोन आया उसको कुछ देर पहले उसने फ़ोन किया था। उसने उठाया नहीं था इसलिए वह उसको हड़का रहा था कि जब ज़रूरत थी तब उसने फ़ोन क्यों नहीं उठाया।
रास्ते में सब दुकानें बंद थीं। ड्राइवर ने बताया कि इतवार को सब बंद रहता है। कोई दुकान खोलेगा तो फ़ाइन लगेगा।
ड्राइवर से लखनऊ, कानपुर, दिल्ली, चण्डीगढ़ के बारे में कुछ-कुछ कहता रहा। उसकी बातचीत से अंदाज़ हुआ कि उसको इन जगहों के बारे में उतना ही पता है जितना नार्थ ईस्ट के बारे में शेष भारत के लोगों को पता है।
ड्राइवर ने बताया -"यहाँ सब बड़ा-बड़ा दुकान, काम-काज मारवाड़ी लोग का है। सरकार पर पूरा कब्जा है मारवाड़ी का। वो जो चाहता है वही होता है सरकार में। बहुत पैसा देता है चंदा में सरकार को। काहे नहीं मानेगा सरकार उसका बात? जरूर मानेगी। मानना पड़ेगा उसको।"
मुझे लगा कि ड्राइवर मेघालय के बहाने पूरी दुनिया की बात कर रहा है। दुनिया के सब देशों की सरकारें वहाँ के पैसे वाले, कॉर्पोरेट के कब्जे में हैं। जो वे चाहते हैं, सरकार में बैठे लोग वैसा ही करते हैं।
गाड़ी चलाते-चलाते ड्राइवर ने केले के पत्ते जैसी मुलायम पुड़िया से पान का पत्ता निकाला। उसमें सुपाड़ी और कुछ और मिलाकर पान बनाया । खाया।
एक हाथ से स्टीयरिंग थामे-थामे पान बनाते देखकर मुझे फिर लगा कि कहीं इधर-उधर न हो जाये गाड़ी। मैंने कहा भी -'आराम से पान बना लो फिर गाड़ी चलाओ।' लेकिन उसने अपने अंदाज़ में ही काम किया। पान खाने के पहले मुझे भी पूछा पान खाने के लिये। मैंने मना कर दिया।
मेघालय के बारे में आपनी राय बताते हुए कहा -'यहाँ क्राइम कमती है। चोरी कम है। आप अपना सामान कहीं छोड़ दें तो कोई छुएगा नहीं। वापस जाएँगे तो मिल जाएगा।'
इंदौर की सोनम रघुवंशी द्वारा अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या का विस्तार से वर्णन किया ड्राइवर ने। एक्शन करते हुए गर्दन पर वार करने का पोज बनाते हुए बताया कि लोकल लोग बताया कि कैसे उसने सिक्योरिटी लेने से मना किया था। हफ्तों तक मीडिया की खुराक बने रहे किस्से का फिर से विस्तृत वर्णन सुनने को मिला।
अपने बारे में बताया पहले दारू खूब पीता था। अब छोड़ दिया। केवल पान खाता है। सेहत का ख्याल जरूरी है।
परिवार के बारे में बताते हुए कहा -'मेरा एज 40 साल है। बीबी बीस साल के करीब है। दस साल पहले शादी बनाया। एक लड़का है। आठ साल का।'
हमने पूछा कि बीस साल की बीबी से दस साल पहले शादी किया ऐसा कैसे? क्या उस समय बीबी दस की थी? इतना अंतर कैसे उमर में?
इस पर उसने पत्नी की उमर में दो-चार साल की बढ़ोत्तरी करते हुए कहा -'दो चार साल ऊपर होगा बीबी का उमर।'
इतने उमर के अंतर के बावजूद लड़की के घर वाले मान कैसे गए शादी के लिए यह पूछने पर उसने कहा -'हम सीधा जाकर लड़की की माँ से बोल दिए कि शादी बनाना है मुझे इससे। वो राजी हो गई।'
शादी का कारण पत्नी की ख़ूबसुरती बताते हुए उसने मोबाइल पर अपने परिवार के कई फोटो दिखाये। खूबसूरत पत्नी के साथ खुश -खुश ड्राइवर को देखकर उनकी उम्र में अंतर लगा नहीं।
हमने कहा -'तुम्हारी बीबी तुमको बुड्ढा कहती होगी?'
इस पर हँसते हुए कहा उसने -'हाँ कहती है कभी-कभी। इस पर मैं उससे कहता हूँ कि जब मैं मर जाऊँगा तो तुम शादी बना लेना। इस पर वह मुझे पीटती है प्यार में कि ऐसा क्यों बोलता मैं।'
पत्नी भी काम करती है। गोवाहाटी में वह जनरल मर्चेंट की दुकान चलाती है।
रास्ते में टोल पड़ा। कानपुर- लखनऊ हाईवे के टोल प्लाजा की तरह ही गोवाहाटी -शिलांग के बीच में पड़ता है टोल। 95 रुपए टोल फीस पड़ी।
रास्ते में पैसे भुगतान के तरीके पर बात हुई। हमने कहा हम डिजिटल पेमेंट कर देंगे। ड्राइवर का कहना था कि उसको नक़द पैसे चाहिए। हमने कहा कि ठीक है कहीं बैंक से निकालकर दे देंगे।
शिलांग में एक जगह गाड़ी रोककर उसने मुझसे प्रस्ताव किया कि हम दुकान वाले को दो हज़ार रुपये पेमेंट कर दें और वह दुकान वाले से दो हज़ार रुपये ले लेगा। हमने उससे कहा -'चिंता न करो मेरे पास हैं। मैं दे दूँगा नकद।' इस पर खुश होते हुए उसने जो कहा उसका मतलब था -'जब पैसे थे पास में तो बैंक से पैसे निकालने का नाटक क्यों किया?'
पैसे भुगतान करने के बाद चलते समय उसने अपना नम्बर दिया। उसमें जो नाम आया वह उसके नाम से अलग था। मैंने पूछा तो उसने बताया कि यह फ़ोन उसकी पत्नी का है। डिजिटल पेमेंट करते तो पैसे पत्नी के खाते में जाते। नकद भुगतान में पैसे उसके पास रहेंगे।
मुझे लगा कि मातृसत्तात्मक परिवार होने के कारण पैसे का नियंत्रण पत्नी के हाथ में होगा। पत्नी के पास पैसे चले जाने के बाद मिलने में परेशानी होगी। इसलिए नकद पैसे मांगे होंगे उसने। सरकार से टैक्स चोरी की तर्ज पर घर की सरकार से भी टैक्सी चोरी का एक उदाहरण देखने को मिला इस बहाने।
ड्राइवर मुझे मेरे रहने के स्थान पर छोड़कर चला गया। अपन शिलांग घूमने के लिए जगहें खोजने लगे।
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