गोवाहाटी में आने का मुख्य आकर्षण यहाँ डॉक्टर एम के लंगथासा Mohanta Langthasa और कर्नल रावत से मिलना था। कर्नल रावत शाहजहांपुर में निर्माणी के सुरक्षा अधिकारी थे। उनसे हमारे प्यारे पारिवारिक संबंध हैं। उनसे और उनके परिवार से मिलना इस यात्रा की सुखद उपलब्धि है। कर्नल रावत असम में काफ़ी समय रहे हैं। कई आपरेशन में भाग लिया जिनके बारे में वे अब जब किताबों में पढ़ते हैं तो उनको लगता है -'इसके बारे में तो मुझे लिखना चाहिए।' असम के बारे में तमाम जानकारियां उन्होंने बातचीत के दौरान साझा की हैं। उनको पढ़ने का भी काफ़ी शौक है। उनके घर की लाइब्रेरी में कई महत्वपूर्ण किताबें देखी मैंने। लगा कि ये किताबें हमको भी पढ़नी चाहिए। उनको हमने अपने अनुभवों पर किताब लिखने के बारे उकसाया है। क्या पता आने वाले समय में उनकी लिखी किताबें पढ़ने को मिलें।
डॉक्टर एम के लंगथासा हमारे विभाग के डॉक्टरो के वरिष्ठतम पद (DHS) पर कई साल काम करने के बाद 15 साल पहले रिटायर हुए हैं। उनके समय में किए गए काम को लोग आज भी याद करते हैं। मैं कानपुर और शाहजहांपुर में पोस्टिंग के दौरान उनसे व्यक्तिगत और पारिवारिक संपर्क रहा। उनको लोग एक बेहतरीन डॉक्टर और प्यारे इंसान के रूप में याद करते हैं। आयुध निर्माणियों के तमाम डॉक्टरों के वे रोल मॉडल हैं।
डॉक्टर लंगथासा जी लंबे समय बाद मुलाक़ात हुई। तमाम पुरानी यादों को दोहराया गया। गोहाटी घूमने के बारे में बताया तो डॉक्टर साहब ने अपनी गाड़ी निकाली और साथ घूमने निकल लिए। आहिस्ते-आहिस्ते शहर की सड़को पर घूमते हुए कई जगहें दिखाईं।
गोहाटी की कचहरी के बाहर वकीलों की कम भीड़ देखकर लगा यहाँ मुकदमे कम हैं या वकील। वैसे भी लाहे-लाहे जीने वाले समाज में कोर्ट कचहरी का क्या काम ?
सड़क पर भीड़ थी। कई जगह हल्का जाम भी। जगह-जगह फ्लाई ओवर बनते दिखे। कुछ जगह सड़क पार करने के लिए पैदल पार पथ बने थे। उनमें से कुछ में सीढ़ियों के साथ एस्केलेटर भी लगे थे। लोग उन पर चढ़कर सड़क पार करते दिखे।
हम लोग ब्रह्मपुत्र नदी किनारे बने रिवर फ्रंट को देखने गए। वहाँ एक बड़े पुराने बंगले को पुरातात्विक संग्रहालय का रूप दिया गया है। आसाम से जुड़ी चीजों का संग्रह है। तरह-तरह के वाद्य यंत्र , कला कृतियाँ और पेंटिंग भी।
संग्रहालय की तरफ़ जाते हुए एक पेड़ पर लड़के हुए तमाम चमगादड़ दिखे। सर के ऊपर पेड़ पर लटके चमगादडों को देखकर लगा दुनिया के तमाम देशों में ताकतवर पदों पर काबिज नुमाइंदे हैं जो दुनिया को उलटी तरफ़ ले जाने की पूरी करने में जुटे हैं। लड़ाई के सारे इंतज़ाम करने के बाद शांति के लिए कमेटी बनाने के लिए झगड़ रहे हैं।
संग्रहालय का टिकट सौ रुपए है। 75 वर्ष से अधिक की उम्र के लोगों का प्रवेश मुफ्त है। डाक्टर साहब 75 पार हैं। उनका टिकट नहीं पड़ा। किसी ने उनसे प्रमाण भी नहीं मांगा। लोग उनको जानते हैं। वे अक्सर यहाँ की लाइब्रेरी में किताबें देखने आते रहते हैं।
संग्रहालय के सामने ही स्टारबक्स का कॉफ़ी हाउस है। हम लोगों ने वहाँ कॉफ़ी पी। बाहर बैठकर कॉफ़ी पीते हुए आर्डनेंस फैक्ट्री से जुड़े हुए कई अधिकारियों से बातचीत की। सबको एक दूसरे के फ़ोन नम्बर दिए। सबका धन्यवाद हासिल किया।
कॉफ़ी पीने वहीं पास में पार्क में टहलते रहे। एक जगह जमींन पर शतरंज के बड़े आकार के मोहरे रखे हुए थे। पार्क में आते-जाते लोग उन मोहरों को उठाकर एक खाने से दूसरे में रखते जा रहे थे। लोगों द्वारा उठाकर रखे जाने पर ऐसा लगता मानो सही में कोई प्यादा, कोई वजीर, कोई राजा एक जगह से उठाकर दूसरी जगह रख दिया गया हो। एक दर्शक ने राजा का मोहरा उठाकर दूसरी जगह रखा तो ऐसा लगा जैसे किसी बाहुबली देश ने दूसरी/ तीसरी दुनिया किसी देश के प्रशासक को उठाकर उसकी जगह कोई दूसरा प्रशासक रख दिया हो।
शतरंज के खेल के बगल में ही सांप-सीढ़ी के खाने बने हुए थे। पास ही एक बड़ा सा पांसा रखा हुआ था। एक युवा जोड़ा वहाँ पासा फेंकता हुआ सांप-सीढ़ी का खेल खेल रहा था। लड़का पाँसा फेंक रहा था। जो नंबर आ रहा था, लड़की उसके हिसाब से आगे-पीछे घूम रही थी। कुछ देर में लड़की पाँसा फेंकने लगी और लड़का वहाँ बने खानों में टहलने लगा। उनको खेलते देखकर हम भी वहाँ खड़े हो गए। कुछ देर में उनसे बतियाने भी लगे।
बातचीत के दौरान पता चला कि लड़की आसाम पब्लिक सर्विस की तैयारी कर रही है। दोस्त के साथ घूमने आयी है। लड़के का नाम बेदांत, लड़की का नाम डोरियोली (Doriyoli) । डोरियोली पहली बार सुना था। मतलब पूछने पर उसने बताया -नदी की धारा।
हमने उनका फ़ोटो खींचा और उनको भेजने के लिए उनका नंबर मांगा। लड़के ने एयरड्रॉप से भेजने को कहा। एयरड्रॉप से मुझे लक्षद्वीप का एयरड्रॉप का क़िस्सा याद आ गया। (https://www.facebook.com/share/p/17wW6YceMY/)।
शतरंज और सांप सीधी के खेल वाले हिस्से निकलकर हम लोग देर तक ब्रह्मपुत्र नदी के नए बने रिवरफ्रंट पर टहलते रहे। लोग वहाँ अपने परिवार वालों के साथ, दोस्तों के साथ घूमने आए थे। युवा लोग ज़्यादा दिखे। सब फोटो खींचने, खिंचवाने में जुटे थे। लड़कियां खासतौर से पोज बनवा कर फोटो खिंचाते, सेल्फी लेती दिखीं। एक जगह हथेलियों के आकार की कलाकृति में आसाम का नक्शा बना था। उसके सामने खड़े होकर एक युवती अपना फ़ोटो खिंचा रही थी। उसका साथी बार-बार फ़ोटो ले रहा था। कई फोटो लेने के बाद संतुष्ट हुआ और आगे बढ़ा।
सामने ब्रह्मपुत्र नदी बह रही थी। नदी के बीच में बने उमानंदा मदिर देखने लोग नाव से जा रहे थे। हमने उसको देखना अगले दिन के लिए स्थगित कर दिया। रोप वे से नदी को ऊपर से देखने का विचार था लेकिन उस दिन मरम्मत के लिए रोप वे बंद था।
पार्क के एक कोने में कुछ लोग डांस करते दिखे। पास गए तो देखा कि एक बच्चे के साथ उनके गुरु जी डांस इंडिया डांस टाइप की प्रैक्टिस कर रहे थे। बच्चे को उछालकर सर तक ले जाते फिर उलटा करके डांस करते हुए डांस स्टंट करते लगे गुरु जी। 9 साल के बच्चे विहान की माँ अनीता अपने बच्चे को गुरु जी के साथ स्टंट डांस करते हुए देख रही थी। बच्चे के पिता सीआरपीएफ में नौकरी करते हैं।
हमने बच्चे की माँ से पूछा -'क्या इसे डांस इंडिया डांस जैसे किसी कम्पटीशन में भेजने का विचार है? ' इस पर उन्होंने कहा -' सिखा रहे हैं। सीख जायेगा तो जाएगा। अभी से कुछ 'कहने नहीं सकते'।'
हम लोग बच्चे को शुभकामनाएँ देकर आगे बढ़ गए।
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