फ़ुरसतिया

हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै

Sunday, November 28, 2004

मेरा पन्ना मतलब सबका पन्ना

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मैं काफी दिनों से विभिन्न चिट्ठाकारों के चिट्ठों के बारे में लिखने की सोच रहा था. ठेलुहा , हां भाई , रोजनामचा , मेरा पन्ना .पंकज की मोहनी स...
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Thursday, November 25, 2004

आत्मनिर्भरता की ओर

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लिखने के तमाम बहानों का इस बीच खुलासा हो चुका है.एक और कारण श्रीलाल शुक्ल जी ने अपने एक लेख(मैं लिखता हूं इसलिये कि...)में बताया है:- ...
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Thursday, November 18, 2004

कविता का जहाज और उसका कुतुबनुमा

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हम कल से अपराध बोध के शिकार हैं.अलका जी की कविता जहाज पर हमारी टिप्पणी के कारण पंकज भाई जैसा शरीफ इंसान चिट्ठा दर चिट्ठा टहल रहा है.कहीं मा...
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Sunday, November 14, 2004

`भारतीय संस्कृति क्या है

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जबसे पंकज ने पूंछा-भारतीय संस्कृति क्या है तबसे हम जुट गये पढने में.सभ्यता,संस्कृति क्या है .भारतीय संस्कृति और सभ्यता के बारे में जित...
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Monday, November 08, 2004

झाङे रहो कलट्टरगंज

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मैं काफी दिनों से कानपुर के बारे में लिखने की सोच रहा था.आज अतुल के फोटो देखे तो लगा कि लिखने के लिये सोचना कैसा ?अगर लिखने के लिये भी सोचना...
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Sunday, October 31, 2004

क्या देह ही है सब कुछ?

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"क्या देह ही है सब कुछ ?" इस सवाल का जवाब पाने के लिये मैं कई बार अपनी देह को घूर निहार चुका हूं-दर्पण में.बेदर्दी आईना हर बार ...
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Saturday, October 30, 2004

सफल मनोरथ भये हमारे

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आखिर हमनें जिता ही दिया आस्ट्रेलिया को रिकार्ड अंतर से.नागपुर टेस्ट की शानदार हार बताती है कि सच्चे मन से जो मांगा जाता है वो मिल के रहता ह...
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Tuesday, October 26, 2004

हम भ्रष्टन के भ्रष्ट हमारे

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आजकल मैं देश के तकनीकी विकास के लिये बहुत चिन्तित रहता हूं.इन्टरनेट तकनीकी विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है.मैं मानता हूं कि 'पीसी' मे...
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Thursday, October 14, 2004

आधे हाथ की लोमडी,ढाई हाथ की पूंछ

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मेरी पत्नी का नाम आशा नहीं है और एक पत्नीशुदा व्यक्ति होने के कारण मेरा 'आशा'से फिलहाल कोई संबंध नहीं है.पर इस देश का यारों क्या कहन...
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Wednesday, October 06, 2004

गुडिया जो मेले में कल दुकान पर थी

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जब इश्क की बात चलती है तो मुझे 'वाली असी' का शेर याद आता है:- अगर तू इश्क में बरवाद नहीं हो सकता, जा तुझे कोई सबक याद नहीं हो ...
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Sunday, October 03, 2004

विकल्पहीन नहीं है दुनिया

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कल गांधी जयंती थी.कुल ६१ लोगों की बलि दी गयी-नागालैंड और असम में.शान्ति और अहिंसा के पुजारी का जन्मदिन इससे बेहतर और धमाकेदार तरीके से कैसे ...
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Tuesday, September 21, 2004

तीन सौ चौंसठ अंग्रेजी दिवस बनाम एक हिंदी दिवस

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हिंदी दिवस आया -चला गया.पता ही नहीं चला.हम कुछ लिखे भी नहीं .अब चूंकि शीर्षक उडाया हुआ( ठेलुहा .कहते हैं कि यह हमारा है उनके दोस्त बताते हैं...
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Saturday, September 18, 2004

ब्लाग को ब्लाग ही रहने दो कोई नाम न दो

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हम भावविभोर हैं. हमारा स्वागत हुआ.हार्दिक.हमारा कंठ अवरुद्द है.धन्यवाद तक नहीं फूटा हमारा मुंह से.सही बात तो यह कि हम अचकचा गये. देबाशीषजी ....
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Monday, September 13, 2004

गालियों का सांस्कृतिक महत्व

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" आयाहै मुझे फिर याद वो जालिम गुजरा जमाना बचपन का" हास्टल के दिन.पढाई की ऊब को निजात पाने के लिये लडके अपने-अपने कमरों से बाहर निक...
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Wednesday, September 08, 2004

हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै?

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ब्लाग क्या है?इसपर विद्घानों में कई मत होंगे.चूंकि हम भी इस पाप में शरीक हैं अत: जरूरी है कि बात साफ कर ली जाये.हंस के संपादकाचार्य राजे...
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Saturday, September 04, 2004

नहीं जीतते- क्या कर लोगे?

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कल लखनऊ में कानून और व्यवस्था का भरत मिलाप हो गया. काफी खून बह गया.पुलिस खुश कि गोली नहीं चली.बेचारा जो दरोगा समझाने की कोशिश में था वो पह...
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Friday, August 27, 2004

फुरसतिया बनाम फोकटिया

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जब मैनें देखादेखी ब्लाग बनाने की बात सोची तो सवाल उठा नाम का.सोचा फुरसत से तय किया जायेगा.इसी से नाम हुआ फुरसतिया.अब जब नाम हो गया तो...
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Friday, August 20, 2004

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अब कबतक ई होगा ई कौन जानता है
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