फ़ुरसतिया
हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै
Saturday, May 28, 2005
ऐसा पहले कभी नहीं हुआ
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Browse: Home / कविता / ऐसा पहले कभी नहीं हुआ By फ़ुरसतिया on May 28, 2005 मैं , अक्सर, एक गौरैया ...
Wednesday, May 25, 2005
चिट्ठी चिट्ठाकारों को बमार्फत रवि रतलामी
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प्रिय रतलामीजी, मैं चिट्ठी बहुत पहले लिखना चाह रहा था।पर लिखना टलता गया। हुआ कुछ ऐसा कि मैंने पहले तय किया कि लिखूँगा पूरी दुनिया की हालत पर...
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Tuesday, May 17, 2005
आज मेरे यार की शादी है
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Browse: Home / बस यूं ही / आज मेरे यार की शादी है By फ़ुरसतिया on May 17, 2005 बनारस हमें कई तरह से...
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Monday, May 02, 2005
ठेलुहई की परम्परा
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Browse: Home / बस यूं ही / ठेलुहई की परम्परा By फ़ुरसतिया on May 2, 2005 ...
Saturday, April 30, 2005
आशा ही जीवन है
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वैसे तो यह मान लेने में मुझे कोई एतराज नहीं होना चाहिये कि आशा ही जीवन है.पर जहां मैं सोचता हूं वहीं मामला गड़बड़ा जाता है.आशा ही जीवन है...
Thursday, April 21, 2005
वियोगी होगा पहला कवि
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मैं आमतौर पर खुशमिज़ाज इंसान के रूप में बदनाम हूं.किसी किसिम की चिरकुट-चिंता से मुक्त.पर कभी-कभी कुछ-कुछ होने लगता है.क्या होता है ब...
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