फ़ुरसतिया
हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै
Thursday, August 13, 2015
मुंह सूख जाता है आवाज लगाते–लगाते
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सुबह दफ्तर जाते हुए पुलिया के पास ही साइकिल पर रंगबिरंगी झाड़ू लादे भाईजी से मुलाकात हुई। आधारताल में रहते हैं। सुबह–सुबह झाड़ू बेचने के ल...
तोरा मन दर्पण कहलाये
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तोरा मन दर्पण कहलाये भले बुरे सारे कर्मों को देखे और दिखाए। 'पंकज टी स्टाल' पर गाना बज रहा है। आज सुबह पुलिया पर दो रिटायर्ड लोग ...
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Wednesday, August 12, 2015
’सूजन’ में दर्द का होना जरूरी है
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हम जब बीएचयू में उच्च शिक्षा रत थे तो साथी थे बलिया जिले के यादव जी। कविताओं से सहज लगाव होने के चलते हम अक्सर कविता गाते/ गुनगुनाते रहते ...
Tuesday, August 11, 2015
तुम्हारी याद आई औ मन गुदगुदा गया
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तुम्हारी याद आई औ मन गुदगुदा गया एक मिनट , जरा कोई फोन आ गया। धनिया की जगह फिर से टमाटर ले आये दुकान पर तेरा चेहरा फिर याद आ गया। प...
धर्म कोई हो मूल स्वभाव बना रहता है
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रायमन कुजूर और मारिया एक्का आज सुबह देर से जगे। मन नहीं था निकलने का लेकिन कुछ देर अलसाये लेटे रहने के बाद झटके से उठ गए। पुलिया पर फै...
Sunday, August 09, 2015
सब अपनी मर्जी की करत हैं
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गुड्डू पुत्र रामफल यादव आज दिन भर आराम करते ही बीती। बीच में कुछ पोस्ट फेसबुक से उठाकर ब्लाग पर डाली।घर में और कुछ मित्रों से बतियाये ...
Saturday, August 08, 2015
हफ्ते में एकाध मंगलवार/शनिवार और होते
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पुलिया के पास ये दो महिलाएं मिलीं।तेजी से घर की तरफ जाती हुई। लाल माटी में रहती है।शनिवार को हनुमान मन्दिर से शनिचर की मंगनई करके लौट...
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