फ़ुरसतिया

हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै

Wednesday, January 31, 2018

दिल्ली में साहित्यकार साहित्य के अलावा सब कुछ रचते हैं-- यशवन्त कोठारी

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1. दिल्ली में साहित्यकार साहित्य के अलावा सब कुछ रचते हैं। दिल्ली-वाद ने हिंदी रचनात्मक साहित्य का बड़ा नुकसान किया है। 2. आजकल के सम...
Monday, January 15, 2018

एक तसल्ली भरा इतवार

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82 साला बुजुर्गवार अल्ताफ कल सुबह तसल्ली से उठे। इतवार देर से जगने, उठने के पहले करवट बदलने और फ़िर पलटकर सो जाने का दिन होता है। ल...
Thursday, January 11, 2018

पुस्तक मेले में किताबें

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हाल नम्बर 12, शॉप नम्बर 375 , रीड पब्लिकेशन जाड़े में खाली रेलें ही नहीं बल्कि किताबें भी देरी से पहुंच रहीं हैं। गनीमत यही कि किता...
Wednesday, January 10, 2018

कोहरा

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आज सुबह अलार्म बजा। नींद खुली। फ़िर आंख भी। लगाया हमने ही था लेकिन फ़िर भी गुस्सा आया अलार्म पर। अलार्म ने तो अपनी ड्यूटी बजाई फ़िर भी उस प...
Monday, January 01, 2018

हमारी अम्मा कलेट्टर गंज के पास पराठे बेंचती थी

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Add caption साल सरपट निकल रहा था। हम उसको विदा करने नदी तट तक गए। नुक्कड़ पर ई रिक्शा दीवार की तरफ मुंह किये खड़े थे। बगल से निकले तब भ...
Friday, December 29, 2017

झाड़े रहो कलट्टरगंज

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और अंतत: किताब तैयार ही हो गयी -झाड़े रहो कलट्टरगंज। इस साल की तीसरी किताब। कल छापाखाना में गई किताब। इसके पहले ’सूरज की मिस्ड कॉल’ और ’आ...
Thursday, December 28, 2017

ये दुनिया बड़ी तेज चलती है

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अंतरिक्ष बहुतों की तरह हमारे लिये भी जिज्ञासा का विषय रहा है। बचपन से अब तक इत्ती बातें पढ़ीं हैं कि बहुत कुछ तो गड्ड-मड्ड हो गयी हैं। कोई ...
Sunday, December 24, 2017

नानी की दुकान

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भोपाल की सुबह बड़े तालाब के किनारे टहलते हुए बीती। लौटते हुए नानी की दुकान पर चाय पी गयी। पोहा खाया गया। दो महीने हुए नानी को अपनी दु...

भोपाल में प्रवासी मजदूर

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सवेरे जब आगे चले से तो देखा एक भाई जी तालाब की मुंडेर पर बैठे दातुन कर रहे थे। पता किया तो मालूम हुआ कि भाई जी बैतूल के एक गांव के र...
Saturday, December 23, 2017

अपन सही तो सब सही

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भोपाल स्टेशन गाड़ी पहुंची डेढ़ बजे। मल्लब केवल 4 घण्टे लेट। स्टेशन पर ही चाय पी। घर के बाद की पहली ठीक चाय। इसके पहले कानपुर , झांसी...
Thursday, December 21, 2017

झाड़े रहो कलट्टरगंज - नया हास्य-व्यंग्य संग्रह

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पिछले इतवार को लैपटॉप लेकर बैठे तो पिछले चार-पांच साल में लिखे गये हास्य-व्यंग्य लेख उछल-उछलकर हल्ला मचाने लगे कि हमको किताब में कब जगह...
Tuesday, December 19, 2017

चुनाव के बाद वोटिंग मशीन

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1. गुंडा जब अपने दीन-धरम छोड़ देता है तो नेता हो जाता है। 2. जिन महिलाओं से छेड़छाड़ होती है उसके जिम्मे सफ़ाई देने का ही काम बचता है। 3. गु...
Friday, December 08, 2017

सड़क पर जाम, एक नया झाम

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समय के साथ तमाम परिभाषायें बदल जाती हैं। पहले दूरी का मात्रक मील/किलोमीटर हुआ करता था। फ़िर घंटे/दिन हुआ। किदवई नगर से स्टेशन आधा घंटा ...
Sunday, December 03, 2017

एक गुनगुनी सुबह

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गंगा स्नान करके लौटती महिला सुबह टहलने निकले। सुलभ शौचालय दिखा। कुछ लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। एक आदमी अखबार पढ़ रहा था। शायद ...
2 comments:
Tuesday, November 28, 2017

दुनिया बावजूद तमाम चिरकुटईयों के बहुत खूबसूरत है

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कल दफ़्तर के लिये निकले। तिराहे पर मिनी जाम लगा था। एक स्कूटर और ऑटो में टक्कर हुई थी। स्कूटर दोनो टायर करवटियाये सड़क पर लेटा था। ऑटो बगल ...
Thursday, November 23, 2017

हर व्यक्ति अपने में मठाधीश है

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कल मंडी हाउस में चाय पी गयी। पहुंचते ही एक सर्वेरत बालक ने पकड़ लिया। किसी कंपनी में काम करता है। कंपनी की तरफ़ से सर्वे का काम मिला है। व...
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अनूप शुक्ल
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