फ़ुरसतिया

हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै

Monday, July 30, 2018

मांगने वाले नखरे के अधिकारी नहीं रह जाते

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मांगने वाले लाइन से बैठे हैं कल सबेरे निकले टहलने। अगले पहिये में हवा कुछ कम थी। लेकिन चल चकाचक रही थी। जरा भी नखरे नहीं। हमारी साइकिल...
Saturday, July 28, 2018

डम्प्लाट दुनिया में अपना सूरज

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बिस्तर पर पड़े-पड़े मुंह उचकाकर सूरज भाई को देखते हैं। गायब हैं। शायद देर रात तक चंद्रग्रहण देखते रहे होंगे। वैसे भी सूरज भाई अपने हिसाब से ...
Thursday, July 19, 2018

तकनीेक के लफ़ड़े

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यह 2016 का फ़ोटो है। गोवा में समुद्र तट पर चाय पीते हुये। तकनीक की अज्ञानता भी मजेदार लफ़ड़े कराती है। पिछले साल हम अपने मोबाइल में अपन...
Wednesday, July 18, 2018

जियो बालक ! शाबास

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इतवार को हमारे छोटे सुपुत्र न्यूयार्क में हवाई कुदान करते पाये गये। नई और पहली नौकरी ज्वाइन करने के बाद कम्पनी (गोल्डमैन सैक्श) की तरफ़ से ...
Tuesday, July 17, 2018

बहुत कम में खुश हो जाता आदमी

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सड़क किनारे चूल्हे में रोटी सेंकते कामगार बादल एक खेप बरसकर फ़ूट लिये। पुलों, इमारतों का उद्घाटन करके निकले लिये नेताओं की तरह। जिन्दगी ...
Friday, July 13, 2018

साल की पहली बरसात

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पहली बरसात में धुला घर का लान आखिर पानी यहां भी बरसा। पूरे महीने तरसाने के बाद झमाझम हुई। किसी दफ्तर में होता बादल तो आते ही दौड़ा लि...
Wednesday, July 11, 2018

बिल्ली रास्ता काट गई

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कल घर से निकले ही थे कि सामने बिल्ली दिखी। शायद टहलने निकली होगी। दिख गयी तो देख लिया। देखता रहा कुछ देर। फ़िर लगा कि लगातार देखना घूरना ...

राजनीति की मुश्किल समझो भैया

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राजनीति की मुश्किल समझो भैया, कैसे आयें नेता अच्छे,बढिया भैया। ढेर पईसा चहिये चुनाव लड़ने को, वोटर को दारू-पानी चहिये भैया। जाति-वाति भ...
Tuesday, July 10, 2018

जल है तो कल है

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बन्द होने की कगार पर बहुत दिनों से बन्द लाल इमली हर शहर अपने में अनूठा है। कानपुर भी। सालों साल हो गए लाल इमली को देखते। किसी कम्युन...
Tuesday, July 03, 2018

जाम का झाम

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Add caption घर से निकले सुबह। बाहर जाम लगा है। ओवरब्रिज बन रहा है। सड़क दोनों ओर खुदी है। फुटपाथ के बराबर बची है सड़क दोनो...
Saturday, June 30, 2018

फ़ुटबाल

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मानसून आने की खबर हो चुकी है। लेकिन बरस नहीं रहा है। लगता है कहीं रुककर फ़ुटबाल मैच देखने लगा है। पूरी दुनिया में आजकल फ़ुटबाल मचा है न! ...
Friday, June 29, 2018

व्यंगैत, लिखैत की इंद्रधनुषी छटाएँ

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व्यंग्य जीवन से साक्षात्कार कराता है,जीवन की आलोचना करता है,विसंगतियों, मिथ्याचारों और पाखण्डों का परदाफाश करता है। - परसाई आज देश भर के...
Tuesday, June 26, 2018

मुस्ताक अहमद युसुफ़ी के पंच

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1. इस्लाम के लिये सबसे ज्यादा कुर्बानी बकरों ने दी है। 2. मर्द की आंख और औरत की जबान का दम सब से आखिर में निकलता है। 3. इस्लामिक दु...
Monday, June 25, 2018

गंगा किनारे स्कूल

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गंगा के तट पर इतवारी स्कूल इतवार को टहलने निकले। साईकल किसी नवजात सरकार सी उचकती-फुचकती चल रही थी। नई सरकारें कसम खाते ही हर तरफ फ़ीता ...
Sunday, June 24, 2018

मुश्ताक अहमद युसुफ़ी नहीं रहे

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मुस्ताक अहमद युसुफ़ी आज फ़ेसबुक पर एक पोस्ट से पता चला कि मुश्ताक अहमद युसुफ़ी साहब नहीं रहे। 20 जून को उनका इंतकाल हुआ। हिन्दी व्यंग्य क...
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