फ़ुरसतिया

हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै

Monday, October 31, 2022

गंगा तट पर छठ पूजा

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  सुबह टहलने निकले। सड़क गुलजार थी। बच्चे स्कूल जा रहे थे। दो बच्चियां बतियाते हुए आहिस्ते-आहिस्ते जाते दिखीं। एक महिला टहलते हुए अपने पीछे आ...
Friday, October 21, 2022

दाल रोटी चल जाती है

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नेपाल के संस्मरण लिखने के चलते लोकल किससे पिछड़ रहे। मेक इन इंडिया के जमाने में यह अच्छी बात नहीं। इसलिए बीच-बीच में कानपुरिया किससे भी चलते...
Tuesday, October 18, 2022

यादों की फाइलें और बतियाने का मन

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कम्प्यूटर में किसी फाइल को सेव करते हैं तो कम्प्यूटर पूछता है-'ये फाइल इस नाम से सेव है। क्या आप इसको रिप्लेस करना चाहता हैं?' अक्सर...
Monday, October 17, 2022

ज्यादातर लोग किताबें पलटकर देखते हैं , रख देते हैं

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शुक्लागंज से घंटाघर ई-रिक्शा से पहुंचे 'पंदा' रुपए में। सबेरे से चाय नहीं पिए थे। एक ठेलिया पर चाय बन रही थी। गरम खौलती चाय। ठेलिया ...
Sunday, October 16, 2022

इंसान को अपनी कमाई का दस प्रतिशत हिस्सा परोपकार में लगाना चाहिए

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आज सुबह देर से निकले टहलने। असल में निकलने के पहले नक्शा बनाते रहे दिमाग में कि किधर चला जाएगा आज। इसी चक्कर में निकलते-निकलते साढ़े सात बज ग...
Saturday, October 15, 2022

अंतरराष्ट्रीय ब्लागर मीट वाया वीडियो कांफ्रेंसिंग

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  आज लंबे अर्से बाद ब्लागर मीट हुई। वर्चुअल। न्यूजर्सी में सुबह अनूप भार्गव जी Anoop Bhargava से बात हुई।।साथ में रमन कौल Raman Kaul जी ...
Friday, October 14, 2022

बहुत हीरो बनते हो

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सुबह टहलना एक मजेदार अनुभव होता है। तमाम तरह के नजारे दिखते हैं। फिर उन पर लिखना भी रोचक। लिखाई तो एक तरह से घुमाई की डायरी सी होती है। जैसे...
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अनूप शुक्ल
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