कल सुबह पोस्ट में मशरूम पंचर का जिक्र किया था पोस्ट में। पता नहीं था क्या होता है मशरूम पंचर। शाम को टहलते हुए गए पंचर की दुकान पर। पता करने कि क्या होता मशरूम पंचर।
नुक्कड़ पर पहुंचकर देखा तो बोर्ड पर लिखा था -मशरूम पंचर। ख़ुशी हुई कि चलते-चलते जो पढ़ा था वह ठीक ही पढ़ा था। यह भी की पंचर वाले मनोज थे। लगा कि सिर्फ़ अब्दुल ही नहीं मनोज भी पंचर बनाते हैं।
दुकान पर बैठे मनोज से पता किया तो उन्होंने बताया कि जो पंचर बड़े हो जाते हैं, बाहर से नहीं बनते उनको अंदर से बनाया जाता है। मशरूम मतलब कुकुरमुत्ता। कुकुरमुत्ता में ऊपर छतरी सरीखी बनी होती है वही ट्यूब में अंदर फँस जाती है और पंचर टिक जाता है। अपने सर की क़ुर्बानी देकर ट्यूब की रक्षा करता है कुकुरमुत्ता पंचर।
जानकारी ली तो पता चला कि मशरूम पंचर, जिसे प्लग या पैच रिपेयर भी कहा जाता है, एक प्रकार की टायर रिपेयर है जिसमें एक मशरूम के आकार का रबर प्लग इस्तेमाल किया जाता है। यह पंचर को अंदर और बाहर दोनों तरफ से सील करके एक स्थायी समाधान प्रदान करता है।
कुकुरमुत्ता पंचर की जगह मशरूम पंचर लिखने का कारण वही होगा कि अंग्रेजी नाम का ज़्यादा असर पड़ता है। यह बहुत पहले की बात है जब निराला जी ने कुकुरमुत्ता कविता लिखते हुए गुलाब को हड़काया था -“अबे सुन बे गुलाब।”
निराला जी के बाद से समय बहुत बदल गया है। निराला जी की बात अलग थी। उनकी हिम्मत थी कि कुकुरमुत्ता की तरफ़दारी करते हुए गुलाब को फटकार सकते था कहते हुए-“इतरा रहा कैपिटलिस्ट।” आज कोई ऐसा कहे तो ज़मानत का इंतज़ाम पहले करके कहे।
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