फ़ुरसतिया
हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै
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Tuesday, November 03, 2020
तख्त-ए- हज्जाम और किराये पर साइकिल की दुकान
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इधर-उधर टहलते हुए स्टेशन की तरफ बढ़ गए। एक शटर बन्द दुकान के बाहर एक हज्जाम अपना सैलून सजा रहे थे। लकड़ी की कुर्सी। कटोरी में पानी। साबुन और...
Wednesday, May 24, 2017
फ़ुटपाथ, सड़क के किनारे आम आदमी के रैन बसेरे हैं
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आज सबेरे सूरज भाई राजा बेटा की तरह आसमान पर बिराजे हुये थे। साहब लोगों के राउंड के समय स्टॉफ़ मुंडी फ़ाइल में घुसा देते हैं। उसी तरह एकद...
Tuesday, January 17, 2012
घर से बाहर जाता आदमी
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http://web.archive.org/web/20140419155812/http://hindini.com/fursatiya/archives/2557 Browse: Home / पुरालेख / घर से बाहर जाता आदमी ...
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