फ़ुरसतिया

हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै

Sunday, September 13, 2015

जो फरा सो झरा

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रेल जबलपुर से चलकर हाऊबाग रेलवे स्टेशन पहुंची।लोग कूदकर उतरे। फिर दूसरी ट्रेन में बैठने के लिए। यह ट्रेन फिर जायेगी जबलपुर। वहां से लौटकर ...

पैसेंजर के साथ सेल्फी

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आज की प्रभात यात्रा ट्रेन से। जबलपुर-बालाघाट नैरोगेज सुना है बन्द होने वाली है। बन्द होने के पहले मन किया इससे जर्नियाया जाये। भोरे उठ ग...
Saturday, September 12, 2015

कभी जो मिलोगे तो पूछेंगे हाल

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अभी दोपहर को दफ्तर से लौटते हुए पुलिया पर ये फेरी वाले आराम करते हुए दिखे। मोबाइल पर गाना सुन रहे थे -कभी जो मिलोगे तो पूछेंगे हाल। ...

अपने को खुश रखिये, मुस्कराइए

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आज भोर में जन नयन-पट खुले मल्लब आँख का पलक-शटर खुला तो याद आया कि साइकिल में हवा कम है। सो आज पइयां -पइयां टहलने निकल लिए। घुटन्नाधारी पच...
Friday, September 11, 2015

बच्चा भोपाल मत जाईयो, बहुत होयगा तंग

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सतगुरु हमस्यूं रीझि कर, एक कह्या प्रसंग, बच्चा भोपाल मत जाईयो, बहुत होयगा तंग। बहुत होयगा तंग, इधर-उधर तू भटकेगा, डाल गले में हाथ क...

भाषा ऐसी चाहिए जैसे चेहरे पर मुस्कान

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भाषा ऐसी चाहिए जैसे चेहरे पर मुस्कान देखें मन खुश होय और न देखे तो हलकान। हिंदी सम्मेलन हो रहा,बना अखाड़ा भोपाल, जो भी पहुंचा नहीं वहां...
Thursday, September 10, 2015

बयानों में हीनभावना

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कुछ लोग हिंदी के साहित्यकारों को गरियाते हुए कहते पाये गए कि उनका लिखा उतना मारक नहीं है जितना उन भाषाओं के लेखकों का जिनमें हत्यायें हो ...

हौसला इसे कहते हैं

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Wednesday, September 09, 2015

सफलता-असफलता तो इंद्रधनुषी रंग हैं जिंदगी के

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सुबह जग तो गए पर उठने का मन न किया। लेटे रहे। पर फिर अलार्म बजा तो उठना पड़ा। उठे तो पहले सोचा कि आज साईकल न चलेगी। लेकिन फिर 'पच्चल...

लहर का हर छोर, दोनों और लिखना

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लहर का हर छोर, दोनों और लिखना रात में भी तुम, सुनहली भोर लिखना। मौसमों की जिदें सारी तोड़ देना, हवा में कुछ खुले पन्ने छोड़ देना, मन! ह...

जिम्मेदार नागरिक ऐसे होते हैं

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Tuesday, September 08, 2015

सन्तोषधन इफरात में है अपने देश में

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कल रात भौत जल्ली सो गए। सच तो यह कि सोये नहीं थे। बस जरा लेटे ही थे कि नींद ने हमला कर दिया और कब्जे में ले लिया। सोचे...

याद तुम्हारी कर चुपके से....

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याद तुम्हारी कर चुपके से आज सांझ को फ़िर मैं रोया। क्षण भर में मन दौड़ गया फ़िर उन भूली-भटकी राहों में और अचानक तुम्हें पा लिया फ़िर मैंने अ...
1 comment:

उठिये मुस्कराइये कि आप फ़ेसबुक पर हैं

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'नारद की चिंता' -सुशील सिद्धार्थ

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Sushil Siddharth नाम मैंने सुन रखा था। श्रीलाल शुक्ल के साथ लिये कुछ इंटरव्यू पढ़े थे उनके। इसके अलावा और कुछ जानकारी नहीँ थी उनके बारे ...
Monday, September 07, 2015

ज़मीं पर रंग जैसे आदमी पाये नहीं जाते

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बहुत से प्रश्न ऐसे हैं, जो दुहराये नहीं जाते, मगर उत्तर भी ऐसे हैं जो बतलाये नहीं जाते इसी कारण अभावों का सदा स्वागत किया मैंने, कि घर ...

आप मुस्करायेंगे दुनिया बेहतर लगेगी

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आज मेस के बाहर निकलते ही पुलिया के पास देखा एक लड़का साइकल पर सवार एक डीसीएम ट्रक के डाले के पास लटकी जंजीर पकड़े ट्रक के साथ ही चला जा रहा...

ऐसे भी अध्यापक होते हैं

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Sunday, September 06, 2015

नर्मदा तुम कितनी सुंदर हो

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अमृत लाल वेगड़ जी की कोलाज और स्केच बुक नर्मदा तुम कितनी सुंदर हो ---------------------------------- कल वेगड़ जी से मिलने गया। वेगड़ जी क...

'महक रहा है हरसिंगार , जैसे पहला-पहला प्यार

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आज सुबह थोडा आराम से हुई। साढ़े छह बजे निकले साइकिलियाने। फैक्ट्री के बाहर खूब गाड़ियां खड़ी थीं। आज कुछ पदों पर भर्ती के लिए इम्तहान है। हज...
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