फ़ुरसतिया

हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै

Monday, February 26, 2018

अच्छा व्यवहार किसी के लिए किसी को देवता बना सकता है

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उठ जाग मुसाफिर भोर भई, सड़क पर जगते लोग । सुबह टहलने निकले। पप्पू की दुकान खुल चुकी थी। भगौने में चाय चढ़ी थी। उबलने में देर थी। बन गयी ...
Sunday, February 25, 2018

पंकज बाजपेयी से मुलाकात

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चाय का बर्तन थामे पंकज बाजपेयी पिछले दिनों पंकज बाजपेयी जी से कई बार मुलाकात हुई। इधर वो हाईटेक हुए हैं। पकड़वाने वालों के भी नए नाम ज...
Saturday, February 24, 2018

कमजोर दिल के घपलेबाज

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आजकल बैंकिग घोटालों की बमबम मची है। एक के बाद एक ताबड़तोड़ घपले किलकते हुये पैदा हो रहे हैं। ’मीडिया रैम्प’ पर सुन्दरियों की तरह इठलाते हु...
Tuesday, February 20, 2018

हवा में उड़ता जाये, मेरा लाल टुपट्टा मलमल का

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धूप में 'हर हर गंगे' करता परिवार। हाथ में कैथा लिए बच्ची। शुक्लागंज पुल पर पहुंचकर देखा कि गंगा जी तसल्ली से बह रही थीं। एकदम ...
Sunday, February 18, 2018

सबके भाग्य में नौकरी कहां धरी है

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साथ-साथ काम करते मियां - बीबी सुबह टहलने निकले। घर के बाहर एक महिला को बैठी देख बतियाने लगे। बताया पास के सिलाई कारखाने में काम करती ...
Saturday, February 10, 2018

जयपुर की सुबह

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आइसक्रीम के कोन जैसे सिंहासन में गुड़ी-मुड़ी सूरज भाई आज सुबह जयपुर में हुई। टहलने निकले तो सड़क पर इक्का दुक्का लोग दिखे। सर्दी कम टाइप...
Friday, February 09, 2018

सूरज भाई अपनी 'किरण टार्च'

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आसमां में धूप का अलाव सुलगाये सूरज भाई बहुत दिन बाद कल सूरज भाई से मुलाकात हुई। आसमान में धूप का अलाव जैसा जलाए ताप रहे थे। उनको कौन ...
Monday, February 05, 2018

धूप सेंकती नदी

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बालू का तिकोन मानो नदी परिवार नियोजन का प्रचार कर रही हो कल बहुत दिन बाद साइकिल 'स्टार्ट' की। हफ्तों खड़ी रहने के बावजूद टायर ...
Thursday, February 01, 2018

गरीबी में भयंकर वंशवाद है

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गाड़ी रुकने के इंतजार में बच्चियां दफ्तर से लौटते हुए अक्सर नरोना चौराहे पर सिग्नल नहीं मिलता। मतलब लाल बत्ती । रुकना पड़ता है। रुकते ही ...
Wednesday, January 31, 2018

दिल्ली में साहित्यकार साहित्य के अलावा सब कुछ रचते हैं-- यशवन्त कोठारी

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1. दिल्ली में साहित्यकार साहित्य के अलावा सब कुछ रचते हैं। दिल्ली-वाद ने हिंदी रचनात्मक साहित्य का बड़ा नुकसान किया है। 2. आजकल के सम...
Monday, January 15, 2018

एक तसल्ली भरा इतवार

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82 साला बुजुर्गवार अल्ताफ कल सुबह तसल्ली से उठे। इतवार देर से जगने, उठने के पहले करवट बदलने और फ़िर पलटकर सो जाने का दिन होता है। ल...
Thursday, January 11, 2018

पुस्तक मेले में किताबें

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हाल नम्बर 12, शॉप नम्बर 375 , रीड पब्लिकेशन जाड़े में खाली रेलें ही नहीं बल्कि किताबें भी देरी से पहुंच रहीं हैं। गनीमत यही कि किता...
Wednesday, January 10, 2018

कोहरा

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आज सुबह अलार्म बजा। नींद खुली। फ़िर आंख भी। लगाया हमने ही था लेकिन फ़िर भी गुस्सा आया अलार्म पर। अलार्म ने तो अपनी ड्यूटी बजाई फ़िर भी उस प...
Monday, January 01, 2018

हमारी अम्मा कलेट्टर गंज के पास पराठे बेंचती थी

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Add caption साल सरपट निकल रहा था। हम उसको विदा करने नदी तट तक गए। नुक्कड़ पर ई रिक्शा दीवार की तरफ मुंह किये खड़े थे। बगल से निकले तब भ...
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