फ़ुरसतिया

हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै

Monday, April 26, 2021

सच और हसीन झूठ

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  झूठ की भीड़ में एक अकेला सच खड़ा था। सच अकेला था लेकिन निडर था। झूठ की भीड़ अकेले सच से डरी खड़ी थी। पता नहीं किस झूठ की पोल खोल दे। एक अकेला ...
Sunday, April 25, 2021

पानी छीलकर आक्सीजन बनाएं

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  सुबह हुई तो चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई दी। सब अपने-अपने अंदाज में चहचहा रहीं थीं। कोई ची ची, कोई टी टी। चींचीं चींचीं, कोई कुहू कुहू। बीच-बी...
Thursday, April 22, 2021

कोरोना बहुत डरपोक है

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  साल भर से कोरोना का हल्ला मचा है। भगदड़ मची है। जिसे देखो कोरोना से हलकान है। मरहूम गब्बर सिंह से भी जबर जालिम , डरावना हो गया है। जहां देख...
Tuesday, April 20, 2021

आपका क्या होगा जनाबे अली

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  तीन मीटर दूरी पर रखे रेडियो पर यह गाना बज रहा है। बार बार कह रहा है -'आप का क्या होगा जनाबे अली।' जैसे हमी से सवाल कर रहा हो। मन क...
Monday, April 19, 2021

जीने की राह

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1.  डर जंगल की आग की तरह फैलता है। एक का डर दूसरे को अपनी गिरफ्त में ले लेता है। निराशा बढ़ने लगती है और समझ ही नहीं आता कि आगे क्या? पर, डर ...
Tuesday, April 13, 2021

अपना पराठा बचाएं, चूहों को निपटाएं

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अखबार में खबर पढ़ी-डलिया से पराठा गुम होने से महिला हुई बेहोश। दो पराठे में से एक पराठा डलिया से गायब हो गया। महिला ने देखा और बेहोश। बाद में...
Saturday, April 10, 2021

साइकिल के जन्मदिन के बहाने

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कल हमारी साइकिल छह साल की हो गई। 2015 में जबलपुर में रांझी से ली थी। लेने के बाद घण्टी लगवाई, गद्दी बदलवाई। एक दो बार ट्यूब बदले। उसके अलाव...
Thursday, April 08, 2021

लम्बा मारग दूरि घर

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  आज फिर सपना दिखा। वही पुराना, सदाबहार। इम्तहान के लिए निकलना है। देरी हो रही है। समय कम। डर हावी है कि कहीं समय पर पहुंच न पाए तो पेपर छूट...
Wednesday, April 07, 2021

आराम का मामला है

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  ये फेसबुक पर ऑटो टिप्पणी के जो विकल्प आते हैं न वो हमको 'अभिव्यक्ति दिव्यांग' बना रहे हैं। किसी पोस्ट पर टिप्पणी करते समय फेसबुक स...
Monday, April 05, 2021

अरुण यह मधुमय देश हमारा

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अरुण यह मधुमय देश हमारा --------------------------------------- कल साइकिलिंग लिए अपन निकल लिये समय पर। साथी इन्तजार कर रहे थे। 'उद्घाटन...
Saturday, April 03, 2021

रुप्पू

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  आज ज्योति त्रिपाठी रुचि द्वारा लिखा उपन्यास रुप्पू पढा। पेज नम्बर 7 से 160 तक पूरा उपन्यास एक सिटिंग में पढ़ गये। बहुत दिन बाद ऐसा हुआ कि...
Wednesday, March 31, 2021

हमारे दरमियाँ

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  मुश्किलों से जब मिलो आसान होकर मिलो, देखना आसान होकर , मुश्किलें रह जाएंगी। हमारे डॉ. राजीव रावत की किताब 'हमारे दरमियाँ' के पन...
Tuesday, March 30, 2021

होली के टाइटल बमार्फत अरविंद तिवारी जी

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  Arvind Tiwari जी वरिष्ठ व्यंग्यकार हैं। बावजूद वरिष्ठता के उनकी सबसे अच्छी खूबी यह भी है कि वे अपनी वरिष्ठता सर पर लादकर नहीं रखते। उनक...
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