फ़ुरसतिया
हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै
Monday, February 26, 2024
पुस्तक मेले में मित्र - मुलाक़ात
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· Shared with पुस्तक मेले में सबसे राजकमल प्रकाशन पर सबसे ज्यादा भीड़ थी। कई किताबें लेनी थी राजकमल प्रकाशन से। राजकमल प्रकाशन की 'प...
Friday, February 23, 2024
भाषा में नहीं- प्रेम, स्त्री अस्मिता और समाज में स्त्रियों की स्थिति की कवितायें
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भावना प्रकाशन से निकलने के बाद सेतु प्रकाशन गए। हमने पुस्तक मेले में जाने से पहले मोटा-मोटी कई किताबों की लिस्ट बनाई थी दिमाग में । इनको खर...
Tuesday, February 20, 2024
पुस्तक मेले की यादों की धमकी और भावना प्रकाशन
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पुस्तक मेले में दो दिन के कुल जमा कुछ घण्टे रहे। तमाम यादें इकट्ठा हुईं। कुछ लिख गईं बहुत बाकी हैं। बची हुई यादें रोज हल्ला मचाती हैं। कहती ...
Saturday, February 17, 2024
बहुवचन प्रतिभाओं की संगत में
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पुस्तक मेले में कई मित्रों की पुस्तके थीं। उनके विमोचन हो रहे थे। उन पर बातचीत हो रही थी। पुस्तक मेले में ऐसे तमाम रचनाकार उपस्थित थे जिन...
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