फ़ुरसतिया
हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै
Thursday, December 03, 2020
साबिर साहब से मुलाकात
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साबिर साहब हमारी फैक्ट्री के बुजुर्ग हैं। 30 साल हो गए उनको रिटायर हुए लेकिन फैक्ट्री के हर बड़े जलसे में उनकी उपस्थिति जरूरी मानी जाती है...
Tuesday, December 01, 2020
एक और इतवारी सुबह
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सुबह-सुबह दरवाजा खोला। पेड़ सावधान मुद्रा में ('सावधान मुद्रा में' की जगह - 'सहमें से' पढ़ें) सर झुकाये खड़े हैं। कोई हिलडुल...
Friday, November 27, 2020
मैं मिलूंगा लफ्जों की धूप में
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“जब कोई काम करना हो तो समझो कि मृत्यु तुम्हारे केश पकड़कर अपनी दिशा में घसीटती ले आ रही है, इसलिये उस कार्य को करने में विलंब मत करो; किन्त...
Tuesday, November 24, 2020
पढ़े फारसी बेंचे तेल
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गुप्ता जी के ढाबे पर चाय पीने के बाद हम लौट लिये। आगे हथौड़ा चौराहा मिला। चौराहे पर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी की मूर्ति लगी है। चौराहे का ...
Monday, November 23, 2020
सड़क , पगडंडी और राजपथ
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कल सुबह आर्मी गेट पर इकट्ठा होना था। सुबह साढ़े सात बजे। इस गेट से ही हम रोज आते-जाते हैं। कार से। कार पर महाप्रबन्धक या निर्माणी की गाड़ी क...
Tuesday, November 17, 2020
एक प्यार का नगमा है....
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इतवार की सुबह दीपावली के खुमार में डूबी थी। रात रोशनी के हल्ले में नीरज जी की कविता मूर्तिमान हो गयी होगी: 'लगे रोशनी की झड़ी झूम ऐसी ...
Monday, November 16, 2020
परसाई के पंच-103
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1. जब तक किसी बड़े आदमी की एक-दो रखैल नहीं होतीं तब तक वह इज्जतदार नहीं माना जाता। 2. बाहर देश का नाम ऊंचा होने से उस देश के आदमी को भूख नह...
परसाई के पंच-102
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1. बिना व्यवस्था में परिवर्तन किये, भ्रष्टाचार के मौके बिना खत्म किये और कर्मचारियों को बिना आर्थिक सुरक्षा दिये, भाषणों, सर्कुलरों, उपदेश...
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