Tuesday, November 20, 2018

सपने में सांड



मुश्किल है। अब सपने में भी आदमी नहीं दिखते। हर तरफ आदमी का अकाल चल रहा है। दिखते ही नहीं। दो दिन पहले सपने में कुत्ता काट गया। अभी उससे उबरे भी नहीं थे कि कल दो सांड दिखे सपने में।

सांड का सपना सुनाने के पहले आपको बताएं पहले हमको सपने में इम्तहान और बस स्टैंड/रेलवे स्टेशन दिखता था। दिखता था कि इम्तहान आने वाले हैं, तैयारी हुई नहीं है। बस/ट्रेन का समय हो गया है और स्टेशन पहुंच नहीं पा रहे। भटक रहे हैं।

हमारे पहले के सपने शायद तमाम अधूरे पड़े कामों के चलते आते हों। काम बाकी हैं, हो नहीं रहे हैं। सपने में आकर वे मुंडी खटखटाते हों, हमको कब हिल्ले लगाओगे। काम पूरे न होने के पीछे के पीछे कारण शायद अतिआत्मविश्वास रहता हो कि हो जाएगा, कौन प्रलय आ रही है। वो शेर है न :
मैं जिंदगी पर बहुत इतवार करता था
इसी लिए सफर न कभी शुमार करता था।
शेर याद से लिखा। शायद कुछ गड़बड़ हो। मतलब यही है कि हमको जिंदगी पर इतना भरोसा था कि कोई काम शुरू ही नहीं करते थे।

हां तो हम सपने में सांड के बारे में बता रहे। यह बात गद्य में बता रहे हैं। कविता लिखते तो 'सपन-सांड' से शूरु करते। अनुप्रास अलंकार आ जाता। अलंकार की दर्शनीय छटा आ जाती। कविता शुरू होते ही खूबसूरत हो जाती। कविता में खूबसूरती आसानी से आ जाती है। इसीलिए लोग कविता ज्यादा लिखते हैं। ख़ूबसूरती की आड़ में तमाम बदसूरती खपाते हैं।

हां तो सपने में जो सांड दिखे वे बीच सड़क पर एक दूसरे से भिड़े हुए थे। सींग भिड़ा रहे थे, ऊपर उछलकर टांगे लड़ा रहे थे। सींग भिड़ते तो देख चुके हैं पहले भी लेकिन टांगे उछालकर लड़ते सांड पहली बार दिखे। ऐसा लग रहा था कि कोई फाइटर डायरेक्टर इनको निर्देशित कर रहा है । स्टंट सिखा रहा है- 'ऐसे लड़ बे, इफेक्ट आएगा।' लड़ाई में इफेक्ट न आये तो बेकार।

सांड लड़ते देख हम डर रहे थे कि आपस में लड़ते हुए वो हम पर न आ गिरे। हमको न धकिया दें। उनके तो धक्के से ही हमारा काम हो जाएगा। वो तो शुक्र मनाये कि सपना ज्यादा देर चला नहीं। सांड लड़ते रहे, सपना खत्म हो गया। लगता है हमारे 'सपना- मन' में भी हमारी आदतें आ गयी हैं। टीवी पर कोई प्रवक्ता लड़ता देखते ही हम चैनल बदल देते हैं। सपने में भी आदत बरकरार रही। सांड भिड़ंत देखी, सपना स्विच ऑफ कर दिया।

हमने तो सपना स्विच ऑफ कर दिया। लेकिन क्या पता बाद में दोनों सांड एक ही थान पर खड़े दिखते। दोनों को लड़ाने वाला स्टंट मैन दोनों की पीठ सहलाते हुए कहता-'बहुत अच्छा लड़े तुम दोनों। गुड इफेक्ट, ग्रेट ब्वायज।'

शायद दोनों सांड जुगाली करते हुये पूंछ हिलाकर उसको आंखों ही आंखों धन्यवाद बोलते।

सपने का मतलब बताया जाए। वैसे हमारे एक मित्र जिनकी सब खिल्ली उड़ाते हैं ने बताया कि यह आने वाले समय में चुनाव का सीन है। सांड आपस में लड़ते राजनीतिक दलों का प्रतीक हैं जिनसे बाजार तरह तरह के स्टंट करवा रहा है। तुम उसमें आम जनता के प्रतीक हो जो उनकी लड़ाई से भयभीत हो। कहने का मतलब जनता चुनाव से डरी हुई है।

हमने मित्र की बात की बेवकूफी की बात कहकर उड़ा दिया। दफ्तर चल दिये।

रास्ते में एक घोड़ा दिखा। बोझ के कारण बेचारा सड़क पर बैठ गया। दुष्यंत कुमार का शेर लागू नहीं होता जानवरों पर वरना सुना देता :
"मैं सजदे में शामिल नहीं था, धोखा हुआ होगा,
ये जिश्म बोझ से दोहरा हुआ होगा।"

बहरहाल घोड़े ने बीच सड़क अपने ऊपर लदे वजन से समर्थन वापस ले लिया। तांगे की सरकार बीच सड़क बैठ गयी। बाद में घोड़े को सहला, फुसला और जोर लगाकर खड़ा किया गया। घोड़ा अनमने मन से उठा और बेमन से चल दिया।

हम चुपचाप कार में बैठे घोड़े का गिरना, उठना और चल देना देखते रहे। बाद में फ़ोटो खींच लिए। आम नागरिकों की तरह हरकत किये जो सड़क पर सब कुछ होता देखता है । कुछ बोलता नहीं है। डरता है कि बोला तो निपटा दिया जाएगा। निपट जाएगा।

इसकी व्याख्या क्या करें। आप खुद समझिए। आप खुद समझदार हैं। आप देश की जनता हैं। जनता को समझदार होना लाजिमी है।


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