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Monday, May 10, 2021

फिर नए सपने होंगे

 

फिर घना कोहरा छंटेगा,
फिर नया सूरज उगेगा,
फिर नई कली खिलेगी,
फिर नई मंजिल मिलेगी।
फिर नए सपने होंगे,
गले लगाते कुछ अपने होंगे,
स्वप्न होंगे नए
दर्द भी कुछ नए होंगे।
हर जख्म के लिए
मरहम कुछ नए होंगे।
कोरोना काल की मनहूसियत को धता बताती हुई यह कविता सुनिए हमारे सुपुत्र Anany Shukla की आवाज में। कठिन समय में आशा की बात कहती हुई कविता सुनते हुए यही सोच रहे थे अपन -'काश हम भी ऐसे वीडियो बना पाते।' 🙂

https://www.facebook.com/anup.shukla.14/posts/10222284893684708

Sunday, March 24, 2019

अनूप शुक्ल बेबाकी से अपनी बात रखते हैं - प्रेम जनमेजय

प्रेम जनमेजय जी द्वारा पुस्तक मेले के मौके पर एक ’जबरियन टाइप’ करवाई गयी तारीफ़। सामने किताब और माइक , बगल में लेखक और पुस्तक मेले का सहज खुशनुमा माहौल ने मिलकर प्रेम जी में अतिरिक्त उद्दात्ता का संचार कर दिया और उन्होंने जो कहा वह यहां पेश है। ’बुरा न मानो होली है’ के बहाने।

🙂
पहले तो अनूप को बहुत बहुत बधाई। क्या है कि अक्सर इनकी सक्रियता सोशल मीडिया पर देखता हूं तो सोचता हूं कि इनकी सक्रियता किताबों पर उतरकर कब आयेगी? उसका कारण क्या है कि ये बेबाकी से अपनी बात कहते हैं। ये कभी अपनी रचनाओं में या कभी-कभी टिप्पणी में कभी सोचता नहीं है कि कोई व्यक्ति इससे नाराज तो नहीं हो जायेगा और व्यंग्य की सबसे बड़ी शर्त यही होती है कि जब आप यह सोचते हैं कि कोई व्यक्ति आपसे नाराज नहीं हो जायेगा वहीं आप अपने व्यंग्य को भोथरा करना शुरु कर देते हैं अन्यथा आप कबीर होकर व्यंग्य करते हैं , कह देते हैं उसके बाद प्रतिक्रिया जो आती है (आती रहे)।
अनूप की रचनाओं में मैंने यही देखा है। यह जो इनका व्यंग्य संकलन है – ’सूरज की मिस्ड कॉल’ इसका नाम ही एक अलग तरह का है। भाई सुभाष Subhash Chander ने जैसा कहा एक पठनीयता है। वह पठनीयता तभी आ पाती है जब आपकी सोच जो है रचना की हो। अन्यथा अगर आपकी सोच टिप्पणी की हो कि इस चीज पर टिप्पणी मुझे करनी है तो वह रचनात्मकता उसमें नहीं आयेगी। रचनात्मकता आने पर ही व्यंग्य भी उसमें आयेगा, हास्य भी आयेगा । रचना साहित्य की दृष्टि से पहले रचना होनी चाहिये उसके बाद ही वह व्यंग्य , कहानी कविता या कुछ बनती है। इसीलिये अनूप को पढना मुझे अच्छा लगता है कि मुझे लगता है कि मैं एक अच्छी रचना पढ रहा हूं। मैं बधाई देता हूं। विस्तार से इस दुल्हन के बारे में, जिसका घूंघट आज उधाड़ा गया है, विस्तार पढूंगा और कहूंगा क्योंकि कहना मुझे अच्छा लगता है।
इन्होंने अभी एक किताब और सम्पादित की थी Alok Puranik पर – ’आलोक पुराणिक-व्यंग्य का एटीएम’ वह बहुत महत्वपूर्ण काम है। मुझे अच्छा लगा कि इन्होंने मुझसे उसमें लिखवा भी लिया। लिखकर भी अच्छा लगा। हम लोगों का तो ऐसा है कि कोई क्षेत्र ऐसा नहीं जो प्रतिबंधित हो। ये अगर किसी काम में जुट जाते हैं तो उसे खत्म करके ही छोड़ते हैं। इनकी खास बात है, अभी एक संकलन आया है चहलकदमियां, तो व्यंग्य में इनकी चहलकदमियां बहुत अच्छी लगती हैं। मैं बधाई देता हूं।
सूचना: आलोक पुराणिक जी के बारे में लिखी जिस किताब का जिक्र यहां हुआ वह आलोक पुराणिक जी के ५१ वें जन्मदिन के मौके पर तैयार की गयी। इसमें उनके घरवालों, मित्रों, प्रशंसकों, आलोचकों के लेख, आलोक पुराणिक जी को व्यंग्य यात्रा सम्मान मिलने की अविकल रिपोर्टिंग , आलोक पुराणिक जी के साक्षात्कार और आलोक जी की चुनिंदा रचनायें और शेरो शायरियां संकलित हैं। पन्द्रह-बीस दिन की मेहनत में तैयार की गई २९५ पेज की यह किताब आलोक पुराणिक के बारे में शोध करने वालों के लिये बहुत उपयोगी है। किताब रुझान प्रकाशन से आई है। लिंक यह रहा।
और जिस किताब का जिक्र करते हुए बात की प्रेम जी ने -' सूरज की मिस्ड कॉल' उसका लिंक नीचे दिया है। इस पुस्तक पर उप्र हिंदी संस्थान का वर्ष 2017 का सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ' अज्ञेय' सम्मान भी मिला। http://rujhaanpublications.com/product/suraj-ki-missed-call/

https://www.facebook.com/anup.shukla.14/videos/10216416223571623

Sunday, October 11, 2015

चाहना (प्रमिला के लिए)



मैं तुम्हारे तन की
ताजगी होना चाहता हूँ
तुम्हारे चेहरे की आभा


तुम्हारे हृदय का
उल्लास होना चाहता हूँ
वाणी का स्फुरण

तुम्हारे कण्ठ का
गीत होना चाहता
तुम्हारी जिव्हा का शाप

तुम्हारे श्वास की
सुगन्ध होना चाहता हूँ
मन की उदारता

तुम्हारी चेतना का
चेहरा होना चाहता हूँ
प्रेरणा का प्रकाश

तुम्हारीं आकांक्षाओं का
आगार होना चाहता हूँ
सम्बंधों की घनिष्टता

तुम्हारी पेशानी का
पसीना होना चाहता हूँ
तुम्हारी पीड़ा का पतझड़

मैं फिर से वही
तुम्हारे विश्वास की
खिलती कली होना चाहता हूँ।

-प्रियंकर पालीवाल
'वृष्टि छाया प्रदेश का कवि' कविता संग्रह की
कविता Priyankar जी ने अपनी पत्नी प्रमिला जी
के लिए लिखी। हम लोग कलकत्ता में मिले पिछले माह
तो जबरियन यह रिकार्डिंग हुयी।
अड्डेबाजी हुई शिवकुमार मिश्र के दफ्तर में।

https://youtu.be/IX7_zWQRYHA

Monday, October 05, 2015

केवल दो गीत लिखे मैंने

दो दिन पहले गीतकार राजेन्द्र राजन के प्रसिद्द गीत 'केवल दो गीत लिखे मैंने' का एक बंद 'वाह भाई वाह' कार्यक्रम में सुनने का मौका मिला। मैंने उसे रिकार्ड कर लिया। सुनिये इस प्यारे गीत का मुखड़ा। पूरा गीत साथ में दिया है।
केवल दो गीत लिखे मैंने
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केवल दो गीत लिखे मैंने
इक गीत तुम्हारे मिलने का
 इक गीत तुम्हारे खोने का

सड़कों-सड़कों, शहरों-शहरों
नदियों-नदियों, लहरों-लहरों
विश्वास किये जो टूट गए
कितने ही साथी छूट गए
पर्वत रोये-सागर रोये
नयनों ने भी मोती खोये
सौगन्ध गुंथी सी अलकों में
गंगा-जमुना सी पलकों में

 केवल दो स्वप्न बुने मैंने
इक स्वप्न तुम्हारे जगने का
 इक स्वप्न तुम्हारे सोने का

बचपन-बचपन,यौवन-यौवन
बन्धन-बन्धन, क्रंदन-क्रंदन
नीला अम्बर, श्यामल मेघा
किसने धरती का मन देखा
सबकी अपनी है मजबूरी
चाहत के भाग्य लिखी दूरी।
मरुथल-मरुथल,जीवन-जीवन
पतझर-पतझर,सावन-सावन

 केवल दो रंग चुने मैंने
इक रंग तुम्हारे हंसने का
इक रंग तुम्हारे रोने का।

केवल दो गीत लिखे मैंने
इक गीत तुम्हारे मिलने का
इक गीत तुम्हारे खोने का।

-राजेन्द्र राजन

https://www.youtube.com/watch?v=EQ8DL9mK3kk 

Wednesday, August 26, 2015

लिखे जो खत रकीब को ....

कल एक वीडियो लगाया अपनी आवाज में उस पर दोस्तों में काम भर की दाद मिली। हो सकता है तारीफ बस यूँ ही टाइप हो लेकिन सहज विश्वासी होने के नाते हमने उनको सच माना। तारीफ़ को सच मानते ही 'कट्टा कानपुरी' की दूसरी तुकबन्दियाँ भी ठुनकते हुए बोली- हमको भी 'यू ट्यूब' ले चलो। फेसबुक पर सटाओ।
हमने हीला-हवाली की तो कुछ युवा तुकबन्दियां तो नारेबाजी करने लगीं। नारे चुक गए तो इंकलाब जिंदाबाद और वन्देमातरम की चिंघाड़ लगाने लगी। मजबूरी में फिर हमने एक मोहब्बत की तुकबन्दी को 'यू ट्यूब' पर डाल दिया। सुनिए।आप भी लाइक तो कर ही चुके।

यह वीडियो और कल का वीडियो भी लगाते हुए कहना यह है कि जिन मित्रों को कविता /कहानी/ व्यंग्य पाठ या फिर गीत में रूचि है वे भी अपनी आवाज में यू ट्यूब पर टेप करके साझा कर सकते हैं। हमसे खराब आवाज तो किसी की ही हो शायद।जब हम साझा कर सकते हैं तो आप क्यों नहीं।
फिलहाल यह वीडियो सुनिए:

https://www.youtube.com/watch?v=AnTooQ5CVqU

Thursday, August 20, 2015

लड़कियों के साथ छेड़खानी के खिलाफ़

अपने यहां आये दिन लड़कियों के साथ छेड़खानी की घटनायें बढती जा रही हैं। इनमें तथाकथित अच्छी परवरिश पाये लड़के भी शामिल होते हैं। समाज का हिसाब-किताब कुछ ऐसा बन सा गया है कि वे जो करते हैं उसमें उनको कुछ गलत भी नहीं लगता। लेकिन एहसास कराये जाने पर वे शर्मिन्दा होते हैं।

3 मिनट की इस फ़िल्म में ऐसा ही कुछ दिखाने की कोशिश की गयी है। एक अकेली जाती लड़की को दो लड़के छेड़ते हैं। सड़क पर तमाम लोग यह होते देखते हैं पर कोई प्रतिरोध नहीं करता। लेकिन एक दूसरी लड़की जो अपने दोस्त के साथ होती है आगे बढ़कर छेड़छाड़ का विरोध करती है और उस लड़कों का मोबाइल छीन लेती है। इसके बाद बाकी लोग भी उन लड़कों के चारो तरफ़ इकट्ठा हो जाते हैं। सबको देखकर अकेली लड़की को छेड़ने वाले लड़कों को अपनी गलती का एहसास होता है। वे शर्मिन्दा होकर वहां से जाने लगते हैं। उनके शर्मिन्दगी के एहसास को देखकर भीड़ में से दो लड़के आगे आकर उनके कन्धे पर हाथ रखते हैं और फ़िल्म इस संदेश के साथ खत्म होती है:
You have two roads to choose
one will make you protect her
other will make you her
for she is not only one
पिक्चर बनाई है अजित थामस ने। कैमरा पृथ्वीराज नायर। स्क्रिप्ट अनन्य शुक्ल। एडीटर अक्षय कुमार। असिस्टेण्ट डायरेक्टर और आवाज नवनीत कुमार। शूटिंग में भाग लिया मनिपाल इंस्टीट्यूट के बच्चों ने।
यह सब इसलिये बता रहे कि स्क्रिप्ट लिखने वाले और इस फ़िल्म में छेड़छाड़ का विरोध करने वाले का रोल किया है वो अनन्य हैं हमारे छोटे सुपुत्र हैं। हम हाफ़ सेंचुरी मार गये उमर की अभी तक एक्को स्क्रिप्ट न लिख पाये और एक ये हैं कि 19 साल की उमर में पहली स्क्रिप्ट लिखकर फ़िल्म भी बनवा लिये।

बधाई हो बच्चा। तुमको और सब दोस्तों को। पहला वाला रास्ता चुनने का विवेक और हौसला बना रहे। हमेशा। smile इमोटिकॉन Anany Shukla

https://www.youtube.com/watch?v=Bpb7T6R1XNY