Wednesday, June 17, 2026

तैराकी सीखने का सोहलवाँ दिन




 आज सुबह तैराकी के लिए सही समय पर पहुँच गए। ठीक आठ बजे। पढ़कर जो आए थे उसपर अमल शुरू किया। सबसे पहला सबक यह कि तैरते समय सर पर नीचे रखना है। जैसे हाई कमान के सामने मंत्री, संतरी, सांसद, विधायक रखते हैं। केवल साँस लेते समय सर उठाना है। बाक़ी समय सर नीचे ही रखना है। स्वीमिंग पूल के फर्श की तरह निगाह। कॉलेज के जमाने में रैगिंग के दिनों में जूनियर्स को अपने शर्ट की तीसरी बटन देखने को कहा जाता था। तीसरी बटन देखने का रिवाज तो लड़कों में था। लड़कियों में क्या रिवाज था यह पता नहीं। यह जरूर याद है कि उन दिनों में लड़कियों/लड़कों का अनुपात 1:50 से भी नीचे ही था। 

सर लगातार नीचा करके तैरने में लगा यह सही पोज है। पहले अक्सर सर बार-बार ऊपर करते थे। लड़खड़ा जाते थे। समर्पण मुद्रा में तैरने में तैरना सहज लगा। पहले बार-बार सर उठाकर ऊपर देखने में संतुलन गड़बड़ा जाता था। सर नीचे करके तैरने के साथ पांव लगातार चलाते रहना था। आज इसका अभ्यास किया। हमने तय किया कि रोज-रोज़ नई तरह से सीखने की बजाय मूल बात पर फ़ोकस करना जरूरी है। रोज़-रोज़ पोज बदलने में कोई फ़ायदा नहीं। पहले का अभ्यास छूट जाता है। तैराकी कोई राजनीति तो है नहीं जो दलबदल की तरह पोजबदल करके कुछ हासिल हो।

साथ सीखते बच्चे ने मुझे फिर से सिखाया। उसका एक दाँत टूटा हुआ है। उसने बताया स्कूल में खेलते समय टूट गया। दूध का दाँत है। इसकी जगह नया दांत आयेगा। क्या उसे चाय का दाँत कहाँ जाए। पूल किनारे बैठे पक्षी को देखते हुये उसने कहा -'वह ईगल हम लोगों की तरफ़ देख रहा है। कहीं काटेगा तो नहीं?' 

बगल में तैरती बच्ची ने सुनकर कहा -'वह ईगल नहीं कौआ है। काटेगा नहीं।' 

मेरे साथ तैरता बच्चा उसकी बात अनसुनी करते हुए पूल से निकलकर बाहर चला गया। इसके बाद पूल में डाइव करके फिर साथ में तैरने लगा। 

पूल में सिखाने वाली बच्ची एक बुजुर्ग महिला का हाथ पकड़कर उसको तैरना सिखा रही थी। हाथ पकड़कर पानी में उनको घसीटते हुए पैर चलाने को कह रही थी। महिला कुछ देर अभ्यास करने के बाद रुककर आराम करने लगी। हमने कोच बालिका से शिकायत की -'तुमने हमको तैरना नहीं सिखाया। अभी तक हम ठीक से तैर नहीं पाते।' 

बच्ची ने हमको शुरुआती दिनों में कई बार गाइड किया है। मेरी बात के जबाब में उसने कहा  -'आप तो सीख गए हैं अंकल। प्रैक्टिस करते रहिए। परफेक्ट हो जायेंगे।' 

साथ तैरते बच्चे के पिता बाहर से उसकी गतिविधि देख रहे थे। फोटो भी ले रहे थे। हमने उनसे अपना तैरने का वीडियो बनाने को कहा। उन्होंने कहा -'ठीक।'

वीडियो बनवाने के लिए हम पूल के अंदर थोड़ी दूर से (करीब छह -सात मीटर) तैरते हुए किनारे तक आए। वीडियो बना। मेरे मोबाइल पर भेज भी दिया उन्होंने। 

वीडियो देखते हुए अपनी कई कमियाँ पता लगी। एक तो पाँव सीधे की जगह थोड़े मुड़े हुए थे।  दूसरे पाँवों के आपस में तालमेल का अभाव था। दोनों पांव किसी प्रदेश के मुख्यमंत्री और आलाकमान द्वारा थोपे उप मुख्यमंत्री की तरह अलग-अलग बयान बाजी जैसी करते दिखे। हाथ के मूवमेंट देखकर भी लगा कि इनको बहुत फैलाने की जरूरत नहीं। औक़ात में रहने से ज़्यादा कुशलता से तैर सकेंगे। यह भी लगा कि अगर रोज़ वीडियो बनायें तो बेहतर समझ सकेंगे अपने मूवमेंट।

तैरते हुए, अभ्यास करते हुए आज एक दो बार सर ऊपर करके साँस भी ले ली। ऐसा लगा मानो पूल के पानी को झांसा देकर हवा गटक ली हो। जल्दी ही तैरते हुए नियमित साँस लेना सीख जाएँगे।

आज हमारा तैरना सीखने का सोहलवाँ दिन था।






हाथ ब्रेस्टस्ट्रोक और पांव फ्रीस्ट्रोक


 शनिवार को शाम को गए स्वीमिंग के लिए। साथ में तैरते एक बच्चे ने कहा -'हम आपको सिखाते हैं स्वीमिंग।' हमने कहा -'सिखाओ।'

बच्चे ने हमको पहले, दूसरे दिन के सबक सिखाये। हमको वो आते थे। फिर भी हमने उसके कहने पर वो दोहराये। बच्चे ने कहा -'गुड, ऐसे ही करिए। सीख जायेंगे।'
बच्चा ख़ुद सीख रहा है। बाँह में फ़्लोटर जैसे बाँधे हुए था। उसके सिखाने का अनुभवि मजेदार रहा।
पूल में जितने कोच हैं उतनी सलाहें देते हैं। कोई कहता है ब्रेस्ट स्ट्रोक के साथ पांव भी उसी तरह चलाइये। हम अपने पैर और हाथ की तकलीफ़ के बारे में बताते हैं। वह कहता है -'ठीक है। ऐसे ही चलाइये।'
दूसरा कोच कहता है -'जिस तरह सहज हैं उस तरह करिए। तकलीफ़ वाले स्टेप्स मत लीजिए। प्रैक्टिस करिए। हो जाएगा।'
एक दिन हमने पैर ब्रेस्ट स्ट्रोक के हिसाब से चलाये। किनारे का पाइप पकड़कर प्रैक्टिस की। लेकिन जब तैरने लगे तो पाँव फ्री स्टाइल में ही चले। पाँव फ्री स्टाइल में, हाथ ब्रेस्ट स्ट्रोक के हिसाब से। विभिन्न विचारधारा वाली पार्टी का गठबंधन। तालमेल नहीं हुआ।
सीखा हुआ भुलाकर नए सिरे से करना तैराकी सीखने के लिए सयोनी घोष हो जाना हुआ। इरादा बदल दिया। जिस तरह सीख रहे थे वैसे ही सीखेंगे।
कल नेट पर जानकारी ली। हाथ ब्रेस्टस्ट्रोक और पांव फ्रीस्ट्रोक के साथ तैरना संभव है ? नेट बाबू बोले -'एकदम संभव है।'
इसके बाद तैरते हुए साँस लेने के तरीक़े, तरकीबें भी बताई नेट ने। हमने सीख ली। तैराकी के बारे में वीडियो देखते हुए बचपन में पढ़े हुए विज्ञान के सबक दुबारा सीखे। प्लवन (तैरने) और गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत फिर से पढ़े। गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत तो जैसे मुस्कराते हुए गाना गा रहा था -' जहाँ जाइएगा, हमें पाइयेगा।'
तैरने समय फेफड़े में भारी साँस तैरने में सहायता देती है। शरीर का वजन विरोध करता है। दोनों में संतुलन बनाना सबसे अहम मुद्दा है। साथ चुनाव लड़ती दो विभिन्न पार्टियों के बीच सीटों के तालमेल जैसा ही जटिल मुद्दा। जल्दी तय नहीं हो पाता। लेकिन हो तो जाता ही है।
आज अभी जा रहे हैं स्वीमिंग के लिए। कल जो थ्योरी पढ़ी है उसको अमल में लाने की कोशिश करने। देखते हैं कितना कर पाते हैं।
स्वीमिंग पूल में डायना नायड को भी जरूर याद करते हैं। उनकी सीख भी :
1. हमें कभी भी, किसी भी हाल में हार नहीं मानना चाहिए (Never Ever Give up)
2. अपने सपनों को पूरा करने के लिए आपकी उम्र कभी भी ज़्यादा नहीं होती (You are never too old to chase your dream)
3. यह देखने में भले ही एक व्यक्ति का खेल लगता है, लेकिन असल में यह एक टीम वर्क है (It looks like a solitary sport, but it's a team)
See less

Tuesday, June 16, 2026

राजनीतिक पार्टी में निवेश


 टीएमसी के बागी विधायकों/सांसदों के NCPI में विलय  समाचार सुने। NCPI को पिछले चुनाव में कुल 822   वोट मिले थे। जबकि बागी सांसदों को कुल एक करोड़ वोट मिले थे। मतलब NCPI के वोटों से 12000 गुना। अपने से बारह हज़ार गुना छोटी पार्टी में विलयातुर सांसदों को देखकर कृष्ण बिहारी नूर का यह शेर याद आता है :

"मैं एक कतरा (बूँद) हूँ, मेरा अलग वजूद तो है,
हुआ करे जो समंदर मेरी तलाश में है।" 

यह एक खुद्दार इंसान का बयान है। अपने स्वाभिमान को बचाकर रखने की ज़िद है। बूँद भले ही छोटी है लेकिन उसका अलग अस्तित्व है। सागर से मिलने पर उसका अस्तित्व मिट जाएगा। यहाँ तो सागर (बागी सांसद) बूँद (NCPI) में मिलने को छटपटा रहा है। 

लेकिन खबर यह भी है कि वे सागर में नहीं महासागर (NDA) में मिलेंगे। यह मिलन  द्वारा उचित माध्यम (NCPI) होगा। एकदम सरकारी अंदाज़ में। टीएमसी के सासंद  NCPI के कंटेनर  में जमा होंगे। NCPI का कंटेनर NDA के समन्दर में उलट दिया जाएगा। तर्पण होगा टीएमसी के बागी सांसदों का। 

लेकिन जिस तरह का उचक्कापन और अवसरवादिता टीएमसी के बागी सांसदों ने दिखाई है उसके खिलाफ बागी लोगों को एतराज होगा। बगावत का मतलब किसी स्थापित सत्ता, नियम, या अधिकार (Authority) के खिलाफ खुले तौर पर विरोध या विद्रोह करना है। यहाँ तो स्थापित सत्ता से जुड़ने का काम हो रहा है। भगोड़ेपन को बागी कहना ठीक नहीं। 

पानसिंह तोमर फ़िल्म का डायलग याद आता है -"बीहड़ में तो बागी होते हैं, डकैत मिलते हैं पार्लियामेंट में।"   हो सकता है कोई भूतपूर्व बागी टीएमसी के भगोड़े लोगों द्वारा ख़ुद को बागी कहने के ख़िलाफ़ याचिका डाल दे। 

टीएमसी के चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी के खिलाफ माहौल बनना सहज बात हो सकती है। लेकिन जिस बेशर्म तरीके से उनसे जुड़े सासंद उनसे अलग होकर एकदम ख़िलाफ़ पार्टी से जुड़ने का उपक्रम कर रहे हैं वह शर्मनाक है। सत्ता में रहते विरोध करके अलग हो जाते तो बहादुरी समझ में आती। इस तरह के धोखेबाजी समाज के लिए धोखेधड़ी की एक और मिशाल कायम करना हुआ। लोग बेशर्मी से किसी को धोखा देंगे और नजीर में कहेंगे -'इन लोगों ने भी तो किया था। जब वे कर सकते हैं तो हम क्यों न करें।' अलग तरह की पार्टी कहलाने के नारा लगाने वाली पार्टी के लोग अपनी हर चिरकुटई को बेशर्मी से सही ठहराते हुए कहती है -' हमारे पहले वाली  पार्टी ने भी तो किया था ऐसा?' 

अरे जब पहले वाली की तरह आप भी गड़बड़ कर रहे हैं तो आपमें और उनमें अंतर क्या है? अन्तर शायद इस बात का है कि वो थोड़ा शर्माते हुए करती थी, अब सब धांधली, गड़बड़ी खुल्लमखुल्ला हो रही है। गड़बड़ियों में खुलापन आ गया है। पारदर्शिता आई है। 

अवसरवादिता , धोखाधड़ी आज की राजनीति का जरूरी तत्व हो गया है। जो धोखा देना नहीं जानता, मौके के हिसाब से पाला बदलना नहीं जानता वह शायद राजनीति के लिए मिसफ़िट है।

NCPI की स्थापना में एकाध लाख रुपए खर्च हुए थे। सांसदों और विधायकों द्वारा इस  पार्टी को ज्वाइन करने के बाद इसकी क़ीमत अरबों में हो जायेगी। इससे अच्छा रिटर्न आन इन्वेस्टमेंट और कहाँ होगा आज के दिन। NCPI को अपना नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड में लिखवाने के लिए अप्लाई कर दे देना चाहिए। निवेश पर सबसे तेज  लाभ का रिकार्ड। 

क्या पता कल को आपस की बातचीत में शेयर के बिजनेस करने वाले राजनीतिक पार्टी बनाने में पैसा लगाने लगें। आपस की बातचीत में कहने लगें -' सोचते हैं कुछ शेयर बेचकर दो-चार राजनीतिक पार्टी बना लें। आजकल इन पर अच्छा रिटर्न मिल रहा है।'

क्या आप भी कोई राजनीतिक पार्टी बनाने की सोच रहे हैं। 

Monday, June 15, 2026

कार का पंचर बनवाते हुए वीडियोग्राफी

 




शनिवार को स्वीमिंग पूल सुबह बारिश के कारण बंद हो गया था। शाम को गए। जाते समय कार के डैशबोर्ड में दायीं तरफ़ बल्ब जैसा जला। हमें लगा कोई वार्निंग है। हमने दायें-बायें देखा। समझ में नहीं आया। एक दिन पहले घर से सामने तिराहे पर जली कार का ध्यान आया। हमें लगा हमारे साथ भी कोई हादसा न हो जाये। हम शीशा खोलकर गाड़ी चलाते हुए गए स्वीमिंग पूल तक। कार का एसी ऑन, शीशा खुला। बेवक़ूफ़ी के सौन्दर्य का मुजाहिरा।

स्वीमिंग पूल से लौटकर सोचा कार दिखवा लें। वार्निंग सिग्नल अभी भी था। अब डैशबोर्ड में एक तरफ़ लिखा हुआ भी आ रहा था -' बायें पहिए की हवा कम है।' हमें लगा शायद बल्ब जैसा जलना भी उसी कारण होगा। धीरे-धीरे कार चलाते हुए हवा की दुकान पर पहुँचे। हमने कहा -'हवा भर दो।'
हवा भरने के लिए टायर देखा गया तो पाया गया टायर में एक कील घुसी हुई है। इसी कारण हवा कम है। उसने बताया पंचर है। हमने कहा -'बना दो।'
कार पंचर बनाने के लिए सौंपकर हमने डैशबोर्ड का फोटो लिए। AI को दिखाकर पूछा -'इसका मतलब क्या है?'
AI ने फौरन बता दिया -'कार के पहिए में हवा कम है।'
हवा का इलाज पंचर बनाकर हो ही रहा था। हम इधर-उधर के नज़ारे देखने लगे। एक लड़की अपने भाई -बहनों को साथ लिए रील जैसा कुछ बनाती जा रही थी। उसको देखकर हमने भी सड़क पर आते-जाते लोगों की रिकार्डिंग शुरू की। इस बीच अमेरिका से Atul Arora का फ़ोन भी आया। उन्होंने बताया कि जल्दी ही वो हमको वीडियो एडिटिंग सिखायेंगे।
कई मजेदार सीन दिखे इस बीच। एक कुत्ता लंगड़ाता हुआ जाता दिखा। कई लोग हमको देखकर फुर्ती से निकले। पंचर वाले ने पूछा (बाद में) -'क्या आप वीडियो बनाते हैं?'
हमने कहा -'सीख रहे हैं।'
वीडियो बनाकर घर आ गए। सोचा कि एक और वीडियो बनाकर दोनों को जोड़कर एक वीडियो बनायेंगे। आज देखा तो यह काम किया गया। देखिए कुल क़रीब आठ मिनट की वीडियोबाज़ी। देखिए हमारे आसपास का नजारा। बताइए कैसा लगा ?

हमें कभी भी, किसी भी हाल में हार नहीं मानना चाहिए

स्वीमिंग पूल 

 कल डायना नायड की ऑटोबायोग्राफी (Find a way) पर आधारित फ़िल्म Nyad (नेटफ़्लिक्स पर) देखी। दो घंटे की इस फ़िल्म में डायना नायड द्वारा पाँचवे प्रयास में क्यूबा से फ्लोरिडा की 103 मील (165.76 किलोमीटर) दूरी तैरकर पार करने का विवरण है। इनमें पहला प्रयास डायना नायड 28 साल की उम्र में किया था। असफल रहीं। मैराथन तैराकी के कई रिकार्ड बनाने के बाद उन्होंने तैराकी छोड़ दी। 

60 साल की उम्र में, अपनी माँ की मृत्यु के बाद, उनको अपना बचपन का सपना फिर याद आया। उन्होंने फिर से तैराकी शुरू की। तीन बार फिर असफल रहीं। समुद्र में पायी जाने वाली भयंकर जहरीली जेली फिर के डंक से मरते-मरते बचीं। भयंकर समुद्री तूफ़ान में फँसकर मरते हुए बची। उनके साथियों ने मान लिया कि वे शायद इस उम्र में इस काम के लायक नहीं हैं। उनकी पक्की सहेली बोनी और  मुख्य नेविगेटर जॉन बार्टलेट ने उनके पाँचवे प्रयास में जुड़ने से मना कर दिया था (फ़िल्म के अनुसार)। लेकिन डायना नायड की जिद थी कि वे फिर प्रयास करेंगी। 

बोनी और जॉन बार्टलेट डायना की जिद के चलते उनसे फिर से जुड़े। डायना ने  103 मील की दूरी तैरकर पार की। क्यूबा से फ्लोरिडा की 103 मील की यह दूरी तय करने में डायना  को 110 मील 177 किलोमीटर तैरना पड़ा। यह दूरी उन्होंने करीब 53 घंटे में तय की। मतलब तैरने की गति लगभग 3.34 किलोमीटर प्रतिघंटा रही। 

फ्लोरिडा पहुँचने वहाँ जमा भीड़ को संबोधित करते हुए  डायना नायड ने तीन बाते कहीं :

1. हमें कभी भी, किसी भी हाल में हार नहीं मानना चाहिए (Never Ever Give up)

2. अपने सपनों को पूरा करने के लिए आपकी उम्र कभी भी ज़्यादा नहीं होती (You are never too old to chase your dream)

3. यह देखने में भले ही एक व्यक्ति का खेल लगता है, लेकिन असल में यह एक टीम वर्क है (It looks like a solitary sport, but it's a team) 

डायना नायड ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी कोच बोनी स्टोल और अपनी 35 लोगों की मेडिकल और नेविगेशन टीम को दिया, जिनके बिना यह मुमकिन नहीं था। 

डायना नायड के मुख्य नेविगेटर जॉन बार्टलेट इस अभियान के दौरान बीमार थे। इसके बावजूद वे इससे जुड़े। अभियान की इस ऐतिहासिक सफलता (2 सितंबर 2013) के कुछ ही महीनों बाद, 10 दिसंबर 2013 को 66 वर्ष की आयु में जॉन बार्टलेट का सोते समय अचानक निधन हो गया था।

अपने सपने पूरा करने की ज़िद, मेहनत, लगन और समर्पण के साथ टीम वर्क के कारण डायना नायड ने  अपना बचपन का सपना पूरा किया। उस समय उनकी उम्र 64 वर्ष थी। उनके पहले और बाद में भी अभी तक यह दूरी किसी ने तैरकर (बिना शार्क पिंजड़े के) किसी ने तय नहीं की है।

डायना नायड़ की कहानी बताती है -कोई काम नहीं है मुश्किल, जब किया इरादा पक्का।

आपका भी कोई सपना है जिसे आप पूरा करना चाहते हैं?  





Saturday, June 13, 2026

अख़बार की खबरें


 सुबह अखबार के पहले पेज पर खबर दिखी:

"युद्ध खत्म, करार जल्द होगा : ट्रंप ।"
ट्रम्प का कोई बयान पहले पेज पर छपता है तो उसके लगभग उलट ख़बर आख़िरी पेज पर पर होना लाजिमी होता है ।
दो दिन हुए पहले पेज पर छपा था :
"ईरान पर समझौते में एक-दो दिन का वक्त: ट्रंप।"
हमने पीछे का पन्ना देखा। खबर दिखी :
"ईरान ने अमेरिकी हैलोकॉप्टर मार गिराया, जबाब देंगे -ट्रंप।"
पहले पेज की उलट खबर देखकर लगा -"हमारे विश्वास की रक्षा हुई।"
आज आख़िरी पेज पर ख़बर थी :
"बात तो बनी पर समझौते की शर्तों पर संशय।"
एकदम उलट तो नहीं लेकिन पहले पेज की खबर जैसी भी नहीं।
कभी-कभो लगता है ट्रंप जी किसी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे हैं। उनकी टीचर में उनको विपरीत अर्थ वाले डायलॉग बोलने का काम दे रखा है। वे सुबह एक बयान देते हैं। शाम को उससे उलट दूसरा बयान। जैसे कोई बच्चा स्लेट पर लिखे -'समझौता।' फिर टीचर की बात याद आने पर डस्टर से स्लेट पोंछ कर लिखे -'हमला।'
अख़बार के आख़िरी पेज पर कई चिल्लर ख़बरों के बीच ख़बर दिखी :
"दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति को 30 वर्ष की सजा"
पूर्व राष्ट्रपति युन सुक यओल पर आरोप है कि उन्होंने मार्शल लॉ लागू करने की अपनी कोशिश से पहले संकट पैदा करने के लिए उत्तर कोरिया में ड्रोन भेजे थे।
पहले पेज पर विस्तार से छपने लायक़ आख़िरी पेज पर छपी देखकर ताज्जुब नहीं हुआ। आज दुनिया के तमाम शासक सत्ता पर बने रहने के लिए कृत्तिम संकट का हौवा दिखाते हैं। कोई अपने देश को महान बनाने के बहाने देश को बर्बाद करता है, कोई किसी बहुसंख्यक क़ौम को ख़तरे में बताते हुए सत्ता पर कब्जा बनाए रखता है। इजरायल के प्रधानमंत्री पर तमाम आरोप हैं। उनको दायें-बायें करने के लिए वे ईरान में लड़ाई लंबी खींचना चाहते हैं। लड़ाई होती रहे, वे बचे रहें, प्रधानमंत्री बने रहें ।
आज स्वीमिंग करने गए। बारिश के कारण हुई नहीं । पानी से ज़्यादा ख़तरा कड़कती बिजली का था। पिच गीली होने के कारण मैच में देरी की तर्ज पर तैराकी लेट होती गई। एक बार बारिश धीमी होने पर पूल पर जाने के लिए बोला गया। हमारे पानी में उतरते ही बारिश तेज हो गई। हमें वापस बुला लिया गया।
एक उम्रदराज महिला ने अपना तैराकी का अनुभव साझा करते हुए बताया -'आर्थराइटिस है। डॉक्टर ने तैराकी बताया है। तैरना तो नहीं सीखे लेकिन मजा आ रहा है। हमने उनको खड़े-खड़े डायना नायड़ का किस्सा सुना दिया। उनको ताज्जुब हुआ। अच्छा भी लगा।
साथ में पूल पर बच्चा उतरा था। उसका नाम त्रिजल है। पापा साथ में आते हैं । बताया -'ये स्वीमिंग सिखाने के पैसे माँगता है। इसलिए हम नहीं तैरते।'
आज शाम को जाएँगे तैरने ।

Friday, June 12, 2026

तैराकी सीखने का बाहरवाँ दिन


कल रात सोते समय डायना नायड की आटोबायोग्राफी का यह अंश पढ़ा :

My (swim) suit is hanging on a hook next to the robe. The surreal feeling is coming on. i am ultra-aware of the milecules of oxygen traveling with each long sip of air to the bottom of the solar plexes , then the corban dioxide inching back up towards my lips.

मेरा (स्विम) सूट कपड़ों के बगल में हुक पर टंगा है। एक अजीब सा एहसास हो रहा है। मुझे हवा के हर लंबे घूंट के साथ ऑक्सीजन के मॉलिक्यूल्स के सोलर प्लेक्सस (पेट के ऊपरी हिस्से) तक जाने और फिर कार्बन डाइऑक्साइड के धीरे-धीरे वापस मेरे होंठों तक आने का पूरा एहसास हो रहा है।

यह मन:स्थिति डायना नायड की क्यूबा से फ्लोरिडा तैराकी के अभियान में तीसरी बार तैरने के लिए जाते समय की है। इसके पहले दो बार वे असफल हो चुकी थीं। तीसरी बार की तैराकी में उनके साथ असफलता का अनुभव और सफल होने का जज्बा था।

अपन भी रोज तैरते हुए सोचते हैं कि आज पक्का पानी में साँस लेना सीख जाएँगे। अभी आधी अधूरी सफलता मिली है। सारे स्टेप्स याद हो गए हैं लेकिन अमल में लाते समय भूल जाते हैं।

वैसे डायना नायड का जिक्र करने के पीछे की मंशा यह समझना और जताना भी है हमारा अभी तक पानी में सांस लेने में असफल होना और डायना नायड का क्यूबा से फ्लोरिडा तैरने में दो बार असफल होना एक जैसा है। लेकिन यह बात उसी तरह की है जिसमें राजनीतिक पार्टी अपने भ्रष्टाचार, अपराध और कमीनगियाँ पहले की पार्टी के भ्रष्टाचार, अपराध और चिरकुटैयों का जिक्र करके जस्टिफ़ाई करती हैं। पानी में जरा सा हाथ पांव मारने लेने से कोई डायना नायड नहीं हो जाता।

तुलना संपूर्णता में ही ठीक लगती है। आधी-अधूरी तुलना भुलावे के सिवा और कुछ नहीं।

ब्रेस्ट स्ट्रोक में तैरते हुए साँस लेने का फ़ंडा बताते हुए कोच ने सिखाया -'पानी को नीचे धकियाओ। पानी बदले में आपको ऊपर धकेलेगा। ऊपर आते से पहलें नाक से सांस छोड़िए। उससे भी ऊपर आने का पुश मिलेगा। साँस पूरी मत छोड़िये। 60-70 % छोड़िए। ऊपर आते समय मुँह खोलकर साँस ले लीजिए। फिर इसी को दोहराइये।

तैरना भी एक प्रोजेक्ट है। साँस चोरी का अभियान। चोरी करने वाला तो एक होता है लेकिन उसके सहयोगी कई होते हैं। कोई इशारा करता है -'शिकार आ रहा है।' कोई बताता है -'नज़दीक आ गया शिकार।' कोई झपट्टा मारने का इशारा करता है। झपट्टा मारने के बाद कोई बाइक स्टार्ट किए हुए तैयार रहता है। उस पर बैठकर चोर लोग माल पार करके फूट लेते हैं। लूटा हुआ ग्राहक लिखाता रहे FIR.

अपन भी तैरते हुए डायना नायड की तरह आने वाली साँस, जाने वाली साँस का हिसाब रखकर तैरते रहे। हाथ से पानी नीचे करके ऊपर आते लेकिन जैसे ही मुँह ऊपर करते, पाँव छपछपाना छोड़कर हमारा साँस लेना देखने लगे। हाथ का भी ध्यान साँस लेने की तरफ़ हो जाता। हाथ और पैर के जिम्मे पानी में संतुलन बनाने का काम है। लेकिन साँस तैरते समय सांस लेने के समय दोनों अपना काम छोड़कर तमाशबीन बन जाते हैं। संतुलन गड़बड़ा जाता। हम बाक़ी की साँस भी पानी में छोड़कर वहीं खड़े हो जाते।

पानी में तैरते हुए लगा कि काश हम भो मछली की तरह गाल से साँस लेना जानते होते तो आराम से तैरते। लेकिन फिर हमको लगता कि अगर ऐसा होता तो न जाने कब कोई बड़ी मछली हमको खा गई होती। हम किसी जाल में फँसकर किसी फ्राई पैन में तले जा चुके होते। बुद्धिनाथ मिश्र जी का गीत है न :

'एक बार और जाल फेंक रे मछेरे
जाने किस मछली में बंधन की चाह हो।'

गीत सुनने में भले मोहक है लेकिन किसी मछली में ख़ुद बंधन में फँसने की चाह नहीं होती। चारे के लालच में भले वे जाल में फँस जाएँ लेकिन अगर उनको पता होता कि इसमें बंधन है तो वे शायद चारा न खाती।

मछलियों और इंसानों में यही फ़र्क़ होता है। मछलियाँ अनजाने में फँसती हैं। इंसान जानबूझकर लालच में फँसता है। उसको बंधन में मजा आता है। दुनिया भर के लोग नौकरी करते हुए जिंदगी गुजारते हैं, मन के ख़िलाफ़ समझौता करते हुए जीते हैं। राजनीति में नेता अपने विरोधी दल में शामिल होने में बेशर्म होकर शामिल हो जाते हैं।

आज तैरते हुए यह भी एहसास हुआ कि साँस जल्दी फूल जाती है। स्टैमिना बढ़ाना है। साइकिलिंग और वाकिंग का अभ्यास करना है। दौड़ने की बात लिखने में खतरा है कि Satish Saxena जी अपनी पार्टी ज्वाइन करा लेंगे।

लौटते हुए तिराहे पर देखा। कल जली हुई कार आज उठ गई थी। जहाँ कार जली हुई थी वहाँ सड़क भी सुलगी हुई थी। कार के टायर का कुछ हिस्सा अभी भी सड़क पर चिपका हुआ था। टायर और कार की तारीफ़ करते लोग कहते हैं -'गाड़ी चपक के चलती है।' लगता है जली हुई कार के टायर ने यह बात दिल पर ले ली। उसका निचला हिस्सा अभी भी सड़क से चिपका हुआ है। कार चली गई लेकिन टायर अभी सड़क से चिपका हुआ है।

आज हमारा तैराकी सीखने का बाहरवाँ दिन था। 

Thursday, June 11, 2026

तिराहे पर कार

तिराहे पर जली खड़ी कार 

 आज सुबह तैराकी के लिए जाते हुए तिराहे पर एक कार दिखी। पूरी जली हुई। गाड़ी क्या, गाड़ी का कंकाल था। कोई पास नहीं था उसके। एकदम सन्नाटे में खड़ी थी कार। ऐसे जैसे किसी से गुस्सा होकर कार ने अपने सारे कपड़े उतार दिए हों। हर खिड़की टूटी। हर अंग खुला। 

सुबह स्वीमिंग के लिए जल्दी थी इसलिए चले गए। सोचा लौटकर देखेंगे। 

लौटकर कार के पास गए। एकदम तिराहे पर खड़ी थी कार। आसपास के लोगों से पूछा। एक ने बताया -'पता नहीं, लोग बता रहे हैं रात में जली।' दूसरे ने बताया -'रात बारह बजे आग लग गई कार में। पता नहीं कैसे? एक आदमी तीन महिलायें थीं। सब बाहर आ गए थे। बच गए।' 

कार के अंदर झांककर देखा सारे अंजर-पंजर जले हुए थे। टायर के जले धागे दिख रहे थे। पीछे से देखा मारुति सुजुकी थी कार। सिलेंडर रखा था डिक्की में। हमें लगा शायद सीएनजी सिलेंडर से आग लगी हो। हमने यह अनुमान लगाया। लेकिन हमारे अनुमान को बगल में खड़े आदमी ने ख़ारिज कर दिया। कहते हुए -'सिलिंडर से आग लगी होती तो ब्लास्ट हो जाता सिलेंडर। सिलिंडर एकदम सुरक्षित है। आग इंजन में लगी । उसी से जली है कार। गनीमत है लोग बच गए।' 

जली कार के अंदर जले/अधजले आम 

एक और न कन्फ़र्म किया -' एक आदमी कार चला रहा था। आधा बुजुर्ग था। 40-45 की उमर का। दो औरतें थी। एक बच्ची। अचानक कार में आग लग गई। सब लोग नीचे उतर गए। बच गए। पुलिस आई थी। पूछताछ कर रही थी। 2013 की कार है। शायद इंश्योरेंस नहीं था। रहा होगा तो काग़ज़ नहीं थे।' 

अंदाजा लगाया लोगों ने कि इंजन गर्म हो गया होगा। कूलेंट/लुब्रिकेंट नहीं रहा होगा। हीट हो गई कार। सुलग गई। जिस जगह जली थी कार उस जगह सड़क भी धंस गई थी।

कार के पीछे का हिस्सा। सीएनजी का सिलिंडर दिख रहा है। 

कार के फर्श पर खूब सारे आम बिखरे थे। कम से कम दो बोरी रहे होंगे। छोटे-बड़े आम। कुछ जले हुए, कुछ अधजले। उनकी ख़ुशबू फ़िज़ा में  जरूर पसरी होगी। जले हुए बेचारे कार में असहाय पड़े हुए थे। कार जली न होती तो किसी के घर काट कर खाये जाते। शाम तक कार ऐसे ही खड़ी रही तिराहे पर। अभी भी खड़ी है। उधर से गुजरने वाले आते-जाते कार के बारे में ज़रूर पूछते दिखते हैं। 

कार के जलने का कारण पक्का पता नहीं लेकिन अंदाज़ यही है कि उसकी ठंडा करने की व्यवस्था गड़बड़ा गई होगी। ऑटोमैटिक कारों में तो अलार्म बजते हैं, गाड़ी बताती है कि ये गड़बड़, वो गड़बड़। लेकिन पुराने जमाने की कारें बिना बताये खड़ी हो जाती हैं। जल जाती हैं। उनकी सेहत के बारे में जानकारी के लिए समय-समय पर कार-डॉक्टर से चेकअप कराते रहना चाहिए। पता नहीं कब कार सुलग जाये। 

गर्मी भयंकर पड़ रही है। इंसान भी कार की तरह ही है। गर्मी से बचाकर रहना चाहिए। अपना कूलेंट/लुब्रीकेंट चेक करते रहना। 

तैराकी सीखने का ग्यारहवां दिन

 



आज सुबह समय पर पहुँचे स्वीमिंग पूल। ठीक आठ बजे। पानी में उतरकर तैरना शुरू किया। तैराकी EV वाहन की तरह हो रही है। इलेक्ट्रिक गाड़ियां उतनी ही चलती हैं जितनी चार्ज होती हैं। चार्ज होने के बाद खड़ी हो जाती हैं। जहाँ तक साँस रहती, वहाँ तक तैरते। इसके बाद सांस छोड़कर ऊपर आ जाते। दुबारा साँस भरते। तैरते। ऐसा कई बार किया।

कोच से पूछा तो उसने बताया -'ऐसे ही करिए। हो जाएगा।'

 उसके समझाने के तरीके से मुझे गोरख पांडेय की कविता याद आ गई :

"समाजवाद बबुआ, धीरे-धीरे आई"

मतलब हड़बड़ाना नहीं है। तैराकी आई बबुआ, धीरे-धीरे आई। 

कोच ने समझाया -'आपका पीछे का वजन ज्यादा है। पैर जल्दी-जल्दी चलाइये। बैक स्ट्रोक लेते समय पानी को नीचे धकेलिये। ऊपर आते समय सांस ले लीजिए। मतलब न्यूटन बाबा का क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम स्वीमिंग पूल में भी लागू है। कोच ने जब पीछे का वजन ज़्यादा होने वाली बात कहीं तो लगा वहीं छाँट देते थोड़ा वजन। लिखने वाली कलम की तरह छील देते चाकू दे नीचे का भारीपन। लेकिन ऐसा होता कहाँ है?

सबेरे कई वीडियो देखकर गए थे। थ्योरी एकदम पक्की करके गए थे। लेकिन प्रैक्टिकल में हुआ नहीं। कई बार की कोशिश के बाद सर ऊपर आना शुरू हुआ। लेकिन मुँह से साँस लेते ही फिर गड़बड़ा जाते। फिर कोशिश करते । फिर लड़खड़ाते। हमारे हाल उस गाड़ी जैसे हो गए जैसे जीपीएस में गाड़ी लोकेशन के आसपास टहलती रहती है लेकिन मंजिल पर पहुँच नहीं पाती। 

वीडियो में यह भी बताया गया था कि बैक स्ट्रोक में सांस लेने टाइमिंग का मसला है। एकदम सर्जिकल स्ट्राइक टाइप। पानी को नीचे धकियाओ। बदले में पानी ऊपर को धकियाये , सर ऊपर आए, उसी समय साँस ले लो। चुके तो फिर मुंडी पानी के अंदर। कई बार कोशिश करने पर सर तो ऊपर आ गया लेकिन साँस लेने से पहले फिर पानी के अंदर।

साँस लेने के पहले सर पानी के अंदर हो जाने का कारण ऊपर आते समय पैर ठहर जाना लगा। जैसे कोई घटना होने पर सड़क पर खड़े लोग सहायता करने की बजाय वीडियो बनाने  लगते हैं। फोट खींचने लगते हैं। उसी तरह सर ऊपर आते समय पाँव ठहरकर सर का मूवमेंट देखने लगते। सर और पांव का तालमेल इंडिया गंठबंधन के चुनाव के समय एक्शन की तरह हो जाता। तालमेल के अभाव में पानी पूल का पानी शरीर के साथ खेल कर जाता। 

देखते-देखते आज भी घंटा पूरा हो गया। सीटी बज गई। पूल के बाहर आने का संकेत हो गया। हम भी पूल के बाहर आ गए। बाहर आकर गाड़ी स्टार्ट करके घर आ गए। 

घर आकर DIANA NYAD की ऑटोबायोग्राफी Find a Way निकालकर पढ़ना शुरू किया। करीब 300 पेज की किताब है। ऐसा लगता है कि किताब पूरी होने तक तैरना सीख जायेंगे। सोचने में क्या हर्ज है। 

सोचने को बड़े लोग देश को अगले 20 साल में ठेल-ठाल कर विकसित बनाने हल्ला मचाए हुए हैं। भले ही देश की अर्थव्यवस्था दिन पर दिन गड़बड़ा रही है, रुपया डब रहा है, देश के स्मार्ट शहरों में पीने का पानी नहीं है, सीवर लाइन, पानी के लाइन के साथ बचपन की सहेलियों की तरह गलबहियाँ करते हुए साथ बह रही हैं।

आज हमारी तैराकी सीखने का ग्याहरवाँ दिन था। 



Monday, June 08, 2026

तैराकी का नवाँ दिन



आज सुबह स्वीमिंग पूल के निकलते समय कूड़ा गाड़ी आ गई। गाना  बज रहा था :

सुन लो भैया, सुन लो भाभी, सुन लो अम्मा जी,

कचरे वाली गाड़ी में सब कचरा  डालो जी।

यहाँ न फेंको, वहाँ न फेको, पास न डालो जी, 

कचरे वाली गाड़ी में सब कचरा  डालो जी।

कचरे वाला डब्बा हम सुबह ही बाहर ही रख चुके थे। चाय बनाते समय। कूड़ा गाड़ी का ड्राइवर आसाम का है। कुछ दिन पहले वोट देने गया था आसाम। उन दिनों कोई दूसरा लड़का आता था गाड़ी के साथ। पता ही नहीं चलता कभी-कभी। असमिया बालक भूल जाने पर घंटी बजाकर कूड़ा ले जाता है। मिलने पर हाल-चाल हो जाते हैं।

निकलते हुए आठ बजने में एक मिनट बाकी था। स्पीड से गाड़ी भगाई। आगे दो कूड़ा गाड़ियाँ आ गईं। पीछे वाली गाड़ी शायद ख़राब थी। आगे वाली उसको घसीट रही थी।  देखकर लगा -'कूड़ा, कूड़े को खींचता है। दोनों गाड़ियों में गीला कूड़ा, सूखा कूड़ा लिखे डब्बे थे। हमने कूड़ा गाड़ियों को ओवरटेक करते हुए आगे निकलना चाहा। सामने से ऑटो आ गया। हम औकात में आ गए। फिर से कूड़ा गाड़ी के पीछे चलने। तब तक चलते रहे जब तक कूड़ा गाड़ी और हमारे रास्ते अलग नहीं हो गए। कूड़ा गाड़ियां सीधे चली गईं। हम बायें मुड़ गए।

स्वीमिंग पूल पाँच मिनट लेट पहुँचे। शॉवर लेकर पूल में उतरे। पहले रॉड पकड़ कर फ्लोटिंग का अभ्यास किया। फिर किनारे ही सर पानी में डालकर और ऊपर करके साँस लेने का अभ्यास किया। दस बार। इसके बाद पानी में तैरने का अभ्यास। अब नम्बर तैरते हुए साँस लेने का अभ्यास करना था। कई बार कोशिश की। हर बार संतुलन गड़बड़ा जाता। जैसे ही साँस छोड़कर मुँह ऊपर करने को कोशिश करते, हाथ और पांव इधर-उधर हो जाते। हाथ चलते तो पैर ठहर जाते। पाँव चलते तो हाथ थम जाते। एकाध बार लगता अब हो जाएगा। लेकिन फिर गड़बड़ा जाता। 

साथ में चलते कोच से पूछा। उसने बताया कि आप हाथ बैक स्ट्रोक की तरह चला रहे हैं, पाँव सीधे-सीधे। ऊपर -नीचे। दोनों में तालमेल का अभाव है। पाँव भी बैक स्ट्रोक की तरह चलाइये, मेढक की तरह। पानी को नीचे धकेलते हुए। जब सांस छोड़ें तब पानी नीचे धकेलें। सर ऊपर आयेगा। उस समय साँस ले लजिये। हो जाएगा।  

उसकी बातचीत से लगा कि हम मिश्रित अर्थव्यवस्था की तरह तैरना सीख रहे हैं । हाथ और पांव में तकलीफ़ के कारण  यह तय हुआ था। ऊपर से दूसरे कोच ने बताया -'सर के  पांव में तकलीफ़ हैं। इसलिए मिक्स तरीके से सीख रहे हैं।' 

साथ वाले ने कहा -'फिर वैसे ही करिए।' 

हम वैसे ही करने लगे। जितने कोच उतने सिखाने के तरीक़े। हर कोच अपने तरीके से बताता है। हम उसकी तरह सीखने की कोशिश करते हैं। 

कोच के बताने के बाद थोड़ी देर अभ्यास किया। लगा आज ही सीख जायेंगे पानी में साँस लेना। दो-तीन बार कोशिश की। हो नहीं पाया। और कोशिश करते तब तक सीटी बज गई । पूल से निकलने का समय हो गया। हम थोड़ी देर और तैरते रहे। इसके बाद बाहर निकल आए। कोच से बात की तो उसने कहा -'सीख जायेंगे। बच्चे जल्दी सीख जाते हैं। आपकी एज भी है।' 

हमने सोचा -'सीख तो जायेंगे ही। समय भले लगे।'  

पूल में तैरते समय लगा कि तैरने में साँस संरक्षण का नियम चलता है। जितनी साँस बचाकर रखेंगे उतना अच्छा तैरेंगे। साँस कंजूसी बहुत अहम है तैराकी में। 

कल स्वीमिंग पूल बंद है। अब अगली तैराकी परसों होगी। वुधवार को सीखेंगे। 

आज तैराकी सीखने का नवां दिन था। 


गहनू नेता से मुलाकात

 

गहनू नेता 



एक दिन स्वीमिंग पूल से लौटते हुए गहनू मिले। गहनू नहीं, गहनू नेता। दूर से साइकिल पर झंडा और बोर्ड दिखा। पास आने पर झंडे पर कांग्रेस का चुनाव चिह्न दिखा। बोर्ड पर ऊपर अखिलेश यादव, राहुल गांधी की फ़ोटो। नीचे दायें कोने पर बाराबंकी के सांसद तनुज पुनिया के साथ गहनू नेता की फोटो। 

गहनू नेता को रोककर उनसे बातचीत की। पता चला कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी के समर्थक हैं। कांग्रेस का झंडा लगाए रहते हैं। बाराबंकी के सांसद तनुज पुनिया के संपर्क में हैं। किसानों की क़र्ज़ा माफ़ी, बिजली खाद की उपलब्धता उनकी माँग है। 

गहनू ने अपने नाम के आगे ख़ुद 'नेता' लिख रखा है। कोई  माने इससे पहले ख़ुद को बताना होगा 'नेता'। दुनिया माने न माने ख़ुद को 'विश्व गुरु' कहलाने का हल्ला मचवाना होगा। 

गहने ने बताया कि वे  हलवाई हैं। गड़ौरा (लखनऊ) की एक मिठाई की दुकान में काम करते हैं। दुकान का नाम बताया -'ब्रजभान लड्डू'। बर्फी, पेड़ा, लड्डू बनाने का काम करते हैं। किराए के कमरे में रहते हैं। 5000/- रुपए किराया। पत्नी भी काम करती हैं। लोगों के घर में साफ़ सफाई का काम। काम चल जाता है। 

हमने पूछा -'पुनिया जी , राहुल जी या अखिलेश जी तुमको कुछ पैसा भी देते हैं उनके प्रचार के लिए?' 

इस पर गहनू नेता ने बताया कि पैसा तो नहीं लेकिन कोई काम पड़ता है तो सहयोग कर देते हैं। एक पुलिस मामले में का उल्लेख करते हुए बताया कि तरुण पुनिया जी ने उनका सहयोग किया। उनकी बातचीत सुनते हुए लगा -'अपने यहाँ पुलिस मामले में निपटाने में नेताओं की सक्रिय भूमिका रहती है।'

गहनू नेता को अपनी दुकान जाना था। हमको घर। गहनू नेता ने हमको अपनी दुकान पर आने का निमंत्रण दिया है। मिठाई खिलाने का वादा किया। जाएँगे कभी।  गड़ौरा में 'ब्रजभान लड्डू' मिठाई की दुकान। 

गहनू नेता से मुलाक़ात एक  नागरिक चेतना संपन्न व्यक्ति से मुलाकात थी।