फ़ुरसतिया
हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै
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Saturday, September 05, 2026
पानी से दोस्ती
Thursday, September 03, 2026
जूता पॉलिश के बहाने
कल जूते में पॉलिश कराने गए। कैलाश धाम कॉलोनी के गेट पर बैठने वाले ‘ जूता साज’ दिखे नहीं। पूछा तो पता चला कि बहुत दिन से वहाँ नहीं बैठते। यह भी जानकारी मिली कि सेक्टर मार्केट में मिल जायेंगे पॉलिश वाले।
मार्केट गए। कोई दिखा नहीं। पूछा तो पता लगा कि पेड़ के पीछे बैठते हैं पॉलिश वाले। गए। पेड़ की आड़ में , दीवार के सहारे, दुकान सजाये बैठे थे धूरन राम जी।
जुटा पॉलिश के लिए देने से पहले पूछ लिया -‘ गूगल से भुगतान हो जाएगा?’ बोले-‘ हाँ , हो जाएगा।’
अपने यहाँ ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था की स्थिति बहुत शानदार है। ज्यादातर खरीद का और लेन-देन ऑनलाइन होने लगा है। सिर्फ़ बड़े भुगतान, घपले-घोटाले , जनप्रतिनिधियों की ख़रीद-फरोख्त इससे बाहर है।
पॉलिश करते हुए बातचीत से पता चला कि धूरन जी समस्तीपुर, बिहार के रहने वाले हैं। वर्षों पहले आए थे यहाँ। अब यहीं के हो गए। आते-जाते रहते हैं गाँव-जवार। तीज-त्योहार, काम-काज में।
इस बीच उनके एक साथी आए। हाथ में मली हुई सुरती तंबाकू फटकार कर धूरन जी को दी। उन्होंने तंबाकू होंठ के नीचे दबा ली। मुँह बंद हो गया उनका।
यह देखकर लगा कि किसी का मुँह बंद करने का सबसे अच्छा तरीका यही होता है कि उसको कुछ खाने को दे दो। दुनिया में यही चलन आम है। लोग पैसा, पद, प्रतिष्ठा खाकर चुप हो जाते हैं। कुछ बोल नहीं पाते।
तंबाकू खिलाने वाले साथ बेगूसराय , बिहार के हैं। बताया तमाम लोग आसपास के जिलों के हैं बिहार के। बिहार से उत्तर प्रदेश कमाने आने वालों के लिए कोई भाषा की समस्या और शर्त भी नहीं है महाराष्ट्र की तरह।
पॉलिश कराने के बाद धूरन राम जी ने पैसे बताये -30 रुपए। भुगतान किए। तभी उनका नाम पता चला। चलने से पहले उनका फ़ोटो लिया। उनको दिखाया।
लौटते समय जूते की चमक देखकर धूमिल जी की कविता ‘मोचीराम ‘याद आ गई। कविता की ये पंक्तियां ख़ासकर:
“ और बाबूजी! असल बात तो यह है कि ज़िन्दा रहने के पीछे
अगर सही तर्क नहीं है
तो रामनामी बेंचकर
या रण्डियों की दलाली करके
रोज़ी कमाने में
कोई फर्क नहीं है।”
Wednesday, September 02, 2026
नोयडा में तैराकी
कल नोयडा आना हुआ। Anany की सोसाइटी में स्विमिंग पूल है। शाम को तैरने गए। अनन्य पूल के मेंबर हैं। टोपी-चश्मा लेकर रखा है। लेकिन तैरने नहीं जा पाते। वैसे उसको अच्छे से आती है तैराकी। स्विमिंग के लिए समय नहीं मिलता। क्रिकेट की बात अलग। उसके लिए कहीं से भी समय का जुगाड़ हो ही जाता है।
Tuesday, September 01, 2026
पूल के बीच तैरते हुए
कल स्विमिंग पूल जाते समय सड़क पर एक बुजुर्ग दिखे। जिस तरह लोग, अधिकतर युवा, रास्ते में चलते हुए मोबाइल देखते रहते हैं। उसी तरह बुजुर्गवार सड़क पर अखबार पढ़ते चले जा रहे थे। वे पुराने जमाने के युवा थे। शायद भूतपूर्व जेन जी घराने के।
Sunday, August 30, 2026
तैराकी के तीन माह
आज स्विमिंग सीखना शुरू किए हुए तीन महीने हुए। तीस मई को पहली बार पूल में उतरे थे। लगता था पता नहीं कब सीख पायेंगे।
Saturday, August 29, 2026
13 मीटर के तैराक
आज बेटे अनन्य को एयरपोर्ट पर छोड़कर स्विमिंग पूल गए। 8-9 वाले बैच में हम अकेले थे। बाक़ी लोग सुबह वाले बैच में आकर चले गए थे। इसके बाद शाम के बैच चलेंगे।
Friday, August 28, 2026
दस मीटर के तैराक
कल सुबह स्विमिंग के लिए गए। 6-7 के बैच में।पहुंचे तो देखा पूल आधा खाली था। पता चला एक दिन पहले शाम को किसी बच्चे ने पूल के पानी में कई उल्टियाँ कर दीं। पूल का पानी बदला जाना है। रात आधा ही ख़ाली हो पाया। दो दिन लगेंगे पूल खाली होने और फिर भरने में।
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