Saturday, September 05, 2026

पानी से दोस्ती

 


स्विमिंग के लिए आज पौने आठ बजे पहुंचे। पूल के पानी में कोई नहीं था। कोच पूल किनारे बैठा मोबाइल समंदर में डूबा हुआ था। पानी हमारा इंतज़ार कर रहा था। हम आहिस्ते-आहिस्ते पानी में उतर गए।
देर तक पूल की साढ़े चार फीट गहराई वाली चौड़ाई में इधर-उधर होते रहे। कई बार गोलाई में चक्कर लगाते रहे। दो से ढाई चक्कर आराम से लगा लिए। मतलब क़रीब पच्चीस-तीस मीटर। पहले पाँच मीटर तैरने में हांफते हुए रुकते थे। अब आराम से दुबारा शुरू हो जाते हैं। शायद स्टैमिना सुधर रहा है।
दो-तीन बार छह फीट गहराई में गए। एकाध मिनट रेलिंग पकड़कर खड़े रहे। नीचे सतह में खड़े होकर देखा सर पूरा पानी में डूब जाता है। वापस लौट आए। एकबार बिना रुके , घूमकर भी लौटे। गहरे में तैर भले लें आराम से लेकिन उधर जाते हुए मन में लगता था -'गहरे में जा रहे। सावधानी से तैरना है।' लौटते हुए पानी में डुबकी लगाने के बाद सीधे होने तक भी सावधानी, जिसमें हलका सा डर का तड़का भी था, बनी रहती। पानी की इज्जत जरूरी है। थोड़ा सा डर भी।
एकबार यह भी देखा कि पानी में कितनी देर तक तैर सकते हैं। यह देखने के लिए एक ही जगह तैरते रहे। करीब पाँच मिनट हाथ-पाँव चलाते हुए पानी में तैरते रहे। इसके बाद भी थके नहीं थे। लेकिन पानी में खड़े हो गए।
तैरते हुए पांव अभी भी बहक जाते हैं। पाँव मेढक की तरह चलने की बजाय सरेंडरी मुद्रा में ऊपर उठ जाते हैं। यहाँ सरेंडर का जोड़ीदार शब्द भी जाना चाहता था लेकिन हमने उसको विनम्रता पूर्वक दूर कर दिया। नादान से दोस्ती जी का जंजाल।
करीब तीन महीने की तैराकी के बाद लगता है पानी से दोस्ती हो गई है। उसका और हमारा तालमेल ठीक सा हो गया लगता है। पानी का मिजाज समझ में आने लगा है। पानी बोलता नहीं है लेकिन इशारे से सब कुछ समझा देता है। आने वाले समय में इस दोस्ती को और पक्की करने का इरादा है।
स्विमिंग सीखना मेरे लिए एक अद्भुत अनुभव रहा है। तैरना सीखने के दौरान हमने करीब 36 पोस्ट्स लिखीं। कल उनको इकट्ठा किया। करीब 80 पेज हुए। मन किया अपने तैराकी सीखने के अनुभवों को किताब की शक्ल दी जाये। किताब का पहला ड्राफ्ट तैयार हो गया है। अब उसको फ़ाइनल करना है। नाम तय करना है।
आप का क्या सुझाव है इस बारे में? बनायें किताब? नाम क्या रखा जाये?
तैराकी का यह वीडियो का बेटे Anany Shukla ने बनाया।

Thursday, September 03, 2026

जूता पॉलिश के बहाने



 कल जूते में पॉलिश कराने गए। कैलाश धाम कॉलोनी के गेट पर बैठने वाले ‘ जूता साज’ दिखे नहीं। पूछा तो पता चला कि बहुत दिन से वहाँ नहीं बैठते। यह भी जानकारी मिली कि सेक्टर मार्केट में मिल जायेंगे पॉलिश वाले।


मार्केट गए। कोई दिखा नहीं। पूछा तो पता लगा कि पेड़ के पीछे बैठते हैं पॉलिश वाले। गए। पेड़ की आड़ में , दीवार के सहारे, दुकान सजाये बैठे थे धूरन राम जी।

जुटा पॉलिश के लिए देने से पहले पूछ लिया -‘ गूगल से भुगतान हो जाएगा?’ बोले-‘ हाँ , हो जाएगा।’

अपने यहाँ ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था की स्थिति बहुत शानदार है। ज्यादातर खरीद का और लेन-देन ऑनलाइन होने लगा है। सिर्फ़ बड़े भुगतान, घपले-घोटाले , जनप्रतिनिधियों की ख़रीद-फरोख्त इससे बाहर है।

पॉलिश करते हुए बातचीत से पता चला कि धूरन जी समस्तीपुर, बिहार के रहने वाले हैं। वर्षों पहले आए थे यहाँ। अब यहीं के हो गए। आते-जाते रहते हैं गाँव-जवार। तीज-त्योहार, काम-काज में।

इस बीच उनके एक साथी आए। हाथ में मली हुई सुरती तंबाकू फटकार कर धूरन जी को दी। उन्होंने तंबाकू होंठ के नीचे दबा ली। मुँह बंद हो गया उनका।

यह देखकर लगा कि किसी का मुँह बंद करने का सबसे अच्छा तरीका यही होता है कि उसको कुछ खाने को दे दो। दुनिया में यही चलन आम है। लोग पैसा, पद, प्रतिष्ठा खाकर चुप हो जाते हैं। कुछ बोल नहीं पाते।

तंबाकू खिलाने वाले साथ बेगूसराय , बिहार के हैं। बताया तमाम लोग आसपास के जिलों के हैं बिहार के। बिहार से उत्तर प्रदेश कमाने आने वालों के लिए कोई भाषा की समस्या और शर्त भी नहीं है महाराष्ट्र की तरह।

पॉलिश कराने के बाद धूरन राम जी ने पैसे बताये -30 रुपए। भुगतान किए। तभी उनका नाम पता चला। चलने से पहले उनका फ़ोटो लिया। उनको दिखाया।

लौटते समय जूते की चमक देखकर धूमिल जी की कविता ‘मोचीराम ‘याद आ गई। कविता की ये पंक्तियां ख़ासकर:

“ और बाबूजी! असल बात तो यह है कि ज़िन्दा रहने के पीछे
अगर सही तर्क नहीं है
तो रामनामी बेंचकर
या रण्डियों की दलाली करके
रोज़ी कमाने में
कोई फर्क नहीं है।”

Wednesday, September 02, 2026

नोयडा में तैराकी




 कल नोयडा आना हुआ। Anany की सोसाइटी में स्विमिंग पूल है। शाम को तैरने गए। अनन्य पूल के मेंबर हैं। टोपी-चश्मा लेकर रखा है। लेकिन तैरने नहीं जा पाते। वैसे उसको अच्छे से आती है तैराकी। स्विमिंग के लिए समय नहीं मिलता। क्रिकेट की बात अलग। उसके लिए कहीं से भी समय का जुगाड़ हो ही जाता है।

गेस्ट की हैसियत से गए तैरने शाम को। एक बार के चार्ज 200/- रुपए। गार्ड लालू प्रसाद बांदा के हैं। पैसे भुगतान करके उनको मोबाइल दिखाया। उतर गये पानी में।
पूल तीन फीट से लेकर छह फीट तक गहरा है। अपन देर तक पाँच फीट वाले इलाके में ही तैरते रहे। दो महिलाएँ , जिनकी ऊँचाई हमसे कम ही रही होगी, आराम से छह फीट वाले इलाक़े में तैरती रहीं। हम डरते रहे। लेकिन बाद में हिम्मत करके टटोलते हुए रेलिंग के सहारे छह फीट की गहराई तक गए। वहाँ से तैरते हुए कम गहराई तक आ गए। लेकिन तैरकर उधर जाने का मन नहीं बना। हिम्मत नहीं हुई।
घंटे भर बाद पानी तेज बरसने लगा। अपन लौट आए।
आज सुबह सात बजे फिर गए। पूल में हम अकेले थे। तैरते रहे। कोच मनीष और पूल मैनेजर अमन मोबाइल खेलते रहे। कई बार इधर-उधर तैरते हुए हिम्मत करके छह फीट गहरे पानी में गए। किनारे रेलिंग पकड़कर देर तक लटके रहे। रेलिंग पर लटके हुए सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का कविता संग्रह याद आया -“खूँटियों पर टंगे लोग।”
क़रीब दो घंटा तैरते रहे। इस बीच दो लोग आए। किनारे से किनारे तक तैरकर चले गए। अपन भी लगातार तैरते रहे। एक बार में करीब पचीस मीटर तक भी तैर गए।
लौटे समय पूल के बीच से किनारे तक गए। चार फीट की गहराई से छह फीट की गहराई तक। किनारे पहुंचकर रेलिंग पकड़ी। दीवार को धक्का देकर वापस पानी में। तैरकर पूल के दूसरे किनारे पहुंच गए।
तैराकी का आज का रिकार्ड रहा :
समय : दो घंटा पाँच मिनट दो सेकेंड
किलोकैलोरी: 487 एक्टिव/636 टोटल
दूरी : 860 मीटर
धड़कन : 88 प्रति मिनट
आज की तैराकी से लगा कि तैराकी का पहला ड्राफ्ट फाइनल हो गया। अब सुधार बाकी है। इसी बहाने रील बनाना भी आ गया थोड़ा-थोड़ा।
मेरी समझ में 62 साल की उम्र में तैराकी सीखना इस साल की उपलब्धि है।
आप भी कुछ न कुछ सीखिये। मजा आयेगा। अच्छा लगेगा।

Tuesday, September 01, 2026

पूल के बीच तैरते हुए

 कल स्विमिंग पूल जाते समय सड़क पर एक बुजुर्ग दिखे। जिस तरह लोग, अधिकतर युवा, रास्ते में चलते हुए मोबाइल देखते रहते हैं। उसी तरह बुजुर्गवार सड़क पर अखबार पढ़ते चले जा रहे थे। वे पुराने जमाने के युवा थे। शायद भूतपूर्व जेन जी घराने के।

उनको अखबार पढ़ते देख सोचा कि क्या अख़बार में हमारी कालोनी में बिजली का वोल्टेज कम होने की खबर छपी होगी।
सुबह घर का वोल्टेज बहुत कम था। इन्वर्टर चिंचिया रहा था। चार्जिंग वाला बटन बंद था। मोबाइल से फ़ोटो खींचकर पूछा AI से - ‘इसका क्या मतलब है?’
AI ने बताया कि बिजली का लफड़ा है। या तो कनेक्शन गड़बड़ है या सप्लाई।
आजकल AI का इतना दख़ल हो गया है कि हम हर चीज उसी से पूछते हैं। अपनी जानकारी और संवेदना पर भरोसा कम होता जा रहा है। बड़ी बात नहीं कि कल को दर्द होने पर हम अपनी फ़ोटो अपलोड करके AI से पूछें -‘ बताओ भाई AI माजरा क्या है ?’
इन्वर्टर की बैटरी में पानी भरना भी बहुत दिन से बाक़ी था। हमें लगा क्या पता इसका भी असर हो चार्जिंग न होने में। पानी भरा बैटरी के सब खानों में। पानी के डब्बे से गिलसिया में डालकर बैट्री में भरा पानी। सारे खाने ऊपर तक भर दिए। घर के दूसरे कई पावर प्वाइंट भी चल नहीं रहे थे। माइक्रोवेव , पंप। वोल्टेज कम होने की बात पड़ोसी के फ़ोन से भी कन्फ़र्म हुई। बात का खात्मा इस शाश्वत संवाद से हुआ -‘ जब लखनऊ में यह हाल हैं तो बाक़ी जगह क्या होगा?’
हम अपने कालोनी में लो वोल्टेज की खबर अख़बार में होने की सोच रहे थे। कितनी मासूमियत।
लौटकर अख़बार ने एक प्रापर्टी डीलर की हत्या की खबर पढ़ी। उसके ड्राइवर ने ही उसका अपहरण करके हत्यारों को बुलाया। उन लोगों ने अपना काम पूरा किया। अब पुलिस अपना काम कर रही है।
चंदा चोरी, एथनॉल पेट्रोल और दीगर घपलों की ख़बरें दम तोड़ चुकी थीं। नेपाल बाढ़ की विभीषिका अभी भी अख़बार में पसरी थी। कुछ लोगों के बाल-बाल बचने की कुछ कहानियाँ भी।
स्विमिंग पूल में सुबह के बैच ने हम अकेले थे। उतरकर तैरने लगे। दस मीटर चौड़ाई आराम से तैरे। फिर 13 मीटर लम्बाई भी तय की। इसके बाद लम्बाई और चौड़ाई एक साथ तय की। लम्बाई पार करने के बाद शरीर की गाड़ी तैरते हुए चौड़ाई की तरफ़ घुमा दी। क़रीब बीस मीटर दूरी तय की। RML पूल खुला होता तो उसकी पच्चीस मीटर चौड़ाई पार करते।
घंटा पूरा होने के पहले पूल के एक कोने से दूसरे कोने तैरते हुए आए। पूल के विकर्ण पर तैरते हुए। डायगोनिकली अपोजिट।आराम से तैर लिए। तैरने में अब कोई समस्या नहीं। बस स्टेमिना बनाना है। हाथ और पांव के बीच तालमेल ठीक करना है। कुछ दिन में यह भी हो जाएगा।
वीडियो पूल के बीच तैरते हुए। 👇 तैरना सीखने के साथ-साथ रील बनाना भी सीख रहे हैं।

Sunday, August 30, 2026

तैराकी के तीन माह

 आज स्विमिंग सीखना शुरू किए हुए तीन महीने हुए। तीस मई को पहली बार पूल में उतरे थे। लगता था पता नहीं कब सीख पायेंगे।

कई बार लगता था कि तैरना आना चाहिए। लेकिन कंधे की समस्या के कारण हिम्मत नहीं हुई। लगता कहीं पानी में कंधा न उखड़ जाये। लेकिन अक्टूबर में लक्षद्वीप टूर के दौरान स्कूबा डाइविंग के बाद बेटे अनन्य Anany ने कहा -'पापा स्वीमिंग सीख लीजिए।' उसी पल हमने तैराकी सीखने को अपनी 'विश लिस्ट' में शामिल कर लिया।
अक्टूबर में 'विश लिस्ट' में शामिल करने के बावजूद सीखना शुरू करने में सात महीने लग गए। 30 मई से राम मनोहर लोहिया स्विमिंग पूल में सीखना शुरू किया। कंधे की समस्या के चलते ब्रेस्ट स्ट्रोक सीखना शुरू किया। लेकिन पैर फ्री स्टाइल में ही चलाते रहे। पैर फ्री स्टाइल में चलाने का कारण कूल्हे की हड्डी का दर्द था। पाँच-सात मीटर बिना पानी में सांस लिए तैरने लगे तो लगा सीख गए। लेकिन बाद में पता चला यह तो हसीन भ्रम था। असल चीज तो पानी में तैरते हुए साँस लेना था।
बाद में कूल्हे का दर्द , शायद स्विमिंग के कारण ही, ख़त्म हो गया। हमने गठबंधन स्ट्रोक छोड़कर ब्रेस्ट स्ट्रोक की सरकार बनाई। सीखने लगे। जब हमें लगे कि हम सीख गए तब कोच कोई कमी बता देते।
हमने सैकड़ों वीडियो देखें। उनसे सीखा।याद किया लेकिन अमल में लाने में गड़बड़ाते रहे। तमाम बाधाएँ आयीं। कई बार लगा कि हमसे न हो पायेगा। लेकिन लगे रहे। अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔंध' जी की कविता याद करते :
'देखकर बाधा विविध, बहु विध्न घबराते नहीं।'
हमको अपने गुरु जी की कही बात भी याद आती रही -' दुनिया में कोई ऐसा काम नहीं जो दूसरे कर सकते हैं और तुम नहीं कर सकते।'
तैराकी के किस्से हम अपने लिए लिखते रहे। एक चुनौती थी ख़ुद के लिए कि तैरना सीखना है। सीखना ही है। इन किस्सों को पढ़कर कई मित्रों ने भी सीखना शुरू किया। दोस्त लोग उत्साह भी बढ़ाते रहे।
आज तीन महीने होने पर हमने पूल की चौड़ाई कई बार पार की। 12 मीटर का पूल है। एक बार विकर्ण पर चलते हुए तैरे -करीब 14 मीटर। साँस नहीं फूली। हाथ -पैर थोड़ा गड़बड़ हुए लेकिन अगली बार ठीक कर लिया। मुँह में थोड़ा पानी गया लेकिन उससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा। एक बार सामने कोई आया तो तैरते हुए ही ठहर कर उसको निकलने दिया। पहले सिटपिटा के खड़े हो जाते थे।
तीन महीने के दौरान चार पूल में तैरे। सबसे ज़्यादा RML में । लेकिन सीखा सबसे ज़्यादा दूसरे, छोटे कहे जाने वाले पूल में। इन पूल के कोच ने व्यक्तिगत रूप से टिप्स दिए। किसी न कुछ सिखाया, किसी ने कुछ। सभी का शुक्रिया।
आप सभी मित्रों का आभार।

Saturday, August 29, 2026

13 मीटर के तैराक

 आज बेटे अनन्य को एयरपोर्ट पर छोड़कर स्विमिंग पूल गए। 8-9 वाले बैच में हम अकेले थे। बाक़ी लोग सुबह वाले बैच में आकर चले गए थे। इसके बाद शाम के बैच चलेंगे।

आज दस मीटर की दूरी पूल की आराम से कई बार पार हुई। आते-जाते। पैर अभी भी ठीक नहीं चल रहे थे। दो-चार किक मेढक की तरह होते इसके बाद फिर हवा में उठ जाते पैर झंडे की तरह। जैसे बदमाश लोग जल्दी साथ नहीं छोड़ते उसी तरह खराब आदतें देर तक साथ देती हैं।
दस मीटर चौड़ाई आराम से कई बार तय करने के बाद पुल की लंबाई पर हाथ साफ़ किया। लंबाई 13 मीटर है। पहली बार तो मुँह में पानी भर जाने के कारण आधी दूरी पर ही खड़े हो गए। दूसरी बार आराम से 13 मीटर तैर लिए। एक बार तय कर लिए तो फिर दुबारा भी किए। तिबारा भी। कोई पर्वतारोही एक बार एवरेस्ट पर चढ़ जाता है तो बार-बार चढ़ता है। उसी तरह हमने भी कई बार पुल की लंबाई पार की।
तैराकी का घंटा पूरा होने के पहले हमने सोचा तैरने का वीडियो बनाया जाये। कोच शिव ने मेरे मोबाइल से वीडियो बनाया। दस मीटर की जो दूरी हम पहले आराम से तैर ले रहे थे उसको पार करते हुए ध्यान सामने कैमरे की तरफ़ गया। इस चक्कर में पानी मुँह में भर गया। हम वहीं ठहर गए। जैसे कोई भाषण देते नेता का टेलीप्रॉम्टर खराब हो जाने पर वह वहीं अटक जाता है। रुक जाता है। वह किंभाषणविमूढ़ हो जाता है। उसी तरह मुँह में पानी जाने से हम बीच पूल खड़े हो गए। तैरना स्थगित हो गया। किक लगी नहीं। मतलब हम किंकिकविमूढ़ हो गए। वापस शुरुआती जगह पर गए। फिर से तैरना शुरू किया।
पूल किनारे आने के बाद वापस जाते समय भी वीडियो बनवाया। इस बार सर की जगह पैर मोबाइल कैमरे के सामने थे। दूसरी तरफ़ पहुँच गए। दस मीटर दूरी तारे करने के बाद भी हाँफना नहीं हुआ। तसल्ली से तय हुई दूरी। जैसे 13 मीटर तय हुई थी।
वीडियो देखने पर दो कमियाँ पता चलीं। पहली और प्रमुख गलती यह कि किक करते समय पैर पानी के अंदर मेढक की तरह न चलकर ऊपर की तरफ़, हेलीकॉफ्टर के पिछले पंख की तरह चल रहे थे। दूसरी बात हाथ चलाते समय कई बार ग्लाइड करना भूल जा रहे थे। इस चक्कर में हाथ जल्दी-जल्दी चल रहे थे। थकान हो जा रही थीं।
इस सबके बावजूद आज की उपलब्धि यह रही कि अब हम दस मीटर से बढ़ाकर 13 मीटर के तैराक हो गए। कल में मुकाबले 30% सुधार। एक घंटा छह मिनट में 321 एक्टिव किलो कैलोरी खर्च हुई। यह खर्च किसी भी दिन के मुक़ाबले सबसे ज़्यादा हुआ।
13 मीटर के तैराक होने के बाद अब अगला कदम क्या होगा यह कल पता चलेगा। फ़िलहाल आप आज के तैराकी के वीडियो देखिए। बताइए कैसा लगा देखकर।

Friday, August 28, 2026

दस मीटर के तैराक


 कल सुबह स्विमिंग के लिए गए। 6-7 के बैच में।पहुंचे तो देखा पूल आधा खाली था। पता चला एक दिन पहले शाम को किसी बच्चे ने पूल के पानी में कई उल्टियाँ कर दीं। पूल का पानी बदला जाना है। रात आधा ही ख़ाली हो पाया। दो दिन लगेंगे पूल खाली होने और फिर भरने में।

तैराकी के लालच ने हमने आसपास के कई स्विमिंग पूल खोजे। गूगल की सुविधा -swimming pool near me का उपयोग करके। जो पूल मिले उनमें से कुछ काफ़ी दूर थे। पास के पूल अधिकतर बंद हो चुके थे। एक पूल खुला था। हमने सोचा 8-9 वाले बैच में जायेंगे वहाँ तैरने। अभी घंटा भर बाक़ी था। इसलिए घर लौट आए।
आठ बजे के हिसाब से पूल के लिए निकले। कार से। मैप देखते हुए पूल पहुँचे तो देखा तो पूल बंद था। मतलब हम गलती से उस पूल पर पहुँच गए थे जिसने पहले ही बता दिया था कि पूल बंद है।
अपनी गलती पर ख़ुद को थोड़ा हड़काया। फिर उस पूल की तरफ़ गए जिसने खुला होने के बारे में बताया था। लोकेशन पर पहुँचे तो वह पूल splash पूल के बगल में था जहाँ अपन दो बार पहले भी आ स्विमिंग कर चुके हैं। इस पूल का नाम था - Summer Wind Swimming Academy. स्प्लैश और समर विंड मिलकर पहले एक ही पूल था। दो भाइयों का पूल। बंटवारा हुआ तो पूल के बीच दीवार उठ गई। एक पूल दो भागों में बंट गया। अम्बुजा सीमेंट वाली दीवार की तरह।
कल देर हो गई थी। फिर शाम को जा नहीं पाये। आज पूल शाम को 7-8 खुलना था। गए तैरने। पूल की अधिकतम गहराई पाँच फीट है। लंबाई 13 मीटर , चौड़ाई 10 मीटर । हम पानी में उतर गए। हमारे अलावा एक बच्चा , एक महिला और एक युवा पूल में थे। कोच कहीं टहलने गया था।
शुरुआत में पूल की चौड़ाई दो बार ने तय की। अब सर ठीक से उठने लगा है। साँस लेने लगे हैं। पैर भी ठीक चलने लगे। लेकिन शुरुआत में आधी दूरी पर रुकते रहे। कभी मुँह में पानी चला जाता, कभी हाथ ग़लत चल जाता। कभी पैर।
कोच शिव ने बताया कि पैर पीछे ले जाते समय पंजे मिलाइये। हमने ध्यान से मिलाया। इसके बाद तैरे तो दस मीटर की दूरी तय कर ली। साँस भी नहीं फूली। कई बार पूल की चौड़ाई तैर कर पार की।
मतलब अब हम सवा छह मीटर के तैराक से दस मीटर के तैराक हो गए। यह करीब पचास प्रतिशत का सुधार है।
वापस आते हुए देखा कि कार का अगला शीशा खुला था। हम मोबाइल कार में छोड़कर गए थे। लगा मोबाइल विदा हो गया। जी धक्क से हुआ। लेकिन देखा कि मोबाइल कार में आराम फ़रमा रहा था। एक बार फिर जी धक्क से हुआ। एक मिनट में दो बार जी धक्क से हुआ। एक डर के मारे दूसरी बार संतोष के मारे। दिल ने हड़काया दिमाग़ को कि जरा ध्यान से कार का दरवाज़ा बंद किया करो।
दिमाग़ ने मुस्करा कर दिल को लव यू बोला। दोनों मुस्कुराते हुए आपस में बतियाने लगे।
फ़ोटो रक्षाबंधन के मौक़े पर परिवार के साथ। लंबे अरसे बाद दोनों बेटे एक साथ घर पर आए। इस घर में तो पहली बार। आप को रक्षा बंधन की शुभकामनाएँ।