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Wednesday, September 30, 2026

देश में शादी, विदेश में जयमाल

साकेत और मान्या बाली के स्थानीय परिधान में।

 बाली के पुरा उलुन दानु बेराटन मंदिर के परिसर में एक युवा जोड़ा बाली की पराम्परिक पोशाक में दिखा। सिंहासन जैसे आसन पर बैठा। एक पुरोहित कुछ पूजा जैसी कराते दिख रहे थे। फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी हो रही थी।

चूँकि बाली के मंदिरों में ग़ैर बाली लोगों का प्रवेश वर्जित है हमने सोचा शायद किसी स्थानीय जोड़े का विवाह संस्कार हो रहा हो। हमने दूर से देखते हुए उनका फ़ोटो लिया।
फोटोग्राफी के दौरान स्थानीय परंपरा के अनुसार अनुष्ठान के साथ वाद्ययंत्र भी बजाये जा रहे थे।
ऐसा लग रहा था किसी राजसी परिवार के राजकुमार-राजकुमारी का वैवाहिक अनुष्ठान संपन्न हो रहा हो।
फोटोग्राफी कराने के बाद जोड़ा परिसर से बाहर, मंदिर के अहाते में आया। सुंदर गोरे स्वस्थ चेहरे-मोहरे वाले जोड़े को पास में देखकर लोग उसके साथ फ़ोटो खिंचवाने लगे। फोटो के साथ बातचीत भी हुई।
ख़ूबसूरत युवा जोड़े के साथ एक पर्यटक फोटो खिंचवाते हुए।


बातचीत से पता चला युवा जोड़ा बाली का न होकर हिंदुस्तानी है। मुंबई में रहते हैं। पिछले साल उनकी शादी हुई थी। बाली यात्रा के दौरान स्थानीय पारंपरिक परिधान में फोटो खिंचाने के लिए मंदिर परिसर में आए हैं।
मान्या और साकेत मूलत: झारखंड और बिहार के रहने वाले हैं। मान्या कॉग्निजेंट और साकेत बिरला में काम करते हैं। बाली में स्थानीय परिधान और वातावरण में फ़ोटो शूट कराने का आइडिया मान्या का था। पूरी ट्रिप मान्या ने ही प्लान की थी। साकेत ने अच्छे जीवनसाथी की तरह इस आइडिया पूरा करने में सहयोग किया।
मान्या ने बताया घूमना, खाना बनाना और बैडमिंटन खेलना उनकी हॉबी है। साकेत काम में जुटे रहते हैं।

कुछ दिन पहले परिचय और दोस्ती में विजिटिंग कार्ड दिए-लिये जाते थे। आजकल फेसबुक, इंस्टाग्राम आई डी और व्हाट्सएप नंबर आदान-प्रदान का चलन है। हुआ भी। दोस्ती की शुरुआत हुई।
साकेत और मान्या के साथ फ़ोटो खिंचवाने वालों में निरुपमा दीदी और सुमन
भी शामिल हो गईं। पीछे मंदिर परिसर जहाँ ग़ैर बाली लोगों का प्रवेश वर्जित है।


मान्या ने बताया कि तुर्की यात्रा के दौरान भी उन्होंने कई मित्र बनाए थे। मुंबई आने पर लंच का निमंत्रण भी दिया मान्या ने।
खूब घूमने फिरने का मन है मान्या-साकेत का। आगे चलकर वे भी अनन्य की तरह अपना काम करना चाहते हैं।
मान्या और साकेत को उनके सुखी जीवन के लिए मंगलकामनाएँ।
अनन्य के लिखे और अब 'निकल बेवजह' के थीम सांग में घूमने वालों के लिए आह्वान है (लिंक यह रहा ) :
'जा किसी अनजान शहर में एक नया दोस्त बना।'
बाली यात्रा के दौरान हमने कई नए दोस्त बनाए। मान्या और साकेत उनमें से एक हैं।

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Friday, September 18, 2026

हमारा बाली का पहला दिन

Hotal Tijili बाली। हमारा पहले दिन का  ठिकाना।

 हवाई अड्डे से होटल की तरफ़ आते हुए सड़क के नज़ारे देखते हुए आए। सड़कें बहुत अधिक चौड़ी नहीं। बाइक पर चालक और सवारी दोनों हेलमेट लगाए हुए। बहुत इमारतें बहुत ऊँची नहीं। जगह-जगह हिंदू धर्म के पौराणिक आख्यान की मूर्तियां दिखीं। शहर कुछ-कुछ गोवा जैसा लगा।

एक जगह सड़क किनारे तार पर विजिटिंग कार्ड जैसा लटका दिखा। विवरण पढ़ने पर पता चला कि यह एक इंटरनेट प्रोजेक्ट है। यह 'MyRepublic' इंटरनेट प्रदाता द्वारा चलाया जा रहा एक फाइबर-टू-द-होम (FTTH) प्रोजेक्ट है)।
इंटरनेट केबल के नेटवर्क प्रोजेक्ट का परिचय पत्र किसी बड़े होर्डिंग की जगह इंटरनेट केबल पर ही लटका है। रोचक अंदाज़।
होटल में छठी मंजिल पर कमरा मिला। दो स्विमिंग पूल हैं होटल में। एक छठी मंजिल पर, दूसरा पहली मंजिल पर। दोनों का मुआयना करके तय किया छठी मंजिल पर स्विमिंग करेंगे। बाली आकर दो सौ रुपए प्रति दिन के हिसाब बचाएंगे।
Hotal तिजिली की लॉबी।


पूल देखकर आए तो होटल में हमारे साथी बाहर खड़े थे। उनकी समस्या यह कि वे कमरे के बाहर निकल आए और कमरे का दरवाजा बंद हो गया। चाबी मेरे पास थी। हमको नेपाल का किस्सा याद आ गया। वहाँ हम कमरे के बाहर निकल आए थे। चाबी अंदर रह गई थी। मास्टर की से खुलवाना पड़ा था कमरा।
तय हुआ कि कमरे की डुप्लीकेट चाबी भी ली जाए। होटल वाले ने चाबी तो दे दी लेकिन सिक्योरिटी के 50000/- IDR जमा करवा लिए। हमने एक लाख इंडोनेशिया के रुपये दिए। उसके पास वापस देने के फुटकर पैसे नहीं थे। उसने एक लाख रुपए जमा करवा लिए। ( करीब 539 रुपये)।
मुद्रा विनिमय में भारतीय रुपए का कोई जिक्र नहीं।

कमरे में पहुँचने पर यह भी पता चला कि हमारे चार्जर यहाँ चलते नहीं। दो चार्जर चाहिए थे। एक तो लाबी में टहलते बालक ने मुफ्त में दे दिया। दूसरे के लिए बताया कि होटल लॉबी में मिलेगा। लॉबी में जाने पर चार्जर मिला तो लेकिन उसके भी पचास हज़ार IDR जमा करने की कहा गया। हमारे पहले से जमा थे इतने रुपये। हम नोट कराकर चले आए।
जिस चार्जर को लाबी में काम करने वाले बच्चे ने मुफ्त ने दे दिया उसी के लिए लॉबी वाले लोगों ने पचास हज़ार रुपए धरा लिए। इसीलिए कहा जाता है कि नीचे के स्तर पर जुगाड़ करके काम निकाल लेना हमेशा बेहतर होता है। मामला जितना ऊपर जाता है , उतना बिगड़ता है।
इंडोनेशियाई स्टोर

शाम को खाना खाने निकले। होटल के पास ही , क्वींस ऑफ़ इंडिया , एक भारतीय रेस्टोरेंट में खाना खाया। इस होटल का उद्घाटन 2011 में इंडोनेशिया ने भारत के राजदूत ने किया था।
होटल में काम करने वाले स्टाफ नए-नए दिखे। वेटर से पूछने पर पता चला कि हर तीन-चार साल में मैनेजमेंट स्टाफ बदल देता है। हिंदी बहुत कम जानते हैं लोग। केवल ‘ अच्छा, अच्छा’ बोल पाते हैं।
क्वींस ऑफ़ इंडिया रेस्टोरेंट का उद्धाटन 2011 में
इंडोनेशिया में भारतीय राजदूत ने किया था।

रास्ते में कई करेंसी बदलने की दुकानें दिखीं। कई देशों की करेंसी बदलने के रेट लिखे थे। भारतीय रुपए का जिक्र बहुत कम दिखा। यह तब है जबकि एक भारतीय रुपया 186 इंडोनेशियाई रुपए के बराबर है। हमने सोचा -‘ ग़ज़ब बेइज्जती है भारतीय रुपये की। मुद्रा में रूप ने इसका जिक्र ही नहीं।’
एक इंडोनेशियाई स्टोर ओर इंडो मार्ट लिखा था। लगा यह भारतीय स्टोर है। लेकिन लगने और होने में अंतर होता है।
क्वीन्स इंडिया होटल के गेट पर भारत से आए लोग।


होटल का खाना लजीज था। इंडीनेशिया में आकर भी लोग पनीर, दाल मखानी, तंदूरी और गाजर का हलवा खा रहे हैं। पकौड़े के साथ चाय भी पी लोगों ने। इंडोनेशिया का खाना किसी ने पूछा तक नही।

खाने की मेज़ पर खाने का इंतज़ार

होटल समुद्र के एकदम बगल में है। समुद्र की लहरें उठ- गिरकर अपना राग गा रही हैं। रात भर उनका आर्केस्ट्रा चलता रहेगा।
बाली की सड़क का नजारा


आज का यह हमारा बाली का पहला दिन था।
आर्ट स्टोर पर पानी ख़रीदने के बाद लोग पानीदार हो गए।


आर्ट गैलरी में मॉडल मैनिक्विन



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भाषा के खेल मजेदार होते हैं

 

चंपा के फूलों की माला पहना कर एयरपोर्ट पर स्वागत हुआ

भाषा के खेल मजेदार होते हैं।

बाली एयरपोर्ट से इमिग्रेशन की तरफ़ जाते हुए कई दरवाज़ों पर नेमप्लेट जैसी लगी दिखी। उनमें लिखा था - ‘ PINTU DHARURAT’ पहला बोर्ड देखकर लगा कि किन्हीं PINTU DHARURAT का ऑफ़िस है। इसके बाद कई दरवाज़ों पर यही लिखा देखा तो लगा यहाँ एक जैसे नाम के अधिकारी होंगे। लेकिन फिर बग़ल में लिखा देखा -Emergency Exit तो समझ में आया कि जिसको हम पिंटू समझ रहें थे वह निकास है। PINTU DHARURAT मतलब आपात निकास द्वार है।

PINTU DHARURAT मतलब आपात निकास द्वार


पिंटू धुरन्त भले न हों लेकिन आपात स्थति जगह-जगह हो सकती है। यह भी लगा कि कहीं भी आपात स्थित के पीछे वहाँ के पिंटूओं- चिंटूओं का हाथ होता है। साज़िश होती है।
इम्मीग्रेशन काउंटर पर भीड़ है। लोग जिग-जैग लाइनों में लगे आगे बढ़ते जा रहे हैं। इन लाइनों को देखकर नोटबंदी में बैंको के बाहर लगी लाइनें याद आईं। इन लाइनों में लगे हुए न जाने कितने लोग शांत हो गए। नोटबंदी को बड़ी बहादुरी का कदम बताकर लागू करने वाले अब इसका जिक्र तक नहीं करते।
Feel the harmony at Bali


लाइन में एक महिला 82 वर्ष की हैं। शायद केरल से हैं। घूमने के लिए। इस उम्र में आम तौर पर निकलना बंद कर देते हैं।
हमारा सामान बेल्ट नम्बर 2 पर आया। बेल्ट पर लिखा है - Feel the hormony (सद्भाव) Bali . न भी लिखा होता तो हम इसे महसूस करते क्योंकि यहाँ ट्राली मुफ्त है। अमेरिका की तरह नहीं कि एक ट्राली के छह डॉलर धरा ले।
बाली का इमोग्रेशन काउंटर।


होटल पर स्थानीय ड्राइवर आया है लेने। उसने सबको चंपा के फूलों की माला पहना कर बाली में हमारा स्वागत किया। सभी टूरिस्ट का स्वागत यहाँ माला पहना कर करते हैं।
घटोत्कच चौराहे पर घटोत्कच की मूर्ति


छूटके से घरेलू टाइप के एयरपोर्ट से बाहर निकले। बस में सामान रखा और होटल की तरफ़ चल दिए। एयरपोर्ट से होटल एक घंटे की दूरी पर है।
एयरपोर्ट से निकलते ही पौराणिक कथाओं की झलक वाली मूर्तियां दिखती हैं। पहला चौराहा घटोत्कच चौराहा है।

बाली में स्वागत है

पहुँच गए बाली 

 मलेशिया से बाली तीन घंटे की दूरी पर है। जहाँ उड़ते ही एयरहोस्टेस ने कानाफूसी वाले अंदाज़ में नाश्ते के लिए पूछा। हमने बताया शाकाहारी। उसने नाश्ते की ट्रे थमा दी। कॉफ़ी के कप से कॉफ़ी छलक गई। हमने सोचा बाद ने फिर ले लेंगे। आराम से नाश्ता करते रहे ।

नाश्ते के बाद चाय-कॉफ़ी माँगी। लेकिन में मिली नहीं। ख़त्म हो गई थी।
विमान परिचारिका महिलाएँ साड़ी पहने थीं। कुछ कुछ लुंगी वाले अंदाज़ में।
जहाज उड़ते ही नेट कनेक्शन आ गया। भड़भड़ाकर नोटिफ़िकेशन आने लगे। ज्यादातर यात्रा की शुभकामना संदेश। हमने नेट का उपयोग करके पोस्ट लिख मारी। कुछ के जबाब भी।
जहाज हवा में तैर रहा है। चल रहा है। हवा के बहुत बड़े पूल में सीधे फ्री स्टाइल में बढ़ता चला जा रहा है। हमको पानी में तैरना सीखने में कई महीने लगे। जहाज पहले दिन से ही हवा में तैरने लगा होगा। इंसान और मशीन में यही फ़र्क़ होता है।
आगे की सीट की एक महिला यात्री पीछे आईं। बोली -‘ हमारा सेल गिर गया है। उठा दीजिए।’ हमें लगा बैटरी का सेल। लेकिन पता चला कि उनका मोबाइल नीचे गिरा था। हमने पाँव से उसकी अपनी तरफ़ खींचा। झुककर उठाया। इनको दे दिया। उन्होंने धन्यवाद फेंका और अपनी सीट पर बैठ गई।
हवाई जहाज के उतरने का समय हो गया। नीचे बाली का समुद्र दिख रहा है। समुद्र तट 🏖️ पर बने मकान सीप, घोंघे, मोती जैसे छोटे-छोटे दिख रहे हैं।
जहाज लाहे-लहर चल रहा है। हवा में ठहरा सा हुआ। तेजी से चढ़ा भले हो लेकिन उतर आराम से रहा है। किसी राजनीतिक पार्टी की तरह तेजी से नहीं पतित हो रहा। इंसान और मशीन का फ़र्क़ है यह।
लोग उचक-उचक कर खिड़की से नीचे देख रहे हैं। नीचे समुद्र का पानी चमकती जालीदार चादर की तरह लग रहा है। पानी लहरों के रूप में हिल-डुल कर जहाज का स्वागत जैसा कर रहा है। जहाज भी आहिस्ते-आहिस्ते उतर रहा है।
हम बाली में उतर रहे हैं। उतर चुके हैं। इंटरनेट , जो थोड़ी देर को बंद हुआ था, फिर चालू हो गया है।
परिचारिका हमारा स्वागत करते हुए कह रही है - ‘लेडीज एंज जेंटलमेन, बॉयज़ एंड गर्ल्स, आपका बाली में स्वागत है।’ मलेशिया एयरलाइन्स पूरी पारिवारिक है।

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‘ लेखक, आलोचक और गोलगप्पे वाला’- अरविंद तिवारी जी का 14 वाँ व्यंग्य संग्रह

 

अरविंद तिवारी जी का 14 वाँ व्यंग्य संग्रह

जमीन से 11887 मीटर की ऊँचाई ‘ लेखक, आलोचक और गोलगप्पे वाला’। अरविंद तिवारी जी का यह नया व्यंग्य संग्रह मलेशिया एयरलाइंस के जहाज से ya 879 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से यात्रा कर रहा है। बाहर का तापमान शून्य से 53 डिग्री नीचे है। Arvind Tiwari

अधिकतर लेखकों की किताबें आजकल बिना रॉयल्टी की छपती हैं। अरविंद तिवारी जी हालांकि हाल में ही नेशनल बुक ट्रस्ट से तगड़ी रॉयल्टी पाये हैं। लाखों में। आगरा एक्सप्रेसवे से कार से आते हुए सोचा था कि गाड़ी घुमा लें शिकोहाबाद की तरफ़। रॉयल्टी की मिठाई खाते चलें। लेकिन रात हो रही थी इसलिए सीधे नोयडा की तरफ़ बढ़ लिए।
बाली यात्रा के दौरान साथ ने केवल दो किताबें लाए हैं। उनमें से एक अरविंद तिवारी जी का यह व्यंग्य संग्रह भी है। पेन भी साथ में लाए हैं ताकि पढ़ते हुए पंच पर निशान लगा सकें। संग्रह के पहले व्यंग्य लेख गड्ढों का विद्रोह के कुछ पंच:
* गड्ढों और सड़क का रिश्ता आग और धुँए के रिश्ते की तरह होता है। जहाँ गड्ढा होगा , वहाँ सड़क का अस्तित्व है। जहाँ गड्डा नहीं है , वहाँ सड़क नहीं हो सकती।
* जैसे प्रेमी प्रेमिका एक दूसरे में पूरक होते हैं, उसी तरह गड्डे और सड़क एक दूसरे में पूरक होते हैं।
* गड्डे और सड़क का मिलन शाश्वत मिलन है। दोनों का एक दूसरे को स्पर्श करना ही दिव्य स्पर्श कहलाता है।
* सड़क की नियति है बह जाना। उसे बहते हुए ये गड्डे बड़ी लाचारी से देखते रहते हैं। कर कुछ नहीं पाते।
* बिना गड्ढों के सड़क की कल्पना करना बेमानी है।
इतनी ऊँचाई और इतना तेज गति से चलते हुए कम ही किताबें पढ़ी जाती हैं। इससे साबित होता है कि अरविंद तिवारी जी किताबें ऊँचे लेखक हैं।
अरविंद तिवारी जी को उनके 14 वें व्यंग्य संग्रह की बधाई।

दिल्ली से बाली की ओर

सीमा (श्रीमती राजेश अग्रवाल) Suman के साथ।
वियतनाम ट्रिप में भी साथ थीं दोनों।
मलेशिया हवाई अड्डे पर अनूप शुक्ल , राम सागर , सुमन ,
निरूपमा दीदी और ट्रिप लीडर ऐश्वर्या।

बाली में हमारे ग्रुप की ट्रिप लीडर ऐश्वर्या तीस से अधिक देश घूम चुकी हैं। उसका बोर्डिंग पास चेक करते हुए एयरपोर्ट की महिला सुरक्षा कर्मचारी ने मुस्कुराते हुए कहा -‘ ऐश्वर्या रॉय।’

महिला सुरक्षा कर्मचारी ने ही हमारी भी टिकट देखी। हमको अपना नाम पढ़ते देखकर उसने ख़ुद नाम बताया -‘ Hadisha B ‘ हमने


उसके नाम का मतलब पूछा। उसने -‘ आई डोंट नो।’ कहते हुए मुस्कुराते हुए हमको आगे बढ़ा दिया।

मलेशिया मुस्लिम बहुत देश है। करीब 65% आबादी मुस्लिम है। हिंदू करीब 6-7% हैं। यहाँ भी हिंदू मुस्लिम तनाव की ख़बरें आती हैं। तनाव का कारण अवैध धार्मिक स्थलों और मंदिरों का विवाद , सोशल मीडिया में भड़काऊ पोस्ट्स और धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति है। इस राजनीति के बावजूद दोनों समुदायों में दंगा जैसी खबरें नहीं आती।
मुस्लिम बहुत आबादी और उनकी भाषा के शब्दों का ही प्रभाव होगा कि उर्दू-फ़ारसी के शब्द मलेशिया ने काफ़ी दिखे। Final कॉल के लिए P Akhir (पी आख़िर) लिखा मिला। Toilet के लिए संडास की तर्ज़ पर Tandas देखा ही।
एक अध्यापक हमेशा अध्यापक रहता है।
निरुपमा दीदी ट्रिप लीडर ऐश्वर्या को कुछ समझाते हुए।


बाली के लिए फ़्लाइट का इंतज़ार करते हुए साथ के लोगों से बतकही होती रही। हमारे साथ हमारे आयुध निर्माणी के साथी राजेश अग्रवाल भी हैं। हम लोगों ने एक ही दिन सर्विस ज्वाइन की थी ( 30 मार्च, 1988)। ज्वाइन करने के दिन से हुआ साथ आज तक बना हुआ है।
फ्लाइट का इंतजार करते हुए बातचीत के दौरान अध्यापिका रहीं निरुपमा दीदी ट्रिप लीडर ऐश्वर्या को कुछ समझाते हुई दिखीं।
उनके अंदाज़-ए- गुफ्तगू देखकर लगा कि एक अध्यापक हमेशा अध्यापक ही रहता है।
क्वालालम्पुर हवाई अड्डे पर बोर्डिंग का इंतजार करते हुए यात्री।


अब फ़्लाइट में बैठ गए हैं। फ़्लाइट का चलने का समय सबेरे नौ बजे था। इस समय साढ़े नौ बजने वाले हैं। जहाज रन वे पर घुँघुवाता हुआ खड़ा अपने लिए उड़ने के संकेत का इंतज़ार कर रहा है। फ्लाइट में सवार यात्री , जिनमें से अधिकतर दिल्ली से आए हैं। देर रात चली फ्लाइट में नींद पूरी नहीं हुई होगी। मौक़ा मिलते ही आँख मूंदकर नींद लेने लगे। लोगों के ऊँघने और खर्राटे 💤 लेते हुए दिखाई, सुनाई दे रहे हैं।
Final call के लिए मलेशिया में लिखा है P Akhir
फ्लाइट 🛫 के टेक ऑफ करने का इन्तजार करते हुए यात्री।

अब जहाज हिला-डुला है। चलने भी लगा। उड़ने ही वाला है अब।

लगता है बाली पहुँचकर ही मानेगा।

मलेशिया हवाई अड्डे पर


दिल्ली  हवाई अड्डे पर 

मलेशिया हवाई अड्डे पर 

मलेशिया एयरलाइन्स स्वागत कर रही है


Toilet मतलब Tandas . Sandas का पड़ोसी शब्द




चाय कॉफी का अड्डा

कॉफ़ी कैपिचिनो।


आज सुबह मलेशिया की राजधानी क्वालालम्पुर में हुई। साढ़े सात बजे हैं यहाँ। भारत में इस समय सबेरे के पाँच बजने वाले हैं। मतलब पलट कर एक और नींद लेने का समय।
बाली के लिए फ़्लाइट सवा नौ बजे है। फ़्लाइट का इंतज़ार करते कॉफ़ी पीने रुके हैं। 17 RM की एक कैपिचिनो कॉफ़ी। गर्म वाली। रुपए में कहें तो चार सौ। आर्डर के लिए लाइन लगी है। मलेशिया में अमेरिका शुरू हो गया।
शौचालय के लिए Tandas लिखा है यहाँ। संडास से मिलता-जुलता नाम। Ajit V Wadnerkar और सुरेश पंत जी चर्चा करें। बतायें इनकी रिश्तेदारी। Suresh Pant
कॉफ़ी आ गई है। टेबल पर। पीते हैं। आप सुबह की चाय पियें। मज़ा लें।