Monday, June 01, 2026

तैराकी सीखने का तीसरा दिन


 आज सुबह तैराकी सीखने के निकलने में थोड़ी देर हो गई। नतीजा स्वीमिंग पूल में 8.05 पर पहुंचे।
रास्ते में लाल पैथालॉजी में काम करने वाली बच्ची घर से लैब की तरफ़ जाती दिखी। दिखी कल भी थी। कहीं सैंपल लेने जा रही थी। हमारे यहाँ से भी एक बार सैंपल ले जा चुकी है। उसको देखकर हमने हाथ हिलाया लेकिन उसने देखा नहीं। कान में ईयर प्लग लगाए किसी से बात करती या शायद मोबाइल देखती चली जा रही थी।
ईयर प्लग लगाकर चलते हुए या सामने खड़े होकर बात करते इंसान को देखकर लगता है कि शायद वह आपसे कुछ कह रहा है। लेकिन आप जब ध्यान देते हैं तो पता चलता है कि वह किसी और से मुखातिब है।
स्वीमिंग पूल पहुंचकर नाम लिखवाया। अटेंडेंस लेने वाली बालिका ने कहा -'आपने अभी तक फार्म नहीं जमा किया।'
हमने कहा -'कल जमाकर देंगे।'
उसने कहा -'कल नहीं परसों जमा कर दीजिएगा। मंगलवार को स्वीमिंग पूल बंद रहता है।'
नाम लिखते हुए आज उनसें अनूप ही लिखा -अनूपा नहीं लिखा। आज जेंडर चेंज नहीं करवाना पड़ा।
स्वीमिंग पूल में जाकर बताया -'बबलिंग, फ्लोटिंग सीख ली। आज क्या करना है?'
'आप हाथ चलाने का अभ्यास करिए। बाहर आ जाइये सीख लीजिए।' -कोच ने कहा। उसने सहायक कोच से कहा -'सर को हाथ चलाना सिखा दो।'
सहायक कोच ने सिखाया। हमने उससे कहा -'हमारा हाथ डिसलोकेट हो जाता है। इसलिए पूरा हाथ घुमाने वाली एक्सरसाइज करना मुश्किल होगा।'
अभी तक तैराकी न करने, सीखने का बड़ा कारण हमारे कंधे का अचानक उखड़ जाना भी रहा। कभी भी कंधे का जोड़ कंधे से समर्थन वापस ले लेता। हाथ लटक जाता। एक बार बच्चे को हल्के से चपतियाने के लिए हाथ आगे बढ़ाते ही कंधा उखड़ गया। नतीजतन बच्चों को फिर कभी चपतियाया नहीं। बच्चे समझते रहे -'पापा अच्छे हैं, कभी कोई सजा नहीं देते।'
एक बार गुलमर्ग में ट्रक से उतरते समय कंधा उखड़ गया था। रात में। बहुत परेशान हुए। फिर देर तक कोशिश करने में अपने आप जुड़ भी गया।
कोच ने हमको आधा हाथ घुमाकर पानी काटने वाली एक्सरसाइज बतायी। अभ्यास कराया। बताया -'पहले नमस्ते मुद्रा में हाथ रखिए। हाथ आगे लाइए। घुमाइए। दोनों बाहें दूर करिए। घुमाकर फिर पास लाइए। फिर नमस्ते मुद्रा तक पहुँचिये।'
हमने दो-तीन बार उसके सामने अभ्यास किया। फिर पानी में उतर गए। पानी में खड़े होकर काफ़ी देर पानी काटते हुए अभ्यास करते रहे। बबलिंग और फ्लोटिंग भी की। साथ के लोग तैरते हुए बगल से गुजर रहे थे। कोई नीचे से भी। किसी की टांगे भी लगीं। हमारी टांगे भी किसी को लगीं। सॉरी, सॉरी, इट्स ओके, कोई बात नहीं की आवाजें स्वीमिंग पूल में गूंजती सुनाई दीं।
हमने बताया कि सीख लिया तो कोच ने कहा -'पानी काटने का अभ्यास करते हुए पूल में चलने की प्रैक्टिस कीजिए।' हमने कई बार पूल की चौड़ाई चलते हुए तय की। अगल-बगल, दायें-बायें बच्चे, बुजुर्ग, बच्चियाँ, जवान और महिलायें अलग-अलग तरह के अभ्यास कर रहे थे। पूरा स्वीमिंग पूल लोगों से भरा-पूरा था।
कोच लोग आराम-आराम से इधर-उधर टहलते हुए आपस में बतियाते चाय पाते स्वीमिंग पूल के आसपास टहल रहे थे। एक कोच सेठ की तरह गद्दी पर बैठा था। कोई कुछ पूछता तो दाएँ-बायें कुछ-कुछ बता देते। एकदम किसी सरकारी दफ्तर सरीखा माहौल लग रहा था। बातचीत करते हुए स्वीमिंग सिखाने वाली बालिका के यहाँ भंडारे पर जाने की बात हो रही थी।
अभ्यास करते हुए घंटा हो गया। सीटी बज गई। पूल से बाहर निकलने का आदेश हो गया। हम पाँच मिनट देरी से आए थे, पाँच मिनट देर तक रहकर पूल से निकले।
रास्ते में दिहाड़ी मजदूर अपने ग्राहकों का इंतजार करते खड़े दिखे। एक चाय वाला वहाँ खड़ा नीबू की चाय बेच रहा था। हम बिना चाय पिए घर की तरफ़ बढ़ गए यह सोचते हुए कि घर में दूध की चाय पियेंगे।
आगे एक जगह से फल ख़रीदे। फल वाले ने मुँह में पान मसाला भरकर फल तौले। हमने आदतन उसको मसाला खाने के नुकसान बताये। उसने मेरे उकसावे पर वहीं खड़े-खड़े पान मसाला खाना छोड़ने की प्रतिज्ञा कर ली। यह भी कहा -' अगली बार आयेंगे तो मसाला खाते हुए नहीं देखेंगे।' हमने कहा -' हम अभी लौटकर आते हैं।' उसने कहा -' अभी तो खा लिए। अगली बार पक्का नहीं खाते मिलेंगे।'
'अगली बार जब आएँगे तब देखा जाएगा।' कहते हुए हम गाड़ी स्टार्ट करके घर आ गए।
यह हमारा स्वीमिंग सीखने का तीसरा दिन था।
गुलमर्ग में कंधा उखड़ने और जुड़ने का क़िस्सा यहाँ पढ़ सकते हैं ।

यह हमारा स्वीमिंग सीखने का तीसरा दिन था।