कल नोयडा आना हुआ। Anany की सोसाइटी में स्विमिंग पूल है। शाम को तैरने गए। अनन्य पूल के मेंबर हैं। टोपी-चश्मा लेकर रखा है। लेकिन तैरने नहीं जा पाते। वैसे उसको अच्छे से आती है तैराकी। स्विमिंग के लिए समय नहीं मिलता। क्रिकेट की बात अलग। उसके लिए कहीं से भी समय का जुगाड़ हो ही जाता है।
गेस्ट की हैसियत से गए तैरने शाम को। एक बार के चार्ज 200/- रुपए। गार्ड लालू प्रसाद बांदा के हैं। पैसे भुगतान करके उनको मोबाइल दिखाया। उतर गये पानी में।
पूल तीन फीट से लेकर छह फीट तक गहरा है। अपन देर तक पाँच फीट वाले इलाके में ही तैरते रहे। दो महिलाएँ , जिनकी ऊँचाई हमसे कम ही रही होगी, आराम से छह फीट वाले इलाक़े में तैरती रहीं। हम डरते रहे। लेकिन बाद में हिम्मत करके टटोलते हुए रेलिंग के सहारे छह फीट की गहराई तक गए। वहाँ से तैरते हुए कम गहराई तक आ गए। लेकिन तैरकर उधर जाने का मन नहीं बना। हिम्मत नहीं हुई।
घंटे भर बाद पानी तेज बरसने लगा। अपन लौट आए।
आज सुबह सात बजे फिर गए। पूल में हम अकेले थे। तैरते रहे। कोच मनीष और पूल मैनेजर अमन मोबाइल खेलते रहे। कई बार इधर-उधर तैरते हुए हिम्मत करके छह फीट गहरे पानी में गए। किनारे रेलिंग पकड़कर देर तक लटके रहे। रेलिंग पर लटके हुए सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का कविता संग्रह याद आया -“खूँटियों पर टंगे लोग।”
क़रीब दो घंटा तैरते रहे। इस बीच दो लोग आए। किनारे से किनारे तक तैरकर चले गए। अपन भी लगातार तैरते रहे। एक बार में करीब पचीस मीटर तक भी तैर गए।
लौटे समय पूल के बीच से किनारे तक गए। चार फीट की गहराई से छह फीट की गहराई तक। किनारे पहुंचकर रेलिंग पकड़ी। दीवार को धक्का देकर वापस पानी में। तैरकर पूल के दूसरे किनारे पहुंच गए।
तैराकी का आज का रिकार्ड रहा :
समय : दो घंटा पाँच मिनट दो सेकेंड
किलोकैलोरी: 487 एक्टिव/636 टोटल
दूरी : 860 मीटर
धड़कन : 88 प्रति मिनट
आज की तैराकी से लगा कि तैराकी का पहला ड्राफ्ट फाइनल हो गया। अब सुधार बाकी है। इसी बहाने रील बनाना भी आ गया थोड़ा-थोड़ा।
मेरी समझ में 62 साल की उम्र में तैराकी सीखना इस साल की उपलब्धि है।
आप भी कुछ न कुछ सीखिये। मजा आयेगा। अच्छा लगेगा।
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