पुस्तक प्रकाशन की पार्टी की पार्टी में कौन सा अलंकार है पूछेंगे तो कई मित्र कहँगे, ये क्या मज़ाक़ है? ये तो किसी अनपढ़ को भी पता है कि इसमें अनुप्रास अलंकार है। स्कूल के दिन होते तो लिखते, 'प वर्ण की आवृति होने के कारण इसमें अनुप्रास अलंकार की छटा दर्शनीय है।'
लेकिन छोड़िए स्कूल के दिनों को और अनुप्रास अलंकार को। वैसे भी वे सब स्कूल अब बंद हो रहे हैं जिनमें हमने शुरुआती पढ़ाई की।
बात पुस्तक प्रकाशन की।
पिछले हफ़्ते हमने अपनी नई किताब 'बेवकूफ़ी का सफ़र' प्रकाशित की। ई बुक, प्रिंट आन डिमांड (जिसमें आर्डर करके किताब प्रिंट फार्म में मंगाई जा सकती है) और किंडल फ़ार्मेट में।
अभी तक अधिकतर मित्रों ने ई बुक फ़ार्मेट में किताब ख़रीदी है। प्रिंट फ़ार्मेट में कुल तीन किताबें बिकी हैं अभी तक।
इसके पीछे ई बुक किताब सस्ती होना कारण है या लोगों में ई बुक की बढ़ती लोकप्रियता?
आपको कौन सा फ़ार्मेट पसंद है?
प्रिंट फ़ार्मेट का लिंक एक मित्र को बताया तो उनका कहना था कि किताब लेते आना। हम भुगतान कर देंगे। मतलब किताब बेचने का काम शुरू किया जाए।
अभी तक इतनी किताबें (कुल 23) बिक चुकी हैं क़रीब पाँच सौ रुपए रायल्टी के जमा हो चुके हैं।
मन कर रहा है दोस्तों को एक पार्टी दे दी जाए।
अगर चाय पार्टी करते हैं तो कितने मित्र आएँगे चाय पीने। चाय के बहाने किताब पर भी चर्चा हो जाएगी।
'बेवकूफ़ी का सफ़र' के बाद पुलिया सीरिज़ की दूसरी किताब पर भी काम शुरू हो चुका है। जल्द ही उसकी सूचना जारी होगी।
फ़िलहाल तो 'बेवकूफ़ी का सफ़र' ख़रीदने के सभी लिंक टिप्पणी बाक्स दे रहे हैं।
और हाँ, पार्टी वाली बात मज़ाक़ नहीं है। चाय पिलाएँगे मित्रों को जो किताब पढ़ चुके हैं। आपने पढ़ी क्या?
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