पाँच दिन पहले समीर लाल जी (Udan Tashtari) और देबाशीश (Debashish Chakrabarty) की बातचीत की कड़ी मिली थी। दोनों अपन के ब्लागिंग के शुरुआती दिनों के साथी हैं। देबाशीश से 20 साल और समीरलाल जी 18 साल से ब्लागिंग का साथ रहा। देबाशीश ने ब्लागिंग के शुरुआती दिनों में तमाम परियोजनाएँ शुरू की और हिंदी ब्लागिंग को जमाने का काम किया। निरंतर आनलाइन पत्रिका कई स्मरणीय अंक निकाले। पाडभारती से प्रसारण का काम किया। जो भी काम किया,पूरे मन से, पूरे जुनून से काम किया।
समीरलाल जी का आना धमाके की तरह रहा। आए और छा गए। समीर लाल ब्लॉगिंग के सबसे लोकप्रिय ब्लॉगर रहे हैं। अब नेटवर्किंग, मेंटरिंग में नाम कमा रहे हैं। किताबें बेस्टसेलर हो रही हैं। कनाडा की राजनीति में आगे बढ़ रहे हैं। यह सब देखना सुखद है। बहुत अच्छा लगा इस बातचीत को सुनकर।
देबाशीष इसे जारी रखें। बातचीत का शीर्षक है - नेटवर्किंग आपके करियर की लाइफ़ लाइन है। समीर भाई को उनकी किताब और तमाम उपलब्धियों की बधाई। शुभकामनाएँ ।
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