Friday, December 06, 2024

बेवकूफ़ी का सफ़र

 


पिछले महीने एक पोस्ट में अपनी किताबों को छपाने की योजना के बारे में लिखा था। उनमें से एक ट्रेन और हवाई यात्राओं के संस्मरण के बारे में थी। पिछले महीने आलस्य और आराम के गठबंधन में काम करते यह किताब तैयार हो गई। कल ई बुक के रूप में प्रकाशित भी हो गयी। ई बुक का लिंक टिप्पणी में दिया है। इस पर क्लिक करके आप किताब अपने मोबाइल या कम्प्यूटर पर डाउन लोड करके पढ़ सकते हैं। अभी pothi प्रकाशन से प्रकाशित हुई है ई बुक। जल्द ही किंडल और दूसरे प्लेटफ़ार्म पर भी प्रकाशित होगी।

किताब का नामकरण वरिष्ठ व्यंग्यकार Alok Puranik जी ने किया है। वे हमारी किताबों के नाम पुरोहित हैं। इस नामकरण के पीछे उनकी हमारी बेवक़ूफ़ियों पर भरोसे
की भावना दिखाई देती है। आशा है उनके इस विश्वास की रक्षा होती रहेगी।
किताब का कवर पेज हमारे शाहजहाँपुर के साथी Saif Aslam Khan ने डिज़ाइन किया है। सैफ़ बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। बचपन से कार्टून और स्केच बनाते रहे हैं। आजकल सैफ़डूडल के नाम से डूडलिंग करते हैं। उनके काम को गूगल ने भी सराहा है। शाहजहाँपुर में कैंट की बेंच नम्बर सात पर ज़बरियन क़ब्ज़ा करके उस पर देश-विदेश के तमाम नामचीन लोगों के स्केच बनाए हैं।
किताब वाहन निर्माणी जबलपुर में हमारे वरिष्ठ महाप्रबंधक रहे टीटीएस कृपा वेंकटेशन जी को समर्पित है। कृपा सर के साथ काम करना एक बहुत ख़ुशनुमा अनुभव रहा। बावजूद बहुत वरिष्ठ होने के उनका दोस्ताना व्यवहार और असहमति को बेझिझक प्रकट करने की जैसी लोकतांत्रिक उनके साथ रही वैसी नौकरशाही में दुर्लभ है।
किताब का प्रकाशन अपन ने स्व प्रकाशन योजना के तहत किया है। पहली किताब 'पुलिया पर दुनिया' भी हमने लगभग दस साल पहले स्व प्रकाशन योजना के तहत ही किया था। इसके बाद छह किताबें विभिन्न प्रकाशनों से आईं। यह आठवीं किताब फिर से स्व प्रकाशन योजना से आ रही है।
अभी यह किताब ईबुक फ़ार्मेट में है। जल्द ही यह किताब प्रिंट फ़ार्मेट में भी आएगी। किताब प्रकाशन के लिए जमा की है। अप्रूवल होने पर उसका लिंक साझा करेंगे।
ई बुक किताब की क़ीमत 40 रुपए रखी है। मेरे ख़याल में ज़्यादा नहीं है। किताब के बारे में कोई भी सुझाव देंगे तो अपन आभारी रहेंगे।
यह किताब, अब तक आई किताबें और आने वाली कोई भी किताब बिना मेरे पाठकों के सहयोग और समर्थन के सम्भव नहीं थी। आपकी टिप्पणियाँ मुझे सदैव लिखने के लिए उत्साहित करती रहीं हैं।
आपके सहयोग के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। आभार।


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