शनिवार को स्वीमिंग पूल सुबह बारिश के कारण बंद हो गया था। शाम को गए। जाते समय कार के डैशबोर्ड में दायीं तरफ़ बल्ब जैसा जला। हमें लगा कोई वार्निंग है। हमने दायें-बायें देखा। समझ में नहीं आया। एक दिन पहले घर से सामने तिराहे पर जली कार का ध्यान आया। हमें लगा हमारे साथ भी कोई हादसा न हो जाये। हम शीशा खोलकर गाड़ी चलाते हुए गए स्वीमिंग पूल तक। कार का एसी ऑन, शीशा खुला। बेवक़ूफ़ी के सौन्दर्य का मुजाहिरा।
स्वीमिंग पूल से लौटकर सोचा कार दिखवा लें। वार्निंग सिग्नल अभी भी था। अब डैशबोर्ड में एक तरफ़ लिखा हुआ भी आ रहा था -' बायें पहिए की हवा कम है।' हमें लगा शायद बल्ब जैसा जलना भी उसी कारण होगा। धीरे-धीरे कार चलाते हुए हवा की दुकान पर पहुँचे। हमने कहा -'हवा भर दो।'
हवा भरने के लिए टायर देखा गया तो पाया गया टायर में एक कील घुसी हुई है। इसी कारण हवा कम है। उसने बताया पंचर है। हमने कहा -'बना दो।'
कार पंचर बनाने के लिए सौंपकर हमने डैशबोर्ड का फोटो लिए। AI को दिखाकर पूछा -'इसका मतलब क्या है?'
AI ने फौरन बता दिया -'कार के पहिए में हवा कम है।'
हवा का इलाज पंचर बनाकर हो ही रहा था। हम इधर-उधर के नज़ारे देखने लगे। एक लड़की अपने भाई -बहनों को साथ लिए रील जैसा कुछ बनाती जा रही थी। उसको देखकर हमने भी सड़क पर आते-जाते लोगों की रिकार्डिंग शुरू की। इस बीच अमेरिका से Atul Arora का फ़ोन भी आया। उन्होंने बताया कि जल्दी ही वो हमको वीडियो एडिटिंग सिखायेंगे।
कई मजेदार सीन दिखे इस बीच। एक कुत्ता लंगड़ाता हुआ जाता दिखा। कई लोग हमको देखकर फुर्ती से निकले। पंचर वाले ने पूछा (बाद में) -'क्या आप वीडियो बनाते हैं?'
हमने कहा -'सीख रहे हैं।'
वीडियो बनाकर घर आ गए। सोचा कि एक और वीडियो बनाकर दोनों को जोड़कर एक वीडियो बनायेंगे। आज देखा तो यह काम किया गया। देखिए कुल क़रीब आठ मिनट की वीडियोबाज़ी। देखिए हमारे आसपास का नजारा। बताइए कैसा लगा ?

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