Monday, June 15, 2026

हमें कभी भी, किसी भी हाल में हार नहीं मानना चाहिए

स्वीमिंग पूल 

 कल डायना नायड की ऑटोबायोग्राफी (Find a way) पर आधारित फ़िल्म Nyad (नेटफ़्लिक्स पर) देखी। दो घंटे की इस फ़िल्म में डायना नायड द्वारा पाँचवे प्रयास में क्यूबा से फ्लोरिडा की 103 मील (165.76 किलोमीटर) दूरी तैरकर पार करने का विवरण है। इनमें पहला प्रयास डायना नायड 28 साल की उम्र में किया था। असफल रहीं। मैराथन तैराकी के कई रिकार्ड बनाने के बाद उन्होंने तैराकी छोड़ दी। 

60 साल की उम्र में, अपनी माँ की मृत्यु के बाद, उनको अपना बचपन का सपना फिर याद आया। उन्होंने फिर से तैराकी शुरू की। तीन बार फिर असफल रहीं। समुद्र में पायी जाने वाली भयंकर जहरीली जेली फिर के डंक से मरते-मरते बचीं। भयंकर समुद्री तूफ़ान में फँसकर मरते हुए बची। उनके साथियों ने मान लिया कि वे शायद इस उम्र में इस काम के लायक नहीं हैं। उनकी पक्की सहेली बोनी और  मुख्य नेविगेटर जॉन बार्टलेट ने उनके पाँचवे प्रयास में जुड़ने से मना कर दिया था (फ़िल्म के अनुसार)। लेकिन डायना नायड की जिद थी कि वे फिर प्रयास करेंगी। 

बोनी और जॉन बार्टलेट डायना की जिद के चलते उनसे फिर से जुड़े। डायना ने  103 मील की दूरी तैरकर पार की। क्यूबा से फ्लोरिडा की 103 मील की यह दूरी तय करने में डायना  को 110 मील 177 किलोमीटर तैरना पड़ा। यह दूरी उन्होंने करीब 53 घंटे में तय की। मतलब तैरने की गति लगभग 3.34 किलोमीटर प्रतिघंटा रही। 

फ्लोरिडा पहुँचने वहाँ जमा भीड़ को संबोधित करते हुए  डायना नायड ने तीन बाते कहीं :

1. हमें कभी भी, किसी भी हाल में हार नहीं मानना चाहिए (Never Ever Give up)

2. अपने सपनों को पूरा करने के लिए आपकी उम्र कभी भी ज़्यादा नहीं होती (You are never too old to chase your dream)

3. यह देखने में भले ही एक व्यक्ति का खेल लगता है, लेकिन असल में यह एक टीम वर्क है (It looks like a solitary sport, but it's a team) 

डायना नायड ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी कोच बोनी स्टोल और अपनी 35 लोगों की मेडिकल और नेविगेशन टीम को दिया, जिनके बिना यह मुमकिन नहीं था। 

डायना नायड के मुख्य नेविगेटर जॉन बार्टलेट इस अभियान के दौरान बीमार थे। इसके बावजूद वे इससे जुड़े। अभियान की इस ऐतिहासिक सफलता (2 सितंबर 2013) के कुछ ही महीनों बाद, 10 दिसंबर 2013 को 66 वर्ष की आयु में जॉन बार्टलेट का सोते समय अचानक निधन हो गया था।

अपने सपने पूरा करने की ज़िद, मेहनत, लगन और समर्पण के साथ टीम वर्क के कारण डायना नायड ने  अपना बचपन का सपना पूरा किया। उस समय उनकी उम्र 64 वर्ष थी। उनके पहले और बाद में भी अभी तक यह दूरी किसी ने तैरकर (बिना शार्क पिंजड़े के) किसी ने तय नहीं की है।

डायना नायड़ की कहानी बताती है -कोई काम नहीं है मुश्किल, जब किया इरादा पक्का।

आपका भी कोई सपना है जिसे आप पूरा करना चाहते हैं?  





No comments:

Post a Comment