Friday, June 12, 2026

तैराकी सीखने का बाहरवाँ दिन


कल रात सोते समय डायना नायड की आटोबायोग्राफी का यह अंश पढ़ा :

My (swim) suit is hanging on a hook next to the robe. The surreal feeling is coming on. i am ultra-aware of the milecules of oxygen traveling with each long sip of air to the bottom of the solar plexes , then the corban dioxide inching back up towards my lips.

मेरा (स्विम) सूट कपड़ों के बगल में हुक पर टंगा है। एक अजीब सा एहसास हो रहा है। मुझे हवा के हर लंबे घूंट के साथ ऑक्सीजन के मॉलिक्यूल्स के सोलर प्लेक्सस (पेट के ऊपरी हिस्से) तक जाने और फिर कार्बन डाइऑक्साइड के धीरे-धीरे वापस मेरे होंठों तक आने का पूरा एहसास हो रहा है।

यह मन:स्थिति डायना नायड की क्यूबा से फ्लोरिडा तैराकी के अभियान में तीसरी बार तैरने के लिए जाते समय की है। इसके पहले दो बार वे असफल हो चुकी थीं। तीसरी बार की तैराकी में उनके साथ असफलता का अनुभव और सफल होने का जज्बा था।

अपन भी रोज तैरते हुए सोचते हैं कि आज पक्का पानी में साँस लेना सीख जाएँगे। अभी आधी अधूरी सफलता मिली है। सारे स्टेप्स याद हो गए हैं लेकिन अमल में लाते समय भूल जाते हैं।

वैसे डायना नायड का जिक्र करने के पीछे की मंशा यह समझना और जताना भी है हमारा अभी तक पानी में सांस लेने में असफल होना और डायना नायड का क्यूबा से फ्लोरिडा तैरने में दो बार असफल होना एक जैसा है। लेकिन यह बात उसी तरह की है जिसमें राजनीतिक पार्टी अपने भ्रष्टाचार, अपराध और कमीनगियाँ पहले की पार्टी के भ्रष्टाचार, अपराध और चिरकुटैयों का जिक्र करके जस्टिफ़ाई करती हैं। पानी में जरा सा हाथ पांव मारने लेने से कोई डायना नायड नहीं हो जाता।

तुलना संपूर्णता में ही ठीक लगती है। आधी-अधूरी तुलना भुलावे के सिवा और कुछ नहीं।

ब्रेस्ट स्ट्रोक में तैरते हुए साँस लेने का फ़ंडा बताते हुए कोच ने सिखाया -'पानी को नीचे धकियाओ। पानी बदले में आपको ऊपर धकेलेगा। ऊपर आते से पहलें नाक से सांस छोड़िए। उससे भी ऊपर आने का पुश मिलेगा। साँस पूरी मत छोड़िये। 60-70 % छोड़िए। ऊपर आते समय मुँह खोलकर साँस ले लीजिए। फिर इसी को दोहराइये।

तैरना भी एक प्रोजेक्ट है। साँस चोरी का अभियान। चोरी करने वाला तो एक होता है लेकिन उसके सहयोगी कई होते हैं। कोई इशारा करता है -'शिकार आ रहा है।' कोई बताता है -'नज़दीक आ गया शिकार।' कोई झपट्टा मारने का इशारा करता है। झपट्टा मारने के बाद कोई बाइक स्टार्ट किए हुए तैयार रहता है। उस पर बैठकर चोर लोग माल पार करके फूट लेते हैं। लूटा हुआ ग्राहक लिखाता रहे FIR.

अपन भी तैरते हुए डायना नायड की तरह आने वाली साँस, जाने वाली साँस का हिसाब रखकर तैरते रहे। हाथ से पानी नीचे करके ऊपर आते लेकिन जैसे ही मुँह ऊपर करते, पाँव छपछपाना छोड़कर हमारा साँस लेना देखने लगे। हाथ का भी ध्यान साँस लेने की तरफ़ हो जाता। हाथ और पैर के जिम्मे पानी में संतुलन बनाने का काम है। लेकिन साँस तैरते समय सांस लेने के समय दोनों अपना काम छोड़कर तमाशबीन बन जाते हैं। संतुलन गड़बड़ा जाता। हम बाक़ी की साँस भी पानी में छोड़कर वहीं खड़े हो जाते।

पानी में तैरते हुए लगा कि काश हम भो मछली की तरह गाल से साँस लेना जानते होते तो आराम से तैरते। लेकिन फिर हमको लगता कि अगर ऐसा होता तो न जाने कब कोई बड़ी मछली हमको खा गई होती। हम किसी जाल में फँसकर किसी फ्राई पैन में तले जा चुके होते। बुद्धिनाथ मिश्र जी का गीत है न :

'एक बार और जाल फेंक रे मछेरे
जाने किस मछली में बंधन की चाह हो।'

गीत सुनने में भले मोहक है लेकिन किसी मछली में ख़ुद बंधन में फँसने की चाह नहीं होती। चारे के लालच में भले वे जाल में फँस जाएँ लेकिन अगर उनको पता होता कि इसमें बंधन है तो वे शायद चारा न खाती।

मछलियों और इंसानों में यही फ़र्क़ होता है। मछलियाँ अनजाने में फँसती हैं। इंसान जानबूझकर लालच में फँसता है। उसको बंधन में मजा आता है। दुनिया भर के लोग नौकरी करते हुए जिंदगी गुजारते हैं, मन के ख़िलाफ़ समझौता करते हुए जीते हैं। राजनीति में नेता अपने विरोधी दल में शामिल होने में बेशर्म होकर शामिल हो जाते हैं।

आज तैरते हुए यह भी एहसास हुआ कि साँस जल्दी फूल जाती है। स्टैमिना बढ़ाना है। साइकिलिंग और वाकिंग का अभ्यास करना है। दौड़ने की बात लिखने में खतरा है कि Satish Saxena जी अपनी पार्टी ज्वाइन करा लेंगे।

लौटते हुए तिराहे पर देखा। कल जली हुई कार आज उठ गई थी। जहाँ कार जली हुई थी वहाँ सड़क भी सुलगी हुई थी। कार के टायर का कुछ हिस्सा अभी भी सड़क पर चिपका हुआ था। टायर और कार की तारीफ़ करते लोग कहते हैं -'गाड़ी चपक के चलती है।' लगता है जली हुई कार के टायर ने यह बात दिल पर ले ली। उसका निचला हिस्सा अभी भी सड़क से चिपका हुआ है। कार चली गई लेकिन टायर अभी सड़क से चिपका हुआ है।

आज हमारा तैराकी सीखने का बाहरवाँ दिन था। 

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