आज सुबह स्वीमिंग पूल के लिए निकले। निकले तो आठ बजने में एक मिनट बाकी थे। स्वीमिंग पूल पहुँचने में सात मिनट लगते हैं। मतलब छह मिनट लेट थे घर से ही। देरी के बावजूद आराम-आराम से गाड़ी हांकते हुए निकले। दायें -बायें और सामने देखते हुए। पीछे देखने और चलने का भूतों का होता है। हमने यह काम रियरव्यू मिरर के लिए छोड़ दिया।
मोड़ पर एक बालिका स्कूटी पर आती दिखी। हमने रुककर उसे मुड़ने दिया। उसके मुड़ने के बाद मुड़े। बालिका कनखियों से इधर-उधर देखती हुई आगे बढ़ी। हम भी मुड़कर आगे बढ़े। आगे एक महिला अपनी दुकान के बाहर खड़े-खड़े अपने हाथ धो रही थी। धोने के बाद पानी सड़क पर गिराती जा रही थी। हाथ साफ़ करती हुई वह सड़क को गंदा करती जा रही थी। उसकी दुकान के पल्ले बाहर की तरफ़ खुले हुए थे। पल्ले सड़क के दसवें हिस्से पर अघोषित कब्जा किए हुए थे।
आगे सड़क पर एक महिला एक हाथ में झोला दूसरे में मोबाइल थामे सरपट चली जा रही थी। मोबाइल पर चलते-चलते बतियाती जा रही थी। उसके आगे एक मियाँ-बीबी अपने बच्चे के साथ चले जा रहे थे। हम सबको देखते हुए स्वीमिंग पूल की तरफ़ बढ़ते गए।
स्वीमिंग पूल पहुंचकर नाम लिखाने के लिए खड़े हुए। वहाँ मौजूद बालिका हमसे बाद में आए लोगों के नाम लिखने लगी। हमने उतावली दिखाई तो बोली -'हमें आपका नाम याद है। लिख रहे हैं।' हम खुश हो गए कि उसको हमारा नाम याद है। उसने मेरा नाम लिखा -anup. हम और खुश हो गए। आज के जमाने में किसी को नाम याद रहे इससे बड़ी ख़ुशी की क्या बात है। बालिका ने बताया -'आपका पूल पास अभी बना नहीं था। एक दिन और लगेगा बनने में।' हमने कहा -'कोई बात नहीं।' इसके बाद अपन शॉवर लेकर पानी में उतर गए।
पानी में उतरने पर कोच ने अभ्यास करने को कहा। छोटी कक्षाओं में 'नंबर चहेतू' बच्चे टीचर के आसपास मंडराते हुए उनकी निगाह में रहने की कोशिश करते हैं। उसी तरह अपन कोच से बार-बार अपनी प्रगति के बारे में पूछते रहे। कोच की तारीफ़ करनी होगी कि बिना झल्लाये वह बताते रहे।
पूल में उतरककर साँस लेकर तैरना शुरू किया। अब हाथ से पानी काटते हुए पांव चलाने का अभ्यास करना था । हाथ और पांव एक साथ चलना था। चलाते रहे। मुंडी पानी में घुसाकर हाथ चलाते तो शरीर अपने आप ऊपर उठ जाता। इसके बाद पानी में पांव चलाते हुए आगे बढ़ते।
तैरने के लिए मुंडी पानी में घुसाते हुए लगा कि यह सीखने के लिए विनम्रता का प्रतीक है। बाइबिल की पहली सीख याद आई -'सबमिट टु अथॉरिटी।' सत्ता (अधिकारी) के सामने समर्पण करें। दुनिया में लोग किसी भी धर्म को मानने वाले हैं लेकिन बाइबिल की यह उक्ति लागू है। जहाँ समर्पण नहीं वहाँ सत्ता हमला कर देती है।
पानी में मुँह किए तैरने के बाद साँस फूल जाती तो साँस पानी में छोड़कर सीधे हो जाते। तसल्ली से खड़े होकर साँस लेकर फिर तैरने लगते। कई बार ऐसा हुआ कि पानी के अंदर साँस फूलने को हुई। ऐसे में हमने तसल्ली से पानी में सांस छोड़ी लेकिन पानी में सांस ली नहीं पानी के अंदर। इसके बाद तसल्ली से ऊपर आए। फिर साँस लेकर अभ्यास शुरू किया।
पानी में साँस फूलने पर पूरी साँस पानी में छोड़कर अगली साँस लिए बिना ऊपर आने की प्रक्रिया देखकर ऐसा लगा जैसे कोई ओवरलोडेड ट्रक नाके पर पकड़ा जाने पर पास का सारा सामान सिपाही को सौंपकर छूट जाये। हड़बड़ाए या बहस की तो धरे गए पानी में। पानी में कोई भी समस्या आने पर जरूरी है , बिना सांस लिए तसल्ली से ऊपर आने का इंतज़ार करना। बिना हाथ-पाँव मारे साँस छोड़ना और ऊपर आ जाना। इधर-उधर हाथ-पाँव मारने से परेशानी बढ़ती है।
पानी में तैरना सीखते हुए लगा कि अपने यहाँ की सरकारें भी इसी तरह काम करती हैं। बड़ी से बड़ी समस्या आने पर साँस लिए बिना चुपचाप, बिना कोई प्रतिक्रिया दिए शान्त हो जाती हैं। कोई कुछ भी ऊलजलूल कहता रहे, करता रहे कुछ बोलना नहीं है। कोई आरोप लगाए, देश पर कोई समस्या आए, मौनी बाबा बनकर उसके गुजरने का इंतज़ार करना है। बिना कुछ किए -धरे। इस मामले में हमारी तैराकी और सरकार का तरीका एक ही है। हमें खुशी हुई कि कम से कम किसी मामले में तो अपन सरकार के तरीके से काम काम करते हैं।
जिस पूल को हमने दो दिन पहले टहलते हुए पार किया था। उसी को आज हमने तैरते-तैरते पार किया। पहली बार में पूरे पूल की चौड़ाई को सात-आठ बार में पार किया। दूसरी बार छह-सात बार में पार किया। आख़िरी बार पूरे पूल को छह बार में तैरकर पार किया। पूल की चौड़ाई 25 मीटर है। इस तरह एक बार में औसतन चार मीटर तैरे। एक दिन पहले औसतन पाँच फुट तैरे थे। आज का औसत करीब बारह फुट रहा। मतलब कल के मुकाबले आज दोगुनी से कुछ अधिक प्रगति हुई। एक दिन में सौ प्रतिशत से अधिक। काफ़ी है न !
कोच ने कहा -'आप अच्छा सीख रहे हैं।' उसकी बात सुनकर 'कौन बनेगा करोड़पति' में अमिताभ का कहना याद आया -'आप बहुत अच्छा खेल रहे हैं।' हमने बताया कि आज छह बार में पूल पार किया। उसने कहा -'कल पाँच बारे में करेंगे, परसों चार, फिर तीन बार में। सीख जायेंगे।'
आज कोच ने यह भी बताया कि बीच-बीच में सर उठाकर सांस लेते हुए तैरिए। हमने सोचा यह तो पहले बताया नहीं अगले ने। उसने बताया कि मुँह बाहर करके साँस लेते हुए तैरना सीखना है अब आपको। हमने सोचा -'अब कल सीखेंगे।'
पूल से बाहर निकलकर वहीं नहाए। कपड़े साथ ले गए थे। चेंज करके स्विमिंग पूल से राजा बेटा बनकर घर वापस लौटे।
घर आते हुए सोच रहे था कि पूल में पानी का डर खत्म हो गया है ।बस अब कायदे से तैरना सीखना है।
आज तैराकी सीखने का छठा दिन था।
No comments:
Post a Comment