Thursday, August 13, 2020

आयुध वस्त्र निर्माणी ने बनाई विशेष वर्दी

 



भारत सरकार के आत्म निर्भर अभियान के अंतर्गत आयुध वस्त्र निर्माणी, शाहजहाँपुर ने 11 अगस्त को बहुत ऊंचाई पर प्रयोग में आने वाली वर्दी आयुध निर्माणी बोर्ड के महानिदेशक एवं चेयरमैन श्री हरिमोहन जी Hari Mohan द्वारा 'लांच' की गयी।

आयुध निर्माणी बोर्ड, कोलकता द्वारा संचालित इस कार्यक्रम में महानिदेशक एवं चेयरमैन के साथ आयुध निर्माणी बोर्ड , कोलकता के सदस्य श्री सी.एस. विश्वकर्मा, सदस्य श्री ए.के.जैन, सदस्य वित्त , उपमहानिदेशक श्री गगन चतुर्वेदी तथा श्री प्रकाश अग्रवाल उपस्थित थे। कार्यक्रम का शानदार संचालन श्री गगन चतुर्वेदी ने किया।
1914 में स्थापित आयुध वस्त्र निर्माणी, शाहजहाँपुर में हर तरह की वर्दी, कम्बल, जर्सी, मोजे आदि का उत्पादन होता है। इसके अलावा टेंट आदि भी यहां बनाये जा चुके हैं। ऊंचाई पर प्रयोग में आने वाली वर्दियों का उत्पादन यहां की विशेषता है।
भारत सरकार की आत्मनिर्भर योजना विदेशों से आयात किये जाने वाले सामान को अपने देश में बनाने की योजना है। इस क्रम में आयुध वस्त्र निर्माणी, शाहजहाँपुर में ECWCS मतलब एक्ट्रीम कोल्ड वेदर क्लाडिंग सिस्टम बनाकर लांच किया गया।
ECWCS सिस्टम 18000 फुट से अधिक ऊंचाई पर काम आने वाली वर्दी है जहां तापमान शून्य से 50 डिग्री नीचे रहता है और हवाओं की रफ्तार 40 किमी/घण्टा तक रहती है।
यह सिस्टम तीन भागों में है। अंदर वाला सिस्टम शरीर के पसीने को बाहर भेजता है। बीच वाला सिस्टम शरीर की गर्मी को अंदर रखता है। सबसे ऊपर वाला सिस्टम हवा, बर्फबारी और तेज हवाओं से मुकाबला करता है।
अभी तक यह वर्दी सिस्टम विदेश से आयात होता है। देश में बनने के बाद लगभग 100 करोड़ विदेशी मुद्रा की बचत होगी। हमारे उत्पाद की कीमत विदेशी कीमत से कम होगी।
हमारी वर्दी का ट्रायल आईटीबीपी द्वारा किया जा चुका है। हर मायने में यह वर्दी के मानकों और आराम के लिहाज से उपयुक्त पाई गई। सेना से इसका ट्रायल होने के बाद इसका उत्पादन शुरू होगा।
ठंड में आराम के लिए वर्दी का वजन कम होना चाहिए और वर्दी की क्लो वैल्यू अधिक होनीं चाहिए। क्लो वैल्यू मतलब सर्दी में आराम महसूस करने का पैमाना। बिना कपड़े के इंसान की क्लो वैल्यू शून्य होती है। जाड़े के कपड़े , शूट आदि की क्लो वैल्यू लगभग 1.0 होती है। एस्किमो जो कपड़े पहनते हैं उनकी क्लो वैल्यू 4.0 होती है। ECWCS जो आयुध वस्त्र निर्माणी, शाहजहांपुर में बना है इसकी क्लो वैल्यू 5.5 है। मतलब बहुत ऊंचाई पर 'सर्दी में भी गर्मी का एहसास' होगा इसे पहनकर। इसका वजन है केवल 4.5 किलोग्राम।
इस ड्रेस सिस्टम में सारा सामान देशी है। इसको बनाने में आईआईटी दिल्ली से शुरुआती सहयोग मिला।
उत्पाद की लांचिंग वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा महानिदेशक और चेयरमैन द्वारा की गई। इस मौके पर अन्य निर्माणियों के उत्पादों की भी लांचिंग हुई और कुछ ग्राहकों को सौंपे भी गए।
कोरोना काल में जब सब कुछ ठप्प सा है, स्थगित है तब आयुध निर्माणियां काम कर रही हैं, नित नए प्रतिमान रच रही हैं आने ध्येय वाक्य -'विनाशय च दुष्कृताम' के साथ।

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परसाई के पंच- 10

 1. अगर अकालग्रस्त आदमी सडक पर पडा अखबार उठाकर उतने पन्ने खा ले, तो महीने भर भूख नहीं लगे। पर देश का आदमी मूर्ख है। अन्न खाना चाहता है। भुखमरी के समाचार नहीं खाना चाहता।

2. अकाल हमारी महान भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख तत्व है। द्रोणाचार्य जैसे वीर तक भूखे मरते थे।
3. जीने की इच्छा गोंद होती है जो शरीर जोड़े रहती है। मरने की इच्छा में पोषक तत्व होते हैं।
4. मैं सपनों से परेशान हूं। वे कितने सुखी हैं , जिन्हें सपने नहीं आते। मुझे लगने लगा है कि वही सुख की गहरी नींद सोता है, जिसे सपने नहीं आते।
5. सुअर और कुत्ता ऐसे प्राणी हैं जिन्हें सपने नहीं आते। पर अब अन्न का दाना न मिलने से चूहे को भी सपने आते हैं।
6. इन परोपकारी आदमियों से भगवान बचाये ! जो करेंगे, उसका दस गुना किस्सा दसों बार सुनायेंगे।
7. परोपकारी आदमी भी क्या मुसीबत है ! आप उपकार न करना चाहें, तो भी वह आपका भला करने पर हमेशा उतारू रहेगा।
8. भगवान को भारत से हर वर्ष एक निश्चित मात्रा में पूजा मिलती है। तीन चौथाई पूजा-स्तुति उन सरकारी नौकरों की तरफ़ से मिलती है, जो सस्पेण्ड हो जाते हैं, जिनकी तरक्की रोक ली जाती है या जिन पर घूस आदि के मामले चलते हैं।
9. भगवान की सत्ता नौकरों के ’कण्डक्ट रूल्स’ और ’इन्डियन पेनल कोड’ पर टिकी हुई है।
10. यदि भारत सरकार अपने कर्मचारियों के खिलाफ़ कार्रवाई न करे तो मध्यम वर्ग से भगवान का नाम उठ ही जाये।
11. असन्तुष्ट कर्मचारी सरकारी दल के लिये खतरनाक होते हैं।
12. जिसके हाथ में फ़िल्मी पत्रिका है, वह बगल में बैठे भगवान से भी बात नहीं करेगा।
13. धरमचन्द बहुत ईमानदार था क्योंकि ग्राहक से बात करते हुये वह ’ईमान से’ कहता जाता था। वह सच्चा आदमी था क्योंकि वह कपड़े की दर और उधारी का हिसाब ’भगवान की कसम’ खाकर बताता था।
14. ये साहब लोग ही आज की द्रौपदी हैं, मंहगाई के दु:शासन ने जिनके कपड़े छीन लिये हैं।
15. निठल्लों को दूसरे की विजय पर जय बोलने और फ़ूल बरसाने के अतिरिक्त और काम ही क्या है?
16. धर्म, धन के हिसाब से टीमटाम धारण कर लेता है।
17. तरुण-तरुणी के मिलने के उचित कारण बेवकूफ़ ही खोजते हैं।
18. मैं रात-दिन हर सफ़ल लेखक के प्रति ईर्ष्या से जलता रहता हूं। ईर्ष्या से बढकर कोई तप नहीं है।
19. राज्य का आधार धन है। राजा को प्रजा से धन वसूल करने की विद्या आनी चाहिये। प्रजा से प्रसन्नापूर्वक धन खींच लेना, राजा का आवश्यक गुण है।
20. शोध का प्रयोजन ही ही यह है कि जिसमें जो चीज न हो , उसे खोजा जाये।
21. प्रजातन्त्र इस वक्त ऐसा पक गया है कि एक आदमी के मर जाने या भूखा रह जाने की धमकी से 50 करोड़ आदमियों के भाग्य का फ़ैसला हो रहा है।

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Wednesday, August 12, 2020

परसाई के पंच- 9

 1. साहित्य का काम अच्छी दुकान या अच्छी नौकरी लगने तक ही होता है।

2. बाराती से ज्यादा बर्बर जानवर कोई नहीं होता। ऐसे जानवरों से हमेशा दूर रहना चाहिये।
3. लौटती बारात बहुत खतरनाक होती है। उसकी दाढ में लड़की वाले का खून लग जाता है और वह रास्ते में जिस-तिस पर झपटती है।
4. इस देश में लड़की के दिल में जाना हो, तो मां-बाप के दिल की राह से जाना होता है।
5. बुजुर्ग का खास ’प्रिवलेज’ (विशेष हक) है कि किसी भी औरत को घूर सकता है और कोई बुरा नहीं मानता।
6. इस देश के युवकों को प्रेम पर मरना भी तो नहीं आता। प्रेम में मरेंगे , तो घिनापन से। मरते किसी और कारण से हैं, मगर सोचते हैं कि प्रेम पर मर रहे हैं।
7. जनता की पुकार कभी-कभी , मेमने की पुकार जैसी होती है। वह पुकारता है मां को और आ जाता है भेडिया।
8. सरकार का काम राज करना है, रोजी-रोटी की समस्या हल करना नहीं है।
9. यहां वही सो सकते हैं, जिन्हें यहां से तन्ख्वाह मिलती है। ऐसा नियम है। यह नियम पूरे देश में लागू है कि जिसे जहां से तन्ख्वाह मिलती है, वह वहां सो सकता है।
10. जिस राजनेता के आसपास सुन्दरियों का गुच्छा होता है, उसे मिलने वालों का टोंटा नहीं पड़ता।
11. किसी राज-कर्मचारी को भाई मत कहना। वह मनुष्य होने में अपनी अप्रतिष्ठा समझता है। उसे ’देवता’ कहना चाहिये।
12. वोट देने वाले से लेकर साहित्य - मर्मज्ञ तक जाति का पता पहले लगाते हैं।
13. कुछ मैंने ऐसे भी देखे हैं , जो गुलदस्ता इस तरह लेते हैं जैसे कुंजड़े की टोकरी से गोभी चुरा रहे हों। एक नेता गुलदस्ता ऐसे पकड़ते हैं, जैसे लट्ठ पकड़े हों।
14. जिस समाज के लोग शर्म की बात पर हंसे और ताली पीटें, उसमें क्या कभी कोई क्रांतिकारी हो सकता है?
15. साधारण आदमी नौकरी, बीबी और बच्चों के जीवन में सार्थकता ढूंढ लेते हैं।
16. अमेरिकी समाज वह समाज है जो बर्बरता से एकदम पतन पर पहुंच गया है- वह सभ्यता के स्टेज से गुजरा ही नहीं।
17. योगी का अभिनय करना आसान है, ईश्वर का अभिनय करना भी आसान है। मगर पागल का अभिनय करना बड़ा मुश्किल है।
18. मैं जानता हूं कि आध्यात्म भी धन्धा है। अमोह भी धन्धा है। निर्लोभ भी धन्धा है। अपरिग्रह भी धन्धा है। अहिंसा तक धन्धा हो गया है।
19. अमेरिका हो आने से ईश्वर खुद ही पास सरक आता है, और ईश्वर पास सरक आये तो धन्धा ही धन्धा है।
20. मुझे ऐसे लोग भले लगते हैं जो छोटी-छोटी चीजों से प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। मैं इन चीजों पर हंसता हूं, तो दुख भी होता है कि वह कोई अच्छी बात नहीं कर रहा हूं।
21. गणतन्त्र-परेड कुछ घंटे होती है, अकाल-परेड महीने में हर रोज होती रहती है। राशन-दुकान पर खाली झोला लिये खड़ी फ़ौज में उन फ़ौजियों से ज्यादा जोश होता है।

Tuesday, August 11, 2020

परसाई के पंच-8

 1. जो लोग समय तय करके भी घर नहीं मिलते, वे मुझे भगवान के एजेण्ट मालूम होते हैं।वे हमें अभ्यास कराते हैं कि कैसे बिना ऊबे, अवमानना की अवहेलना करके अनिश्चित काल के लिये किसी दरवाजे पर इन्तजार किया जाता है।

2. इन्तजार से प्रेम बढता है। हर क्षण वही मन में रहता है और आंखें फ़ाटक पर बिछी रहती हैं। प्रेम का नाम इसी बात से तो होता है कि कौन आपका इतनी देर इन्तजार करता है।
3. समय की पाबन्दी के लिये जितनी सावधानी चाहिये, उससे कम समय पर न मिलने के लिये नहीं चाहिये। मैं घर ऐसे समय वक्त जाता हूं, जब उनके मिलने की बिल्कुल सम्भावना नहीं है- और वे मिल जाते हैं। उनके जहां होने की उम्मीद है वहां न होकरे वे वहां होंगे, जहां उनके होने की उम्मीद नहीं है।
4. सत्य की टीमटाम हो लोग पूछने लगते हैं कि इसका खर्च कौन सा-सा असत्य दे रहा है?
5. सत्य पास ही मिलता है तो मैं उसे ग्रहण कर लेता हूं। दूर नहीं जाता सत्य के लिये। उसमें रिक्शा किराया लग जाता है।
6. जिसे छह-छह महीने वेतन न मिले, वह वैसे ही आध्यात्मिक हो जाता है। कहते हैं जनक ’विदेह’ थे। याने देह की सुधबुध नहीं रहती थी। यह तपस्या का परिणाम नहीं था। जिसके घर चार लड़कियां बिन ब्याही बैठी हों, वह विदेह हो ही जायेगा।
7. सच्चा ईमानदार वह होता है, जो सबको बेईमान मानकर चले।
8. जिस प्रकार शादी के मौसम में अधिक रेशमी कपड़ा बिकता है। समय आने पर हम सज्जनों को उसी तरह पहचान लेते हैं, जिस तरह कि खाता बही जब्ती होने पर बिक्रीकर इन्स्पेक्टर के रिश्तेदारों को पहचान लेते हैं।
9. हमारी शिक्षा-दीक्षा ’लालफ़ीतावाद’ में हुई है जिसका प्रथम सिद्धांत ही देर करना है।
10. नियम के कारण ही एक कुलटा कहलाती है और दूसरी प्रवित्रता। कुलटा का कुल मिलाकार पुरुष-सम्पर्क पतिव्रता से कम होता है, तो भी।
11. अर्जुन ज्ञानी हो गया और लड़ने लगा। यानी ज्ञानी वह जो हमेशा लड़ने को तैयार रहे।
12. कुछ करो, तो आधे अच्छे काम होते हैं और आधे बुरे। कुछ नहीं करने से कोई बुरा काम नहीं होता। बुरा करने से यही अच्छा है कि बैठे-बैठे अच्छा सोचा करो।
13. जिसकी टेबल पर फ़ाइलों का जितना बड़ा ढेर होगा, वह उतना ही दीर्घायु होगा और उतना ही बड़ा देशसेवक होगा।
14. केन्द्रीय सरकार को सहज हिदायत देनी चाहिये कि जो अपना काम पूरा कर देगा, उसे नौकरी से निकाल दिया जायेगा। वह मरकर अपनी सेवा से वंचित करना चाहता।
15. लोग अपने काम में दखल नहीं देने देते, जब तक आप उनका भला न करने लगे।
16. अब मुझे समझ में आया कि लोग स्वार्थी क्यों हो जाते हैं। वे दूसरों का भला करना चाहते हैं, पर कोई उनसे भला कराने को तैयार नहीं होता। निराश होकर वे अपना भला करने लगते हैं। लोग उनकी निन्दा करते हैं, पर वे दया के पात्र हैं। वे मजबूरी में स्वार्थी हो जाते हैं।
17. अगर चाहते हो कि कोई तुम्हें हमेशा याद रखे, तो उसके दिल में प्यार पैदा करने का झंझट न उठाओ। उसका कोई स्कैन्डल मुट्ठी में रखो।
18. देखो, साहब जब खुद तबादला करता है, तब वह दण्ड देता है। और जब किसी की प्रार्थना पर करता है, तब वह कृपा होती है। कृपा करने का कोई नियम शासन में नहीं है, पर सजा देने की छूट है।
19. ये बड़े-बड़े अफ़सर बेचारे बहुत कमजोर होते हैं। ये तबादले से ज्यादा कुछ कर ही नहीं सकते। अगर ये कहें कि मैं तुम्हें मार डालूंगा, तो समझो कि तबादला करेंगे।
20. गाली वही दे सकता है, जो रोटी खाता है। पैसा खानेवाला सबसे डरता है। जो सरकारी कर्मचारी जितना नम्र होता है, वह उतने ही पैसे खाता है।
21. भ्रष्टाचारी अगर जल्दी मर जाये, तो परिवार को बड़ी सुविधा होती है।

Monday, August 10, 2020

परसाई के पंच-7

 आज परसाईजी की पुण्यतिथि है। परसाई जी की स्मृति को नमन करते उनके कुछ उद्धरण यहां फ़िर से पेश हैं:

1.इस देश के बुद्धिजीवी शेर हैं,पर वे सियारों की बरात में बैंड बजाते हैं.
2.जो कौम भूखी मारे जाने पर सिनेमा में जाकर बैठ जाये ,वह अपने दिन कैसे बदलेगी!
3.अच्छी आत्मा फोल्डिंग कुर्सी की तरह होनी चाहिये.जरूरत पडी तब फैलाकर बैठ गये,नहीं तो मोडकर कोने से टिका दिया.
4.अद्भुत सहनशीलता और भयावह तटस्थता है इस देश के आदमी में.कोई उसे पीटकर पैसे छीन ले तो वह दान का मंत्र पढने लगता है.
5.अमरीकी शासक हमले को सभ्यता का प्रसार कहते हैं.बम बरसते हैं तो मरने वाले सोचते है,सभ्यता बरस रही है.
6.चीनी नेता लडकों के हुल्लड को सांस्कृतिक क्रान्ति कहते हैं,तो पिटने वाला नागरिक सोचता है मैं सुसंस्कृत हो रहा हूं.
7.इस कौम की आधी ताकत लडकियों की शादी करने में जा रही है.
8.अर्थशास्त्र जब धर्मशास्त्र के ऊपर चढ बैठता है तब गोरक्षा आन्दोलन के नेता जूतों की दुकान खोल लेते हैं.
9.जो पानी छानकर पीते हैं, वे आदमी का खून बिना छना पी जाते हैं .
10.नशे के मामले में हम बहुत ऊंचे हैं.दो नशे खास हैं--हीनता का नशा और उच्चता का नशा,जो बारी-बारी से चढते रहते हैं.
11.शासन का घूंसा किसी बडी और पुष्ट पीठ पर उठता तो है पर न जाने किस चमत्कार से बडी पीठ खिसक जाती है और किसी दुर्बल पीठ पर घूंसा पड जाता है.
12.मैदान से भागकर शिविर में आ बैठने की सुखद मजबूरी का नाम इज्जत है.इज्जतदार आदमी ऊंचे झाड की ऊंची टहनी पर दूसरे के बनाये घोसले में अंडे देता है.
13.बेइज्जती में अगर दूसरे को भी शामिल कर लो तो आधी इज्जत बच जाती है.
14.मानवीयता उन पर रम के किक की तरह चढती - उतरती है,उन्हें मानवीयता के फिट आते हैं.
15.कैसी अद्भुत एकता है.पंजाब का गेहूं गुजरात के कालाबाजार में बिकता है और मध्यप्रदेश का चावल कलकत्ता के मुनाफाखोर के गोदाम में भरा है.देश एक है.कानपुर का ठग मदुरई में ठगी करता है,हिन्दी भाषी जेबकतरा तमिलभाषी की जेब काटता है और रामेश्वरम का भक्त बद्रीनाथ का सोना चुराने चल पडा है.सब सीमायें टूट गयीं.
16.रेडियो टिप्पणीकार कहता है--'घोर करतल ध्वनि हो रही है.'मैं देख रहा हूं,नहीं हो रही है.हम सब लोग तो कोट में हाथ डाले बैठे हैं.बाहर निकालने का जी नहीं होत.हाथ अकड जायेंगे.लेकिन हम नहीं बजा रहे हैं फिर भी तालियां बज रही हैं.मैदान में जमीन पर बैठे वे लोग बजा रहे हैं ,जिनके पास हाथ गरमाने को कोट नहीं हैं.लगता है गणतन्त्र ठिठुरते हुये हाथों की तालियों पर टिका है.गणतन्त्र को उन्हीं हाथों की तालियां मिलती हैं,जिनके मालिक के पास हाथ छिपाने के लिये गर्म कपडा नहीं है.
17.मौसम की मेहरवानी का इन्तजार करेंगे,तो शीत से निपटते-निपटते लू तंग करने लगेगी.मौसम के इन्तजार से कुछ नहीं होता.वसंत अपने आप नहीं आता,उसे लाना पडता है.सहज आने वाला तो पतझड होता है,वसंत नहीं.अपने आप तो पत्ते झडते हैं.नये पत्ते तो वृक्ष का प्राण-रस पीकर पैदा होते हैं.वसंत यों नहीं आता.शीत और गरमी के बीच जो जितना वसंत निकाल सके,निकाल ले.दो पाटों के बीच में फंसा है देश वसंत.पाट और आगे खिसक रहे हैं.वसंत को बचाना है तो जोर लगाकर इन दो पाटों को पीचे ढकेलो--इधर शीत को उधर गरमी को .तब बीच में से निकलेगा हमारा घायल वसंत.
18.सरकार कहती है कि हमने चूहे पकडने के लिये चूहेदानियां रखी हैं.एकाध चूहेदानी की हमने भी जांच की.उसमे घुसने के छेद से बडा छेद पीछे से निकलने के लिये है.चूहा इधर फंसता है और उधर से निकल जाता है.पिंजडे बनाने वाले और चूहे पकडने वाले चूहों से मिले हैं.वे इधर हमें पिंजडा दिखाते हैं और चूहे को छेद दिखा देते हैं.हमारे माथे पर सिर्फ चूहेदानी का खर्च चढ रहा है.
19.एक और बडे लोगों के क्लब में भाषण दे रहा था.मैं देश की गिरती हालत,मंहगाई ,गरीबी,बेकारी,भ्रष्टाचारपर बोल रहा था और खूब बोल रहा था.मैं पूरी पीडा से,गहरे आक्रोश से बोल रहा था .पर जब मैं ज्यादा मर्मिक हो जाता ,वे लोग तालियां पीटने लगते थे.मैंने कहा हम बहुत पतित हैं,तो वे लोग तालियां पीटने लगे.और मैं समारोहों के बाद रात को घर लौटता हूं तो सोचता रहता हूं कि जिस समाज के लोग शर्म की बात पर हंसे,उसमे क्या कभी कोई क्रन्तिकारी हो सकता है?होगा शायद पर तभी होगा जब शर्म की बात पर ताली पीटने वाले हाथ कटेंगे और हंसने वाले जबडे टूटेंगे .
20.निन्दा में विटामिन और प्रोटीन होते हैं.निन्दा खून साफ करती है,पाचन क्रिया ठीक करती है,बल और स्फूर्ति देती है.निन्दा से मांसपेशियां पुष्ट होती हैं.निन्दा पयरिया का तो सफल इलाज है.सन्तों को परनिन्दा की मनाही है,इसलिये वे स्वनिन्दा करके स्वास्थ्य अच्छा रखते हैं.
21.मैं बैठा-बैठा सोच रहा हूं कि इस सडक में से किसका बंगला बन जायेगा?...बडी इमारतों के पेट से बंगले पैदा होते मैंने देखे हैं.दशरथ की रानियों को यज्ञ की खीर खाने से पुत्र हो गये थे.पुण्य का प्रताप अपार है.अनाथालय से हवेली पैदा हो जाती है.

Sunday, August 09, 2020

परसाई के पंच-6

 1.जो देश की हालत से बात शुरू करे, वह भयानक 'चिपकू' होता है। दुनिया की हालत वाला तो और खतरनाक होता है।

2. बड़े भ्रष्टाचारी को बाइज्जत अलग कर देने की विधि को 'कम्पलसरी रिटायरमेंट' कहते हैं।
3. 15 अगस्त 1947 को ऐसा हुआ था। ज्योंही तिरंगा झंडा ऊपर गया था, बहुत लोगों के पैंट नीचे खिसक गये थे। उनकी जगह धोती आ गयी थी।
4. अच्छी ऊपरी आमदनी वाला कभी तरक्की के झंझट में नहीं पड़ता।
5.घर में खाने-पीने का सुभीता हो, जिम्मेदारी न हो, तो सन्त और भक्त होने में सुभीता रहता है।
6. बिजनेस की भी एक नैतिकता होती है। यह नैतिकता है-चुंगी-चोरी, स्टॉक दबाना, मुनाफाखोरी करना, ब्लैक से देश का माल बेंचना।
7.बड़ा साहब 'स्टीम रोलर' होता है, जो डिपार्टमेंट के बड़े-छोटे का भेद मिटा देता है।
8. डर भेद मिटाता है। प्रेम नहीं मिटाता। डर खुद प्रेम पैदा करता है। डूबने से बचने के लिए साहब चपरासी के पैर इस तरह पकड़ लेता है, जैसे वे भगवान के चरण हों।
9. धर्म धंधे से जुड़ जाय, इसी को 'योग' कहते हैं।
10. जो सरकार बनाने वाला हो, उसके साथ रहना चाहिए।
11. जिस पार्टी के नेता कमजोर और बीमार रहते हैं, उस पार्टी का विरोध स्वस्थ विरोध कहलाता है।

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परसाई के पंच-5

 

1. गरीबों को तो खैराती अस्पताल का ही सहारा होता है।
2. पुराने जमाने में शुभ कार्यों में अच्छा मुहूर्त देखने की जो परिपाटी है, वह देवताओं का ठीक 'मूड' जानने के लिए ही होगी।
3.चिकनी बात पर आदमी का पांव फिसला और वह गया रसातल को।
4. जब जीना मरने से अधिक कष्टकर हो जाय, तो मरने को ही सच्चा जीवन मान लेना चाहिए।
5. कौआ अगर न्यायाधिकार लेकर बैठ जाय तो हर उज्ज्वल हंस को कोढ़ी कहकर तिरस्कृत कर देगा।
6. जब पेट भरा होता है तब भोजन के नीचे सत्य दब जाता है।
7. बहुत लोग बिना आहट की जिंदगी गुजार देते हैं। वे आसपास होंगे , पर उनकी आहट नहीं होगी।
8. कोई सामने उसका अपमान कर दे तो वह पीठ फेरकर एडजस्ट कर लेता है।
9. कभी कोई उसे खबर दे कि अमुक आदमी तुम्हारी बीबी को भगा ले गया तो वह धीरे से कह देगा, ले जाने दो। हम तो एडजस्ट करके चलते हैं।'
10. सिध्द संयोजक कभी आंख नहीं मिलाता। आंखों में चंदे का हिसाब लिखा रहता है। उसे पढ़कर कुछ लोग ईमान पर शक करते हैं और कुछ पैसा खींचने की कोशिश करते हैं।
11. मैले कपड़े और दाढ़ी हमारा 'मेकअप' है। इस रूप से चंदा देने वालों को संतोष होता है और मेहमानों की हिम्मत कुछ मांगने की नहीं होती। मेरी ऐसी सज देखकर प्रतिनिधि लोग भूखे सो जाएंगे, पर खाना नहीं मांगेंगे।

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Saturday, August 08, 2020

परसाई के पंच-4

 1. आदर्श प्रेमी के यही लक्षण होते हैं। वह उदास रहता है। चिढ़ता है। हर आदमी को अपना शत्रु समझता है।

2. सत्य की खोज करने वालों से मैं छटकता हूँ। वे अक्सर सत्य की तरफ पीठ करके उसे खोजते हैं।
3. सत्य की खोज कई लोगों के लिए ऐयासी है। यह गरीब आदमी की हैसियत से बाहर है।
4. बहुत से बेवकूफ जीवन का उद्देश्य खोजते हुए निरुद्देश्य जीवन जीते रहते हैं।
5. मैं हमेशा झूठ की तलाश में रहता हूँ। कोने-कोने में झूठ ढूंढता फिरता हूँ। झूठ मिल जाता है तो बहुत खुश होता हूँ।
6. लिफाफा हमेशा अपने और दूसरे को धोखा देने के काम आता है।
7. रकम की अनिश्चितता की बेचैनी सबको होती है। जिन्हें नहीं होती वे आदमी नहीं हैं और हैं भी तो झूठे हैं।
8. कला परिषद के उद्घाटन के लिए उन्होंने जेल मंत्री को बुला लिया था जैसे हार्ट स्पेशलिस्ट से बवासीर का इलाज कराया जाए।
9. इस देश में जो किसी की नौकरी नहीं करता, वह चोर समझा जाता है। गुलामी के सिवा शराफत की कोई पहचान हम जानते ही नहीं हैं।
10. बहुत से लोग पुलिस के डर से रिसर्च करते हैं। एम.ए. करने से नौकरी मिलते तक जो काम किया जाता है, उसे रिसर्च कहते हैं।
11. फिर से खोजना यानी जो पहले ही खोजा जा चुका है, उसे फिर से खोजना रिसर्च कहलाता है।

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Friday, August 07, 2020

परसाई के पंच-3

 1. अगर कोई आदमी डूब रहा हो, तो वे उसे बचाएंगे नहीं, बल्कि सापेक्षिक घनत्व के बारे में सोचेंगे।

2. कोई भूखा मर रहा हो, तो बुद्धिवादी उसे रोटी नहीं देगा। वह विभिन्न देशों के अन्न के आंकड़े बताने लगेगा।
3. बीमार आदमी को देखकर वह दवा का इंतजाम नहीं करेगा। वह विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट पढ़कर उसे सुनाएगा।
4. सिर्फ मैं समझता हूं, यह अहसास आदमी को नासमझ बना देता है।
5. देश सेवा थोड़ी बदतमीजी के बिना शोभा भी नहीं देती। थोड़ी बेवकूफी भी मिली हो, तो और चमक जाती है।
6. इस मुल्क को भगवान ने खासतौर से बनाया है। भगवान की बनायी चीज में इंसान सुधार क्यों करे? मुल्क सुधरेगा तो भगवान के हाथ से ही सुधरेगा।
7. रोटी बड़े-बड़े क्रांतिकारी को कमजोर बनाती है।
8. चक्कर लगाता प्रेमी बैठे प्रेमी से सवाया पड़ता है, क्योंकि वह मेहनत करता है।
9.भोली लड़की सुविधा की होती है। उसे पटाना आसान होता है।
10. ऐसे हंगामे मोहल्ले की नीरसता भंग करते हैं। महीने में एकाध लड़की भगायी न जाये, या कोई बलात्कार न हो, तो मोहल्ले के निवासी बहुत बोर होते हैं।
11. उस आदमी की बड़ी आफत होती है, जिसे दुनिया की हर स्त्री अच्छी लगती है और जो यह समझता है कि हर स्त्री मुझ पर जान देती है।ऐसे में एक भी स्त्री हाथ नहीं पड़ती।

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परसाई के पंच-1

 1. कुछ आदमी कुत्ते से अधिक जहरीले होते हैं।

2.मार्क ट्वेन ने लिखा है-'यदि आप भूखे कुत्ते मरते कुत्ते को रोटी खिला दें , तो वह आपको नहीं काटेगा। कुत्ते में और आदमी में यही मूल अंतर है।'
3. यह मध्यम वर्गीय कुत्ता है। उच्च वर्गीय होने का ढोंग भी करता है और सर्वहारा के साथ भौंकता भी है।
4. एक ऐसा आदमी था, जिसके पास जलती मशाल ले जाओ तो वह बुझ जाए।
5.गरीब आदमी न तो ' एलोपैथी' से अच्छा होता है , न 'होम्योपैथी' से; उसे तो 'सिम्पैथी' ( सहानुभूति) चाहिए।
6. प्यार करने वाली स्त्री बड़ी खतरनाक होती है। न जाने कब किससे प्यार करने लगे और तुम्हें पिटवा दे।
7. जोगिया से सिद्ध तक का जो रास्ता है, वह छल, कपट, प्रपंच और पाखण्ड के बीहड़ वन में से गुजरता है।
8. कुछ होते हैं जो दुख भी सुविधा से मांगते हैं, जिनका विछोह भी अजब रंगीनियों से भरा होता है, जिनका दुख भी एक त्योहार हो जाता है।
9. दुनिया को इतनी फुर्सत नहीं होती कि वह किसी कोने में बैठे उस आदमी को मान्यता देती जाए जो सिर्फ अपने को सही मानता है। उसकी अवहेलना होती है। अब सही आदमी क्या करे। वह सबसे नफरत करता है। खीझा रहता है। दुःख भरे तनाव में दिन गुजारता है।
10. उनकी मूंछो की सिफत यह थी कि आदमी और मौका देखकर बर्ताव करती थी। वे 'किसी के सामने 'आई डोंट केयर' के ठाठ की हो जातीं। फिर वे किसी और के सामने वे मूंछों पर इस तरह हाथ फेरते कि वे 'आई एम सॉरी सर' हो जातीं।
11. आदमी को समझने के लिए सामने से नहीं, कोण से देखना चाहिए। आदमी कोण से ही समझ में आता है।
परसाई जी का जन्म (23 अगस्त ) और निधन (10 अगस्त) अगस्त माह में हुआ। अपने पसंदीदा लेखक को याद रखने की मंशा से परसाई जी के लेखन और व्यक्तित्व से जुड़े अंश और प्रसंग यहां पोस्ट करने की मंशा से यह शुरआत कर रहा हूँ।

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