Tuesday, September 15, 2020

परसाई के पंच-34

 1. कथावाचक को हम कुलपति बना देते हैं, जुआड़ी को मन्त्री बना देते हैं, अयोग्य को ऊंचा पद और सुयोग्य को नीची जगह, शोषक को शोषितों का नेता, सिंह को भेड़ों की ट्रेड यूनियन का अध्यक्ष, चोर को मजिस्ट्रेट, घूस लेने वाले को घूस पकड़ने वाला – सब यूं ही बना देते हैं।

सड़ी सुपाड़ी की संस्कृति में यही होता है।
2. बम्बई मेल के तीसरे श्रेणी के डिब्बे में जिसने जगह पा ली, वह अगर परलोक जाय और देवता लोग उसे अनधिकारी समझ स्वर्ग में न घुसने दें , तो भी वहां लड़-झगड़कर वह एक कमरा तो ले ही लेगा।
3. अजामिल ने केवल ’नारायण’ नाम लेकर स्वर्ग में प्रवेश पा लिया। मुझे लगता है कि उस समय ’नारायण’ का बहनोई, ’गेटकीपर’ की ड्यूटी पर होगा।
4. अगर कोई मुझसे पूछे कि भारतीयों के चरित्र की सबसे बड़ी विशेषता क्या है, तो मैं कहूंगा- मौके-बेमौके अनायास परिचय बढाना, आत्मीयता पैदा करना।
5. प्रशंसा प्राप्त करते हुये आदमी का मुख दयनीय और हास्यास्पद होता है। उस समय उसके मुख पर वही दीनता और कृतज्ञता के भाव होते हैं, जो भिखारी के मुख पर होते हैं
6. अपने मूल रूप को जितना अधिक ढांकने में मनुष्य सफ़ल हुआ है, वह उतना ही सभ्य कहलाता है।
7. मनुष्य ने भी देवता को कम बुद्धू नहीं समझा। उसने यह मान लिया कि देवता नितान्त मूर्ख और अन्धा होता है, जो जरा-सी प्रशंसा से प्रसन्न हो काम कर देता है।
8. सभी-सोसाइटियों में तो जो जितना अधिक झूठ बोल सके, वह उतना ही बड़ा हो जाता है।
9. जिसे गुरुवर्ग ’गूड ब्वाय’ कह दे, उसे अपनी जिन्दगी बरबाद समझनी चाहिये।
10. महापुरुष मूल रूप से विद्रोही होता है, विद्रोही हुये बिना वह महान हो ही नहीं सकता।
11. सामान्य मनुष्य में जो त्याग, करुणा, सहानुभूति,परोपकार, साहस आदि होते हैं, उन्हीं पर यह दुनिया टिकी है।

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