Saturday, September 26, 2020

परसाई के पंच-47

 1. मूर्खता के सिवाय कोई भी मान्यता शाश्वत नहीं है। मूर्खता अमर है। वह बार-बार मरकर फ़िर जीवित हो जाती है।

2. अनुभव से ज्यादा इसका महत्व है कि किसी ने अनुभव से क्या सीखा। अगर किसी ने 50-60 साल के अनुभव से सिर्फ़ यह सीखा हो कि सबसे दबना चाहिये तो अनुभव के इस निष्कर्ष की कीमत में शक हो सकता है। किसी दूसरे ने इतने ही सालों में शायद यह सीखा हो कि किसी से नहीं डरना चाहिये।

3. केचुये ने लाखों सालों के अनुभव से कुल यह सीखा है कि रीढ की हड्डी नहीं होनी चाहिये।

4. बाजार बढ रहा है। इस सड़क पर किताबों की एक नयी दुकान खुली है और दवाओं की दो। ज्ञान और बीमारी का यही अनुपात है अपने शहर में। ज्ञान की चाह जितनी बढी है उससे दुगुनी दवा की चाह बढी है। यों ज्ञान खुद एक बीमारी है।

5. बेकार आदमी हैजा रोकते हैं, क्योंकि वे शहर की मक्खियां मार डालते हैं।

6. यह बीमारी प्रेमी देश है। तू अगर खुजली का मलहम ही बेचता तो ज्यादा कमा लेता। इस देश को खुजली बहुत होती है। जब खुजली का दौर आता है, तो दंगा कर बैठता है या हरिजनों को जला देता है। तब कुछ सयानों को खुजली उठती है और वे प्रस्ताव का मलहम लगाकर सो जाते हैं। खुजली सबको उठती है – कोई खुजाकर खुजास मिटाता है, कोई शब्दों का मलहम लगाकर।

7. सामने के हिस्से में जहां परिवार रहते थे वहां दुकानें खुलती जा रही हैं। परिवार इमारत में पीछे चले गये हैं। दुकान लगातार आदमी को पीछे ढकेलती चली जा रही है। दुकान आदमी को ढांपती जा रही है।

8. मैंने बहुत से क्राण्तिवीरों को बाद में भ्रांतिवीर होते देखा है। अच्छे-अच्छे स्वातन्त्र्य शूरों को दूकानों के पीछे छिपते देखा है।

9. दवायें सस्ती हो जायें, तो हर किसी की हिम्मत बीमार पड़ने की हो जायेगी। जो दवा में मुनाफ़ाखोरी करते हैं वे देशवासियों को स्वस्थ रहना सिखा रहे हैं। मगर यह कृतघ्न समाज उनकी निन्दा करता है।

10. बीमार पड़े , इसका मतलब है, स्वास्थ्य अच्छा है। स्वस्थ आदमी ही बीमार पड़ता है। बीमार क्या बीमार होगा। जो कभी बीमार नहीं पड़ते, वे अस्वस्थ हैं।

11. पूरा समाज बीमारी को स्वास्थ्य मान लेता है। जाति-भेद एक बीमारी ही है। मगर हमारे यहां कितने लोग हैं जो इसे समाज के स्वास्थ्य की निशानी समझते हैं। गोरों का रंग-दम्भ एक बीमारी है। मगर अफ़्रीका के गोरे इसे स्वास्थ्य का लक्षण मानते हैं। गोरों का रंग-दम्भ एक बीमारी है। मगर अफ़्रीका के गोरे इसे स्वास्थ्य का लक्षण मानते हैं और बीमारी को गर्व से ढो रहे हैं। ऐसे में बीमारी से प्यार हो जाता है। बीमारी गौरव के साथ भोगी जाती है।

परसाई के पंच -48 - https://www.facebook.com/anup.shukla.14/posts/10220810165897435


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